Twisha Sharma- गिरिबाला सिंह की जमानत पर फैसला सुरक्षित, CBI और परिजनों ने किया विरोध

Spread the love

राजधानी के बहुचर्चित त्विषा शर्मा संदिग्ध मृत्यु मामले में जेल में बंद सेवानिवृत्त प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश गिरिबाला सिंह की जमानत अर्जी पर शुक्रवार को जिला न्यायालय में तीखी बहस हुई। सीबीआई की विशेष अदालत और परिजनों के अधिवक्ताओं का पक्ष सुनने के बाद अदालत ने अपना निर्णय सुरक्षित रख लिया है। शनिवार को इस पर फैसला आने की संभावना है। मामले की संवेदनशीलता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इससे पहले तीन न्यायाधीश अलग-अलग व्यक्तिगत कारणों से इस याचिका पर सुनवाई से खुद को अलग कर चुके हैं। शुक्रवार को सीबीआई के विशेष न्यायाधीश ने भी यह कहते हुए सुनवाई से इनकार कर दिया कि उन्होंने आरोपी गिरिबाला सिंह के अधीन न्यायिक प्रशिक्षण प्राप्त किया है। इसके पश्चात मामला प्रथम अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश रामप्रताप मिश्र की अदालत में स्थानांतरित किया गया, जहां विस्तृत सुनवाई हुई।

बचाव पक्ष ने दिया बुजुर्ग मां का हवाला
बचाव पक्ष के वक्ताओं ने तर्क दिया कि गिरिबाला सिंह की मां लगभग 100 वर्ष की हैं और वे पूरी तरह अपनी बेटी की देखभाल पर निर्भर हैं। याचिकाकर्ता स्वयं भी कई स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रही हैं और जेल में उन्हें पर्याप्त चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध नहीं हो पा रही हैं। इसके अलावा, आरोपी को नियमित पेंशन एवं युद्ध वीरांगना पेंशन मिलती है। आर्थिक रूप से पूरी तरह सक्षम होने के कारण उन पर दहेज प्रताड़ना का आरोप स्वाभाविक प्रतीत नहीं होता। बचाव पक्ष ने दावा किया कि आरोपी जांच में पूरा सहयोग कर रही हैं और उनके जेल में रहने के दौरान उनके घर पर चोरी भी हो चुकी है।

सीबीआई और त्विषा के परिजनों ने किया विरोध
सीबीआई की ओर से उपस्थित अधिवक्ता अंकुर पांडेय ने जमानत याचिका का पुरजोर विरोध करते हुए कहा कि केवल महिला होना या आर्थिक रूप से संपन्न होना जमानत का आधार नहीं बन सकता। सीबीआई ने अदालत में जेल प्रशासन की मेडिकल रिपोर्ट पेश कर आरोपी के स्वास्थ्य को सामान्य बताया। साथ ही ध्यान दिलाया कि उच्च न्यायालय पहले ही उनकी अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर चुका है और जांच के दौरान आरोपी ने अपना वॉइस सैंपल देने से भी साफ इनकार कर दिया था। सीबीआई ने खुलासा किया कि आरोपी ने सीसीटीवी तकनीशियन और एक सैलून संचालक से संपर्क कर निजी प्रतिनिधि के माध्यम से फुटेज हासिल करने का प्रयास किया था। जमानत मिलने पर गवाहों और साक्ष्यों को प्रभावित करने की प्रबल संभावना है। त्विषा शर्मा के परिजनों के अधिवक्ता ने मां की देखभाल वाले तर्क को खारिज करते हुए कहा कि आरोपी की बुजुर्ग मां कभी उनके साथ नहीं रही हैं। वे केवल जेल से बाहर निकलने के लिए मां का सहारा ले रही हैं ताकि बाहर आकर मामले की निष्पक्ष जांच को प्रभावित कर सकें। अदालत ने दोनों पक्षों की विस्तृत दलीलें सुनने के उपरांत अदालत ने मामले का फैसला सुरक्षित रख लिया है। संभावना है कि शनिवार को जमानत याचिका पर अदालत अपना फैसला सुनाएगी।

Spread the love
और पढ़े  श्रावण मास से पहले ओंकारेश्वर में बड़ा बदलाव, दर्शन और ट्रैफिक के लिए नया प्लान तैयार
  • Related Posts

    IAS Transfer: GIS-2027 की कमान मंडलोई को, खाड़े सचिव CMO, लक्ष्यकार बने इंदौर आयुक्त, कटेसरिया रतलाम DM

    Spread the love

    Spread the loveमध्य प्रदेश सरकार ने बड़े प्रशासनिक फेरबदल में 20  वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों को नई जिम्मेदारियां सौंपी हैं। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने जनवरी 2027 में भोपाल में प्रस्तावित ग्लोबल…


    Spread the love

    आरक्षक ने पूर्व सहकर्मी की नाबालिग बेटी के साथ किया गंदा काम, सिपाही होटल के बाहर दे रहा था पहरा

    Spread the love

    Spread the loveमध्यप्रदेश पुलिस के दो आरक्षकों ने न केवल खाकी को शर्मसार किया है, बल्कि भरोसे और रिश्तों को भी तार-तार कर दिया। धार जिले में पदस्थ एसएएफ आरक्षक…


    Spread the love