नई दिल्ली की लोधी कॉलोनी स्थित बीके दत्त कॉलोनी के एक मकान में आग लगने से मां और दो बेटियों की जिंदा जलकर मौत हो गई। मकान की तीसरी मंजिल पर आग से कमरे के अंदर फर्नीचर, इलेक्ट्रॉनिक सामान, एसी भी जल कर खाक हो गए। शुरुआती जांच में आग लगने का कारण शॉर्ट सर्किट बताया गया है, लेकिन पुलिस अन्य पहलुओं से भी जांच कर रही है।
मृतकों में आकांक्षा (40), आराध्या उर्फ मित्जी (12) व मिहिका उर्फ रिट्जी (8) शामिल हैं। दक्षिण जिला पुलिस उपायुक्त अनंत मित्तल ने बताया कि मंगलवार सुबह 10:26 बजे पड़ोसियों ने धुआं उठता देख पीसीआर को आग लगने की सूचना दी। इसके बाद दमकल की तीन गाड़ियों को मौके पर भेजा गया।
तीसरी मंजिल पर लगी आग की भनक दूसरी मंजिल पर मौजूद आकांक्षा के पति मोहित शर्मा और सास सरिता को नहीं लग पाई। धुआं उठता देख आसपास के लोग मौके पर पहुंचे, लेकिन गेट अंदर से बंद था। दमकलकर्मियों ने काफी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया।
इसके बाद दरवाजा तोड़कर कमरे के अंदर पहुंचे तो आकांक्षा और दोनों बच्चियों के बुरी तरह जले शव मिले। फोरेंसिक और क्राइम टीम ने मौके से साक्ष्य जुटाए हैं। तीनों शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। पुलिस का कहना है कि बच्ची मिहिका ने आग से बचने का प्रयास किया था। उसका शव दरवाजे के पास मिला है, जबकि आकांक्षा और आराध्या के शव बिस्तर के पास पाए गए।
आकांक्षा को थी मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्या
आकांक्षा के पति मोहित शर्मा और सास सरिता वकील हैं। आराध्या लोधी रोड थाने के पीछे स्थित सेंट्रल स्कूल में आठवीं कक्षा की छात्रा थी, जबकि मिहिका एयरफोर्स बाल भारती स्कूल में चौथी में पढ़ती थी। लोगों ने बताया कि स्कूल खुलने के बाद दोनों बेटियां एक या दो दिन ही स्कूल गई थीं।
बंद कमरा, धुएं का जाल… कुछ ही मिनटों में बुझ गईं तीन जिंदगियां
बीके दत्त कॉलोनी के जिस कमरे में मंगलवार सुबह आग लगी, वहां लपटों से पहले जानलेवा धुएं ने कहर बरपाया। प्रारंभिक जांच के अनुसार, आग लगने के बाद कमरे में तेजी से धुआं भर गया, जिससे भीतर मौजूद मां और दोनों बेटियों को बाहर निकलने का मौका नहीं मिल सका।
पुलिस और दमकल विभाग की प्राथमिक जांच में सामने आया कि आठ वर्षीय मिहिका ने आखिरी क्षणों में कमरे से बाहर निकलने की कोशिश की थी। उसका शव कमरे के दरवाजे के पास मिला, जबकि मां आकांक्षा और बड़ी बेटी आराध्या के शव बिस्तर के निकट पाए गए। इससे आशंका जताई जा रही है कि दोनों धुएं और आग के बीच फंस गईं, जबकि मिहिका ने बाहर निकलने का प्रयास किया, लेकिन सफल नहीं हो सकी।
पड़ोसियों ने सबसे पहले उन्होंने तीसरी मंजिल से धुआं उठते देखा। जब तक लोगों ने मदद के लिए दौड़ लगाई और दमकल विभाग को सूचना दी, तब तक आग कमरे में फैल चुकी थी। दरवाजा बंद होने के कारण वे भीतर नहीं पहुंच सके।
दमकलकर्मियों ने दरवाजा तोड़ उन्हें बाहर निकाला, पर तब तक देर हो चुकी थी। इस साल 68 लोगों की गई जान दमकल विभाग के मुताबिक 2026 में अब तक आग की घटनाओं की वजह से कम से कम 68 लोगों की मौत दर्ज की गई हैं। आग लगने के अधिकतर हादसे शॉर्ट सर्किट से जुड़े थे।
हाल में आग लगने की घटनाएं
3 जून, 2026 मालवीय नगर में होटल में आग लगने से 21 लोगों की मौत, 47 से अधिक व्यक्तियों को सुरक्षित बाहर निकालकर अस्पताल में भर्ती कराया गया।
5 जून, 2026 ग्रेटर कैलाश के एसटीटी ग्लोबल डाटा सेंटर इंडिया में लगी आग से कई कंपनियों की सेवाएं प्रभावित हुईं। हालांकि, हादसे में जनहानि नहीं हुई।
26 जून, 2026 : अजमेरी गेट इलाके की इमारत की रसोई में आग लगने से दो भाई झुलस गए।






