26 साल की सबसे बड़ी कटौती, सऊदी अरब ने सस्ता किया कच्चा तेल, भारत को कितना होगा फायदा?

दुनिया के सबसे बड़े तेल निर्यातक देशों में शामिल सऊदी अरब ने कच्चे तेल की कीमत में 26 वर्षों की सबसे बड़ी कटौती कर वैश्विक ऊर्जा बाजार को चौंका दिया है। अगस्त के लिए अरब लाइट क्रूड की कीमत में 11 डॉलर प्रति बैरल की कमी की गई है। इससे पहले जुलाई के लिए भी 6 डॉलर प्रति बैरल की कटौती की गई थी। यह फैसला ऐसे समय आया है, जब होर्मुज जलडमरूमध्य के फिर से सामान्य होने के बाद तेल की आपूर्ति बढ़ गई है और बाजार में प्रतिस्पर्धा तेज हो गई है। इस फैसले का सबसे बड़ा फायदा भारत जैसे देशों को मिल सकता है, जो अपनी जरूरत का अधिकांश कच्चा तेल आयात करते हैं।

सऊदी अरब ने एशियाई ग्राहकों के लिए अरब लाइट क्रूड की कीमत ओमान-दुबई बेंचमार्क से 1.50 डॉलर प्रति बैरल कम तय की है। वहीं ओपेक+ और उसके सहयोगी देशों, जिनमें रूस भी शामिल है, ने अगस्त से प्रतिदिन 1.88 लाख बैरल अतिरिक्त उत्पादन बढ़ाने पर सहमति जताई है। इससे पहले जून और जुलाई में भी उत्पादन बढ़ाया गया था। बढ़ती आपूर्ति के कारण ब्रेंट क्रूड की कीमत घटकर लगभग 71.7 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई है। बाजार का मानना है कि अधिक आपूर्ति के चलते तेल की कीमतों पर दबाव बना रहेगा।

सऊदी अरब ने इतनी बड़ी कटौती क्यों की?

  • वैश्विक तेल बाजार में प्रतिस्पर्धा लगातार बढ़ रही है।
  • फारस की खाड़ी के प्रमुख तेल उत्पादक देशों ने उत्पादन बढ़ा दिया है।
  • होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल टैंकरों की आवाजाही फिर सामान्य हो गई है।
  • सऊदी अरब का कच्चे तेल का निर्यात युद्ध-पूर्व स्तर के करीब पहुंच गया है।
  • संयुक्त अरब अमीरात ने भी तेल की आपूर्ति पूरी तरह बहाल कर दी है।
  • ओपेक+ देशों ने अगस्त से उत्पादन बढ़ाने का फैसला किया है।
  • अधिक आपूर्ति के कारण बाजार में कीमतों पर दबाव बढ़ा है।
  • एशियाई ग्राहकों को आकर्षित करने और बाजार हिस्सेदारी बनाए रखने के लिए कीमतें घटाई गई हैं।
  • उद्देश्य दूसरे तेल उत्पादक देशों के मुकाबले प्रतिस्पर्धी बने रहना है।
और पढ़े  संयुक्त राष्ट्र: यूएस-क्यूबा के बीच तीखी बहस, राजदूत वॉल्ट्ज बोले- यह हवाना नहीं, अमेरिका है, लगाए गंभीर आरोप

भारत को इससे क्या फायदा हो सकता है?

भारत अपनी जरूरत का 85 प्रतिशत से अधिक कच्चा तेल विदेशों से खरीदता है। ऐसे में कच्चा तेल सस्ता होने से भारतीय रिफाइनरियों की लागत घट सकती है। इससे पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस पर पड़ने वाला वित्तीय दबाव कम होगा। तेल विपणन कंपनियों को पिछले कुछ समय से बाजार मूल्य से कम कीमत पर ईंधन बेचने और एलपीजी पर नुकसान उठाना पड़ रहा था। अब सस्ता कच्चा तेल इन कंपनियों के नुकसान को कुछ हद तक कम कर सकता है। साथ ही सरकार पर एलपीजी सब्सिडी का बोझ भी घटने की संभावना है।

महंगाई और अर्थव्यवस्था पर क्या असर पड़ेगा?

कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस की कीमतें कम होने से परिवहन, बिजली उत्पादन और उद्योगों की लागत भी घट सकती है। इसका सीधा असर महंगाई पर पड़ सकता है, क्योंकि ईंधन सस्ता होने से कई वस्तुओं की ढुलाई लागत कम होती है। इससे कंपनियों पर लागत का दबाव घटेगा और उपभोक्ताओं के लिए वस्तुओं की कीमतें स्थिर रखने में मदद मिल सकती है। हालांकि घरेलू स्तर पर पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों में बदलाव सरकार, तेल कंपनियों और टैक्स नीति पर भी निर्भर करेगा।

  • Related Posts

    चक्रवात अर्नब- आंध्र प्रदेश और ओडिशा के कई जिलों में अलर्ट, आंधी से उखड़े कई पेड़-खंभे

    ओडिशा के कई जिलों में रेड अलर्ट जारी भुवनेश्वर स्थित क्षेत्रीय मौसम विज्ञान केंद्र की निदेशक मनोरमा मोहंती ने बताया कि तूफान के जमीन की ओर बढ़ने के दौरान हवा…

    दिल्ली में राहुल गांधी की जन सुनवाई: कहा- सीईसी के इस्तीफे तक नहीं रुकेगा विपक्ष, ऊपर से हो रही वोट चोरी

    लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी मंगलवार को दिल्ली के त्रिलोकपुरी स्थित ब्लॉक 20 में ‘वोट अधिकार जीने का अधिकार’ जन सुनवाई में शामिल हुए। इस दौरान…