संयुक्त राष्ट्र महासभा (यूएनजीए) के 81वें सत्र में भारतीय राजनयिक पेटल गहलोत ने राइट टू रिप्लाई का इस्तेमाल किया। संयुक्त राष्ट्र महासभा के मंच से पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की ओर से सिंधु जल संधि पर दी गई गीदड़भभकी और कश्मीर राग छेड़ने को लेकर कड़ा जवाब दिया।
पेटल गहलोत ने शहबाज शरीफ की बखिया उधेड़ते हुए कहा, ”9/11 हमले का मास्टरमाइंड ओसामा बिन लादेन पाकिस्तान की सेना की प्रतिष्ठित अकादमी के ठीक पास रह रहा था। आज पाकिस्तान के प्रतिनिधि ने जिस संस्था की हमारे सामने इतनी गहरी प्रशंसा और चापलूसी की, उसी से जुड़ा यह तथ्य है। पाकिस्तान के लोग खुद जिस सरकार को फॉर्म 47 की सरकार कहते हैं, उससे ऐसी बातें सुनना कोई आश्चर्य की बात नहीं है।”
‘दिन में शांति की बात, रात में आतंकवाद’
उन्होंने कहा, ”पाकिस्तान की वास्तविकता उसके 27वें संशोधन और उसके वास्तविक शासक को दी गई आजीवन छूट से सामने आती है। हमने जिन विचारों को सुना, वे ऐसे लोगों की ओर से आए हैं जिनका कट्टरता और नफरत का लंबा रिकॉर्ड रहा है। वे दिन में सुरक्षा और शांति की बात करते हैं, लेकिन रात में वास्तव में आतंकवाद को अंजाम देते हैं।”
पेटल गहलोत ने कहा, ”इस महासभा में धार्मिक असहिष्णुता को लेकर उस शासन की ओर से टिप्पणियां की गईं, जिसकी बुनियाद ही ईशनिंदा कानूनों पर टिकी है। दुनिया जानती है कि पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों के साथ कैसा व्यवहार किया जाता है। कोई भी धार्मिक या नैतिक उपदेश दुनिया को गुमराह नहीं कर सकता।”
पाकिस्तान के कब्जे वाला जम्मू-कश्मीर में अपने ही लोगों पर अत्याचार
उन्होंने कहा, ”भारत के केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर का भी जिक्र किया गया। यह मेरे देश का अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा है और हमेशा रहेगा। अगर हमें कश्मीर की बात करनी ही है, तो हमारा ध्यान पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर की ओर होना चाहिए। रावलकोट के लोगों से पूछिए कि वे लंबे समय से मनमानी हत्याओं, क्रूर हिंसा और बुनियादी अधिकारों से वंचित किए जाने का सामना कैसे कर रहे हैं। इस पूरे मुद्दे के केंद्र में पाकिस्तान की सीमा पार आतंकवाद को लंबे समय से जारी रखने की नीति है।”
गहलोत ने कहा, ”हमने पिछले साल दिखा दिया था कि आतंकवादियों के पास न भागने की जगह होगी और न छिपने की। आतंकवाद के खिलाफ आत्मरक्षा के अपने अधिकार का हम इस्तेमाल करेंगे और पाकिस्तान की ओर से जारी आतंकवाद के परिणाम होंगे। इससे स्वाभाविक रूप से उन संबंधों पर भी सवाल उठेंगे, जो मित्रता और सद्भावना की भावना पर आधारित माने जाते थे।”
उन्होंने कहा, ”हमें विश्वास है कि यह महासभा पाकिस्तान और उसकी नीतियों को उसी रूप में देखेगी, जैसी वे वास्तव में हैं, न कि उस रूप में, जैसा पाकिस्तान का प्रतिनिधि झूठे तरीके से उन्हें पेश करता है। साल-दर-साल झूठ दोहराने से वे सच नहीं हो जाते। पाकिस्तान का आतंकवाद, छल और दोहरा रवैया न तो उसके लिए और न ही दुनिया के लिए किसी लाभ का कारण बनेगा।”





