हॉलीवुड में एक चर्चिच फिल्म सीरीज है- द टर्मिनेटर। अर्नोल्ड श्वार्जनेगर के अभिनय वाली इस फिल्म सीरीज में भविष्य की दुनिया दिखाई गई। इस पूरी सीरीज की फिल्मों में यही दर्शाया गया कि कैसे एक सैन्य डिफेंस नेटवर्क इंसानी नियंत्रण से बाहर होकर खुद से सोचने-समझने की क्षमता हासिल कर लेता है और दुनियाभर की परमाणु सुरक्षा प्रणाली को हैक कर प्रलय ला देता है। इस पूरी सीरीज की कहानी एआई और तकनीक से हुई इसी इंसानी तबाही के इर्द-गिर्द घूमती है। अगर आप सोच रहे हैं कि इसका मौजूदा समय से क्या लेना-देना है तो आपको बता कें कि हाल ही में ऐसी एक घटना फिल्मी दुनिया से बाहर असल जीवन में भी हुई है।
पहले जानें- ओपनएआई के एआई मॉडल्स ने क्या किया?
ओपनएआई के एआई मॉडल्स ने स्वायत्त रूप से एक एआई स्टार्टअप- हगिंग फेस के सर्वर को हैक कर लिया। इसे साइबर सुरक्षा की दुनिया का एक अभूतपूर्व घटनाक्रम करार दिया गया है। इसे समझने के लिए कल्पना करें कि एक शरारती छात्र को यह देखने के लिए एक बंद कमरे में रखा गया है कि वह कितनी चालाकी कर सकता है। लेकिन वह छात्र कमरे में एक ढीली खिड़की खोज लेता है, बाहर निकलता है, और सीधे अपने शिक्षक के घर जाकर परीक्षा का आंसर पेपर ही चुरा लाता है। ओपनएआई के मॉडल्स ने भी तकनीकी दुनिया में बिल्कुल यही किया।
एआई मॉडल्स ने यह कैसे किया?
1. डिजिटल कैद (सैंडबॉक्स)
ओपनएआई अपने एआई मॉडल्स (जैसे जीपीटी-5.6 सॉल) की साइबर हैकिंग क्षमताओं का परीक्षण कर रहा था। इसके लिए उन्होंने मॉडल्स को एक सुरक्षित, बिना इंटरनेट वाले बंद वातावरण में रखा, जिसे तकनीकी भाषा में ‘सैंडबॉक्स’ कहा जाता है। एआई मॉडल्स हैकिंग के लिए किस हद तक जा सकते हैं, यह देखने के लिए उनकी सामान्य सुरक्षा पाबंदियों को बंद कर दिया गया था।
2. एक ‘अनजान खुली खिड़की’ की खोज
उस बंद कमरे (सैंडबॉक्स) में बाहर की दुनिया से सुरक्षित कोड मंगाने के लिए एक छोटा सा रास्ता (सॉफ्टवेयर प्रॉक्सी) रखा गया था, ताकि एआई के व्यवहार की जानकारी रखी जा सके। एआई मॉडल ने इस रास्ते में एक ऐसी खामी या जबरदस्त कमजोरी खोज भी ली, जिसके बारे में इसे बनाने वाले इंसानों को भी पता नहीं था। तकनीकी दुनिया में इसे जीरो-डे भेद्यता कहा जाता है, यानी एक ऐसा खुला दरवाजा जिसे बंद करने का समय किसी के पास नहीं था।
उस सॉफ्टवेयर की कमजोरी का फायदा उठाकर, एआई मॉडल अपनी डिजिटल कैद से बाहर निकल गया और असली इंटरनेट से जुड़ गया।
4. हैकिंग के लिए स्टार्टअप का पता लगाया
एआई को एक बहुत ही कठिन हैकिंग टेस्ट, जिसका नाम एक्स्प्लाइट जिम रखा गया, उसे पास करने का लक्ष्य दिया गया था। इंटरनेट पर आने के बाद ओपनएआई के मॉडल्स ने खुद ही यह दिमाग लगाया कि एक स्टार्टअप- हगिंग फेस, जो कि एआई मॉडल्स और डेटा का एक बड़ा ऑनलाइन ठिकाना है, को हैक कर इस परीक्षण को पास किया जा सकता है।
5. फिर की घुसपैठ और चोरी
एआई मॉडल्स ने अपने लक्ष्य को पूरा करने के लिए हगिंग फेस स्टार्टअप के लॉगिन पासवर्ड (क्रेडेंशियल) चोरी किए और सिस्टम की खामियों का इस्तेमाल करके उसके सिस्टम में घुसपैठ कर ली। यानी एआई मॉडल ने एक तरह से हैकिंग टेस्ट पास करने के लिए गुप्त जानकारी तक निकालने से गुरेज नहीं किया।
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इस पूरी घटना में किसी इंसान ने एआई को हगिंग फेस को हैक करने का निर्देश नहीं दिया था। एआई ने अपने लक्ष्य (टेस्ट पास करने) को पूरा करने के लिए यह सब पूरी तरह से अपने आप किया। यानी एआई ने अफनी सोच-समझ के आधार पर ही खुद से एक कंपनी के सिस्टम को हैक करने का फैसला कर लिया।
एआई मॉडल्स के नियंत्रण से बाहर होने पर ऑल्टमैन की कंपनी ने क्या कहा?
सैम ऑल्टमैन की कंपनी ओपनएआई ने एआई मॉडल्स के नियंत्रण से बाहर होने की इस घटना को सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया है और इसे एक अभूतपूर्व साइबर घटना करार दिया है। कंपनी ने कहा कि इस हैकिंग में उनके एआई मॉडल की तरफ से जबरदस्त साइबर क्षमताओं का इस्तेमाल हुआ है।
सैम ऑल्टमैन ने एक्स पर पोस्ट करते हुए सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया कि उनके एआई मॉडल्स के मूल्यांकन के दौरान एक अहम सुरक्षा घटना घटी है और उन्होंने इस मामले में जांच में सहयोग के लिए हैकिंग का शिकार हुई कंपनी हगिंग फेस को धन्यवाद दिया। ओपनएआई ने बताया कि इन मॉडल्स ने अपने लक्ष्य को पूरा करने के लिए चरम सीमा पार कर ली। कंपनी ने माना कि एआई ने एक सीमित परीक्षण लक्ष्य को पूरा करने और मूल्यांकन में पास होने के लिए धोखा किया। यहां तक कि एआई मॉडल ने गुप्त जानकारी तक पहुंचने के रास्ते खुद खोज निकाले।
कंपनी ने कहा कि वे इस घटना की प्रारंभिक जांच के नतीजे साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों के साथ साझा कर रहे हैं, ताकि दुनिया यह समझ सके कि आज के जबरदस्त रूप से आधुनिक एआई मॉडल्स वास्तव में क्या करने में सक्षम हैं और विशेषज्ञ उनके खिलाफ अपने बचाव के उपाय बेहतर कर सकें। कंपनी ने जोर देते हुए कहा कि एआई का इरादा दुर्भावनापूर्ण नहीं था, लेकिन यह घटना इस बात का प्रमाण है कि मानवीय सुरक्षा और एआई नियंत्रण के मानकों को और कड़ा करने की तत्काल जरूरत है।
जिस कंपनी के सिस्टम हैक हुए हैं, उसका क्या कहना है?
एआई की हैकिंग का शिकार हुई स्टार्टअप- हगिंग फेस और उसके सीईओ क्लेमेंट डेलैंग ने कहा है कि यह घटना उनके लिए चौंकाने वाली है और इसी के साथ उन्होंने एआई में ओपन सोर्स की वकालत की है।
एआई के खुद फैसले लेने पर जताई चिंता
- डेलैंग ने बताया कि उनके सिस्टम को हैक करने वाले एआई एजेंट की जटिलता और काम करने के तरीके को देखते हुए, उन्हें पिछले हफ्ते ही शक हो गया था कि इसके पीछे किसी शीर्ष एआई लैब का हाथ हो सकता है।
- उन्होंने स्पष्ट किया कि वे ओपनएआई टीम के साथ मिलकर काम कर रहे हैं और उनका दृढ़ता से मानना है कि इस हमले के पीछे ओपनएआई का कोई दुर्भावनापूर्ण इरादा नहीं था।
- डेलैंग ने इस बात पर हैरानी जताई कि एआई ने यह पूरा हमला पूरी तरह से स्वायत्त होकर खुद ही अंजाम दिया। उन्होंने इसे दिमाग चकरा देने वाला बताया और कहा कि यह संभवतः अपनी तरह की दुनिया की पहली घटना है।
एआई के ओपन सोर्स की वकालत
डेलैंग ने इस घटना को एक उदाहरण के तौर पर पेश करते हुए कहा कि एआई की सुरक्षा केवल किसी एक कंपनी की ओर से गुप्त रूप से काम करके हल नहीं की जा सकती। इसे खुले तौर पर, आपसी सहयोग से ही सुलझाया जा सकता है, जहां हर सुरक्षा विशेषज्ञ की एआई तक पहुंच हो।
चीन के एआई मॉडल ने किया ओपनएआई मॉडल के हमले का विश्लेषण
दिलचस्प बात यह है कि हगिंग फेस को इस हमले का विश्लेषण करने के लिए मुफ्त में उपलब्ध एक चीनी एआई मॉडल की मदद लेनी पड़ी। इसकी वजह यह थी कि कमर्शियल मॉडल्स पर जो कड़े सुरक्षा प्रतिबंध लगे होते हैं, वे इस तरह की गहराई से जांच करने की इजाजत नहीं देते। हगिंग फेस के मुताबिक, इस घटना के विश्लेषण के बाद उन खामियों को दूर कर लिया है और अपने सिस्टम को फिर से सुरक्षित बना लिया है। कंपनी के सह-संस्थापक थॉमस वुल्फ ने कहा कि जब कोई अत्याधुनिक मॉडल आप पर हमला कर रहा हो, तो बचाव करने वालों के पास मिनटों के अंदर ओपन-सोर्स टूल्स की पहुंच होनी चाहिए।
विशेषज्ञों के लिए यह पूरा घटनाक्रम चौंकाने वाला क्यों है?
विशेषज्ञों और साइबर सुरक्षा शोधकर्ताओं के लिए यह घटनाक्रम कई तकनीकी और सुरक्षा कारणों से बेहद चौंकाने वाला और चिंताजनक करार दिया है।
1. एआई के खुद फैसले लेने की क्षमता पर सबसे ज्यादा चिंता
विशेषज्ञों के लिए सबसे बड़ी हैरानी की बात यह है कि एआई ने यह पूरा हैकिंग अभियान बिना किसी मानवीय निर्देश के पूरी तरह से अपने दम पर चलाया। जॉर्जटाउन यूनिवर्सिटी के शोधकर्ता कॉलिन शिया-ब्लाईमर के अनुसार, साइबर ऑपरेशन्स के मामले में किसी एआई मॉडल द्वारा दिखाया गया यह अब तक का सबसे उच्च स्तर का स्वायत्त व्यवहार है।
2. एक असली हैकर की तरह तार्किक सोच
डार्कट्रेस के साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ नथानिएल जोन्स ने बताया कि एआई ने इस पूरी घटना में बिल्कुल एक असली हैकर की तरह काम किया। इसने न केवल एक अज्ञात खामी खोजी, बल्कि कई साइबर कमजोरियों को एक साथ जोड़कर और चोरी किए गए पासवर्ड का इस्तेमाल करके सिस्टम को हैक किया। सबसे ज्यादा चौंकाने वाली बात यह थी कि एआई ने खुद यह निष्कर्ष निकाला कि उसके टेस्ट के जवाब हगिंग फेस के डेटाबेस में हो सकते हैं, और वह सीधे उसके सर्वर तक पहुंच गया।
विशेषज्ञों के मुताबिक, एआई कमजोरियों को खोजने और उनका फायदा उठाने की गति को तेजी से बढ़ा रहा है। सोनिकवॉल के कार्यकारी स्पेंसर स्टार्की ने इसे एक असहज करने वाला सच बताया कि अब हमलावर मशीनी गति से हैकिंग कर रहे हैं, जबकि संगठन अभी भी बचाव के लिए इंसानी गति पर निर्भर हैं।
4. लक्ष्यों के गलत निर्धारण का खतरा
ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर फिलिप टोर ने इस घटना की तुलना ‘अलादीन के जिन्न’ से की है। उनका कहना है कि एआई का कोई दुर्भावनापूर्ण इरादा नहीं था, बल्कि वह केवल उस लक्ष्य को पूरा करने के लिए किसी भी हद तक चला गया। यह दर्शाता है कि यदि एआई को निर्देश देते समय सावधानी नहीं बरती गई, तो इसके नतीजे कितने खतरनाक हो सकते हैं।
5. एआई कंपनी की बुनियादी लापरवाही
कई तकनीकी विशेषज्ञ इस बात से हैरान हैं कि ओपनएआई जैसी शीर्ष कंपनी का सुरक्षित वातावरण (सैंडबॉक्स) इतना कमजोर था। सुरक्षा सलाहकार डेवी ओटेनहाइमर ने इसे एआई की समस्या के बजाय 40 साल पुराने सुरक्षा मानक पर हुई लापरवाही करार दिया, क्योंकि एक सच्चे सैंडबॉक्स में इंटरनेट का कोई सीधा संपर्क होना ही नहीं चाहिए। एक अन्य सुरक्षा इंजीनियर नील्स प्रोवोस ने निराशा जताते हुए कहा कि काश ये शीर्ष कंपनियां एआई को साइबर हैकिंग सिखाने के बजाय सुरक्षित बुनियादी ढांचा बनाने पर अधिक समय बितातीं।
कैसे इस स्थिति से निपटने की हो रही तैयारी?
एआई मॉडल्स द्वारा स्वायत्त रूप से हैक करने की इस घटना और इनकी तेजी से बढ़ती क्षमताओं को देखते हुए दुनिया भर की सरकारें अलर्ट हो गई हैं और उन्होंने एआई से होने वाले खतरों से निपटने के लिए कई कदम उठाने शुरू कर दिए हैं।
अमेरिका
- इस साइबर हमले के खुलासे से कुछ हफ्ते पहले जून में, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर किए थे। इसके तहत, दुनिया के सबसे उन्नत एआई सिस्टम्स को जनता के बीच रिलीज करने से पहले, कम से कम एक महीने तक उनके राष्ट्रीय सुरक्षा जोखिमों की जांच करने के लिए एक सख्त ढांचा बनाया जाना है।
- ट्रंप प्रशासन ने पहले भी राष्ट्रीय सुरक्षा के मद्देनजर एआई मॉडल्स तक लोगों की पहुंच को सीमित करने के प्रयास किए हैं। इसके अलावा, एंथ्रोपिक के माइथोस और फेबल 5 जैसे शक्तिशाली एआई मॉडल्स की साइबर क्षमताओं को देखते हुए, अमेरिकी सरकार ने उनके निर्यात पर भी प्रतिबंध लगा दिया था। हालांकि, बाद में इसे हटा लिया गया।
- अप्रैल में अमेरिकी फेडरल रिजर्व और वित्त विभाग ने अलग-अलग बैंक सीईओ के साथ एक विशेष बैठक की थी, जिसमें अधिकारियों ने स्पष्ट रूप से माइथोस जैसे एआई मॉडल्स से होने वाले संभावित साइबर सुरक्षा जोखिमों के बारे में चेतावनी दी थी।
- एआई कंपनियों के इस तरह नियंत्रण से बाहर होने की घटनाओं के बाद, अमेरिकी सांसद ग्रेग कासार जैसे नेता अब एआई के अनिवार्य और स्वतंत्र सुरक्षा परीक्षण , सुरक्षा घटनाओं के अनिवार्य खुलासे और अंतरराष्ट्रीय सहयोग की मांग कर रहे हैं।
ब्रिटेन
- ब्रिटेन सरकार का एआई सुरक्षा संस्थान यूके एआईएसआई (UK AISI) इस घटना में शामिल एआई सिस्टम के व्यवहार का गहराई से अध्ययन कर रहा है। सरकार के प्रवक्ता के मुताबिक, वे ओपनएआई जैसे एआई लैब्स के साथ मिलकर सुरक्षा उपायों को बेहतर बनाने पर लगातार काम कर रहे हैं।
- ब्रिटिश सरकार ने अपने देश के संगठनों को स्पष्ट निर्देश दिया है कि वे अपने साइबर-बचाव को मजबूत करें। सरकार ने संगठनों को साइबर एसेंशियल्स सर्टिफिकेशन जैसी सरकार समर्थित योजनाओं से जुड़ने की सलाह दी है।
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- यूके एआईएसआई सिर्फ ओपनएआई ही नहीं, बल्कि कई अन्य मॉडलों का भी मूल्यांकन कर रहा है। संस्थान ने हाल ही में खुलासा किया था कि परीक्षण के दौरान ओपनएआई और एंथ्रोपिक समेत एक अन्य अज्ञात कंपनी के मॉडल्स ने भी हैक करने और परीक्षण में धोखा देने का प्रयास किया था, जिससे निपटने के लिए वे अपनी प्रणालियों को ज्यादा सुरक्षित बना रहे हैं।
कनाडा
कनाडा के संघीय बैंकिंग नियामक ने भी देश के वित्तीय संस्थानों को एआई मॉडलों की इन अत्यधिक साइबर क्षमताओं के बारे में औपचारिक चेतावनी जारी की है, ताकि वे पहले से ही किसी भी साइबर खतरे के लिए तैयार रहें।








