पीओके में चुनाव के बीच भारत में बड़े आतंकी हमले की साजिश, हैंडलर्स की बातचीत पर एजेंसियां अलर्ट

पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) के पुंछ डिवीजन की 11 सीटों पर 10 अगस्त को होने वाले तीसरे चरण के मतदान से दुनिया का ध्यान भटकाने के लिए पाकिस्तान जम्मू-कश्मीर के साथ ही देश के अन्य हिस्सों में बड़े आतंकी हमलों की साजिश रच रहा है।

आतंकियों के बीच हुई बातचीत और उनके संदेश इंटरसेप्ट होने पर सुरक्षा एजेंसियों को यह महत्वपूर्ण जानकारी मिली है। एजेंसियों के अनुसार, इन संभावित हमलों को पाकिस्तान जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाए जाने के खिलाफ स्थानीय लोगों के कथित प्रतिरोध के रूप में प्रचारित करने की तैयारी कर रहा है, ताकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भ्रामक संदेश दे सके। उसकी कोशिश पीओके में हो रहे नरसंहार से पूरी दुनिया का ध्यान भटकाकर भारत पर केंद्रित करना है।
पीओके में नरसंहार के लिए पाकिस्तान ने अब रेंजर उतारे
पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) के मुजफ्फराबाद, रावलाकोट, कोटली और मीरपुर में जारी आंदोलन को नियंत्रित करने में विफल रहने के बाद पाकिस्तान ने अब प्रभावित क्षेत्रों में बड़ी संख्या में पाकिस्तानी रेंजरों की तैनाती कर दी है। सूत्रों के अनुसार, इन जवानों को सेटेलाइट निगरानी से बचाने के लिए सिविल ड्रेस पहनाई गई है। सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार चारों प्रमुख शहरों के सरकारी भवनों, प्रशासनिक परिसरों, प्रमुख चौराहों और ऊंची इमारतों पर पाकिस्तानी रेंजरों की मौजूदगी देखी गई है।
टीआरएफ को सौंपी है आतंकी हमले की जिम्मेदारी
सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार आतंकी हमले की जिम्मेदारी आतंकी संगठन लश्कर-ए-ताइबा के मुखौटा संगठन द रेजिस्टेंस फ्रंट (टीआरएफ) को सौंपी गई है। इसका उद्देश्य आतंकी घटनाओं को स्थानीय असंतोष का रूप देकर पीओके में चुनाव के दौरान उत्पन्न हो रहे राजनीतिक दबाव और वहां की वास्तविक परिस्थितियों से वैश्विक समुदाय का ध्यान हटाना है।
ये हैं निशाने पर…
सैन्य प्रतिष्ठानों, सुरक्षा बलों के कैंप, भीड़भाड़ वाले सार्वजनिक स्थल, धार्मिक स्थान, परिवहन केंद्र तथा महत्वपूर्ण सरकारी संस्थान आतंकियों के संभावित निशाने पर हैं। इसे देखते हुए संवेदनशील क्षेत्रों में अतिरिक्त सुरक्षा बलों की तैनाती, निगरानी तंत्र को और मजबूत करने, वाहनों की सघन जांच तथा संदिग्ध गतिविधियों पर कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
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