एक ऐसी घटनाक्रम में जिससे दुनिया और पश्चिम एशिया में बेचैनी बढ़ सकती है। वॉल स्ट्रीट जर्नल ने खबर दी है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के सात दिन के युद्धविराम के प्रस्ताव को ठुकरा दिया है।
उन्होंने 22 सितंबर को असेंबली में कहा, ‘मुझे एक बड़ा फैसला लेना है। क्या ईरान के साथ कोई ऐसा समझौता होगा जिससे वे फिर से अपना देश बना सकें और उसे पहले से कहीं ज्यादा बेहतर और मजबूत देश बना सकें? शायद पश्चिम एशिया या दुनिया के सबसे बेहतरीन देशों में से एक। या फिर मैं इस्लामिक रिपब्लिक को पूरी तरह खत्म कर दूं। वह भी जल्दी, ताकि उन्हें दोबारा लोगों और देशों को मारने और बर्बाद करने का मौका ही न मिले? लेकिन मुझे लगता है कि चुनाव के ठीक बाद हम समझौता कर लेंगे, क्योंकि उनके लिए समझौता न करने का कोई मतलब नहीं बनता।
वहीं, गुरुवार को ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अरागची ने कहा कि ईरान ने पश्चिम एशिया में संघर्ष खत्म करने के लिए सात दिन का प्लान पेश किया है। इस प्लान का मकसद होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलना और उसके बाद ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर व्यापक बातचीत शुरू करना भी है। अरागची ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में पत्रकारों से कहा कि यह प्रस्ताव उसी समझौता ज्ञापन जैसा है, जिस पर इस साल जून में अमेरिका और ईरान के बीच सहमति बनी थी।
वहीं, जर्मन विदेश मंत्री जोहान वाडेफुल के साथ अपनी बैठक में, अरागची ने जोर देकर कहा कि इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान ने कूटनीति को आगे बढ़ाने के लिए अपनी उचित शर्तें और जरूरतें अमेरिकी पक्ष को बता दी हैं। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि क्षेत्र में सुरक्षा बहाल करने के लिए ईरान के खिलाफ अमेरिका की दखलंदाजी और आक्रामक कार्रवाइयों को रोकना जरूरी है।





