कोविड-19 महामारी और एंटीमाइक्रोबियल रेसिस्टेंस (एएमआर) जैसी चुनौतियों के बाद दुनिया अब एक और गंभीर स्वास्थ्य संकट का सामना कर रही है। यह खतरा तेजी से बढ़ रहे फंगल संक्रमणों और एंटीफंगल दवाओं के प्रति विकसित हो रहे प्रतिरोध का है।
दुनिया भर के विशेषज्ञों की राय से तैयार हुई रणनीति
डब्ल्यूएचओ की यह रणनीति दुनिया भर के 150 से अधिक चिकित्सकों, वैज्ञानिकों, विशेषज्ञों के सुझावों के आधार पर तैयार की गई है। इसका उद्देश्य विशेष रूप से निम्न और मध्यम आय वाले देशों की सहायता करना है, जहां फंगल संक्रमण की पहचान करने वाली प्रयोगशालाएं, प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मी और प्रभावी उपचार सीमित हैं। रणनीति में स्वास्थ्यकर्मियों और चिकित्सकों को फंगल संक्रमण की समय पर पहचान और उचित उपचार के लिए प्रशिक्षित करने पर विशेष जोर दिया गया है।
डब्ल्यूएचओ की यह रणनीति दुनिया भर के 150 से अधिक चिकित्सकों, वैज्ञानिकों, विशेषज्ञों के सुझावों के आधार पर तैयार की गई है। इसका उद्देश्य विशेष रूप से निम्न और मध्यम आय वाले देशों की सहायता करना है, जहां फंगल संक्रमण की पहचान करने वाली प्रयोगशालाएं, प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मी और प्रभावी उपचार सीमित हैं। रणनीति में स्वास्थ्यकर्मियों और चिकित्सकों को फंगल संक्रमण की समय पर पहचान और उचित उपचार के लिए प्रशिक्षित करने पर विशेष जोर दिया गया है।
वन हेल्थ मॉडल से होगी व्यापक निगरानी
डब्ल्यूएचओ का कहना है कि फंगल संक्रमण से निपटने के लिए वन हेल्थ दृष्टिकोण अपनाना आवश्यक होगा, जिसमें मानव स्वास्थ्य के साथ पशु स्वास्थ्य, कृषि और पर्यावरण को भी समान महत्व दिया जाएगा। संगठन के अनुसार जब तक खेतों में उपयोग फफूंदनाशकों, पशुओं में इस्तेमाल एंटीफंगल दवाओं पर ध्यान नहीं दिया जाएगा, तब तक इसपर नियंत्रण संभव नहीं होगा।
डब्ल्यूएचओ का कहना है कि फंगल संक्रमण से निपटने के लिए वन हेल्थ दृष्टिकोण अपनाना आवश्यक होगा, जिसमें मानव स्वास्थ्य के साथ पशु स्वास्थ्य, कृषि और पर्यावरण को भी समान महत्व दिया जाएगा। संगठन के अनुसार जब तक खेतों में उपयोग फफूंदनाशकों, पशुओं में इस्तेमाल एंटीफंगल दवाओं पर ध्यान नहीं दिया जाएगा, तब तक इसपर नियंत्रण संभव नहीं होगा।






