अयोध्या राममंदिर चंदा विवाद में नए खुलासे,चढ़ावा चोरी का रहस्य खुला,इन 8 ने मिलकर इस तरह से रची थी साजिश,उगले कई बड़े राज

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राममंदिर चढ़ावा चोरी के खुलासे के 19 दिन बाद और जांच के लिए गठित एसआईटी की सिफारिश के दो दिन बाद आखिरकार एफआईआर दर्ज की गई। एफआईआर श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय के ड्राइवर रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू, ट्रस्ट के पदाधिकारी अनिल मिश्रा के रिश्तेदार अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा के अलावा गणना कर्मी मनीष यादव, अविनाश शुक्ला, करुणेश पांडेय, रमाशंकर मिश्र व गणना इंचार्ज सुभाष श्रीवास्तव और कई अज्ञात के खिलाफ दर्ज कराई गई है। सभी पर साजिश के तहत धोखाधड़ी कर चढ़ावा राशि चोरी करने का आरोप है। पुलिस ने टिन्नू समेत सात आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है।

राम मंदिर में छह जून को चढ़ावा चोरी का मामला उजागर हुआ था। ट्रस्ट के पदाधिकारियों ने खुद ही संदिग्धों को पकड़कर जांच शुरू की थी। उसके बाद 13 जून को एसआईटी गठित की गई थी। एसआईटी ने 23 जून को शासन को रिपोर्ट सौंपी थी, जिसमें एफआईआर की सिफारिश की गई थी। बृहस्पतिवार को ट्रस्टी कृष्ण मोहन की तहरीर पर कोतवाली रामजन्मभूमि में एफआईआर दर्ज की गई।

 

आज भेजे जाएंगे जेल
इन सभी आरोपियों से थाने में रात भर पूछताछ रही। आज यह सभी आरोपी जेल भेज दिए जाएंगे। सूत्रों के मुताबिक़ क़रीब 60 लाख रुपये अब तक बरामद कर लिए गए हैं। टिन्नू और सुभाष ने इस चढ़ावा चोरी प्रक्रिया के बारे में कई महत्वपूर्ण राज पुलिस को बताएं हैं। इसमें से कई बैंक अफ़सरों के लिए नाम भी लिए गए हैं। 

सुबूतों के आधार पर बढ़ेंगे आरोपी

कुछ अज्ञात भी आरोपी हैं। दरअसल, पुलिस की विवेचना में और साक्ष्य सामने आएंगे। इसमें सरकारी बैंककर्मियों के अलावा अन्य नामों का भी खुलासा होगा। बैंककर्मियों के खेल में शामिल होने के साक्ष्य भी मिले हैं। एफआईआर में भी सरकारी अधिकारी के चोरी में शामिल होने की धारा लगाई गई है।

विवेचना के लिए गठित होगी टीम, गैंगस्टर तक लगेगा
करोड़ों की हेराफेरी का मामला बेहद संवेदनशील है। ऐसे में विवेचना के लिए किसी आईपीएस या पीपीएस अफसर के नेतृत्व में टीम गठित की जा सकती है। वहीं, चोरी की घटना को संगठित अपराध की तरह अंजाम दिया गया है। लिहाजा केस की विवेचना पूरी होने के बाद टिन्नू व अन्य आरोपियों पर गैंगस्टर भी लगेगा।

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बाथरूम में छिपाते थे चोरी के नोटों की गड्डियां

रकम पार करने के बाद अनुकल्प और अन्य आरोपी नोटों की गड्डियों को बाथरूम छिपा देते थे। बाद में मौका पाकर इसे मंदिर के बाहर ले जाते थे। फिर एक मकान में बंटवारा होता था। यह खेल दो से तीन साल से चल रहा था।

पूरी साजिश में सुभाष और टिन्नू की अहम भूमिका

सीसीटीवी फुटेज की जांच में चोरी करते दिखे सभी लोगों को आरोपी बनाया गया है। पूछताछ व अन्य साक्ष्यों के आधार पर पता चला कि इस पूरी साजिश में टिन्नू यादव और सुभाष श्रीवास्तव की बड़ी भूमिका थी। सुभाष ने ही चोरी के खेल में अन्य लोगों को जोड़ा था। गणना में ड्यूटी लगाने को जांच पड़ताल का जिम्मा सुभाष के पास था लिहाजा इन दोनों को आरोपी बनाया गया। एसआईटी ने फुटेज को साक्ष्य के तौर पर जांच में शामिल किया था। अब पुलिस अपनी विवेचना में इन साक्ष्यों को शामिल करेगी।

 

 

करोड़ों की नकदी और जेवरातों का हेरफेर, बरामद हुई थी रकम

एसआईटी की जांच में करोड़ों रुपये की नकदी और जेवरातों का हेरफेर करने की पुष्टि हुई थी, जिसमें इन आरोपियों का नाम सामने आया। यही नहीं, ट्रस्ट ने भी घटना उजागर करने के बाद इन सभी को पकड़ा था। इनकी निशानदेही पर करीब तीन करोड़ रुपये बरामद किए थे। अब जब विवेचना होगी तो स्पष्ट हो सकेगा कि कितने करोड़ का खेल हुआ और कितना सोना-चांदी व कीमती धातु के जेवरात गायब किए गए।

ये हैं मुख्य आरोपी, जानिए कौन क्या करता था?

1- रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू: ये चंपत राय का करीबी है। मंदिर की हर व्यवस्था में हस्ताक्षेप रहता था। गणना प्रक्रिया की देखरेख भी करता था। गणना कक्ष की चाबी इसके पास रहती थी। ये घटना का अहम किरदार है।
2- अनुकल्प मिश्रा: ये लवकुश मिश्रा का जीजा है। अनिल मिश्र का रिश्तेदार है। इसकी ड्यूटी चढ़ावा गणना में लगती थी। इसके घर से चोरी की रकम बरामद हुई थी।
3- लवकुश मिश्रा: ये अनिल मिश्र का रिश्तेदार है। अनुकल्प का साला है। इसकी ड्यूटी चढ़ावा गणना में लगती थी। इसके घर से चोरी की रकम बरामद हुई थी।
4- मनीष यादव: ये टिन्नू यादव का भतीजा है। गणना प्रक्रिया में ये शामिल रहता था। इसके पास से भी चोरी की रकम बरामद हुई थी।
5 – अविनाश शुक्ला: ये भी ड्यूटी गणना में लगती थी। इसके बैंक खाते से पांच लाख रुपये बरामद होने की चर्चा थी।
6- सुभाष श्रीवास्तव: ये गणना इंचार्ज था। गणना की पूरी प्रक्रिया इसकी निगरानी में होती थी।
7- करुणेश पांडेय: अनुकल्प व लवकुश के साथ पूरी साजिश में शामिल रहे।
8- रमाशंकर मिश्र: अनुकल्प व लवकुश के साथ पूरी साजिश में शामिल रहे।
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भगवान के घर में डाका पड़ा, एसआईटी कर रही लीपापोती

 राम मंदिर के दान एवं चढ़ावा प्रकरण को लेकर चल रहे विवाद के बीच आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक व दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल बृहस्पतिवार को अयोध्या पहुंचे। मीडिया से बातचीत में केजरीवाल ने कहा कि वह शुक्रवार को राम मंदिर जाकर रामलला के दर्शन करेंगे और भगवान राम के समक्ष न्याय की प्रार्थना करेंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि भगवान के घर में डाका डाला गया है। भगवान की पादुका, माला, गहने और चढ़ावा तक चोरी कर ली गई। इससे उनका मन बहुत विचलित है। एसआईटी केवल लीपापोती का प्रयास कर रही है और बड़े लोगों को बचाने के लिए जांच की जा रही है।

उनके साथ राज्यसभा सांसद संजय सिंह भी मौजूद रहे। राम मंदिर दान प्रकरण की जांच कर रही एसआईटी की गतिविधियों के बीच केजरीवाल के दौरे ने रामनगरी के राजनीतिक माहौल को और गर्म कर दिया है। जब उनसे पूछा गया कि रामलला के दर्शन के दौरान वह क्या मांगेंगे, तो उन्होंने कहा कि इसका जवाब वह शुक्रवार को दर्शन के बाद देंगे। राम मंदिर दान प्रकरण को लेकर केजरीवाल ने एसआईटी जांच पर भी सवाल खड़े किए। उनका कहना था कि बिना एफआईआर दर्ज किए एसआईटी का गठन कानूनसम्मत नहीं माना जा सकता। उन्होंने आरोप लगाया कि मामले को सामने आए 18 दिन से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन अब तक एफआईआर दर्ज नहीं की गई है।

उधर, केजरीवाल के अयोध्या आगमन को लेकर रामनगरी के संत समाज के एक वर्ग ने विरोध दर्ज कराया है। जगद्गुरु परमहंसाचार्य और हनुमानगढ़ी के पुजारी राजूदास ने वीडियो संदेश जारी कर उनके दौरे पर आपत्ति जताई। बुधवार को पंडा समाज ने भी उनके विरोध में ज्ञापन सौंपकर नाराजगी व्यक्त की थी। शुक्रवार को रामलला दर्शन के बाद केजरीवाल के बयान और कार्यक्रमों पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं।

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दिनभर उड़ती रही चंपत राय और डॉ. अनिल मिश्र के इस्तीफे की अफवाह

 राम मंदिर चढ़ावा और दान राशि प्रबंधन को लेकर चल रही एसआईटी जांच के बीच बृहस्पतिवार को पूरे दिन रामनगरी में एक और चर्चा जोरों पर रही। राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और ट्रस्ट सदस्य डॉ. अनिल मिश्र के इस्तीफे को लेकर अफवाह उड़ती रही। हालांकि देर शाम तक ट्रस्ट और न ही किसी संबंधित पक्ष की ओर से ऐसी किसी सूचना की आधिकारिक पुष्टि की गई।

दरअसल, एसआईटी जांच के बीच विहिप और ट्रस्ट से जुड़े शीर्ष पदाधिकारियों की हुई बैठक ने अटकलों को और हवा दे दी। बैठक में राम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय, ट्रस्टी डॉक्टर अनिल मिश्र, विहिप के महामंत्री बजरंग लाल बांगड़ा, केंद्रीय संगठन महामंत्री मिलिंद परांडे तथा केंद्रीय सह-संगठन महामंत्री विनायक राव समेत कई प्रमुख लोग मौजूद रहे। बैठक का एजेंडा सार्वजनिक नहीं किया गया, लेकिन इसके बाद यह चर्चा फैल गई कि ट्रस्ट में बड़े बदलावों को लेकर मंथन चल रहा है। विभिन्न हलकों में दिनभर यही चर्चा होती रही कि एसआईटी जांच के दबाव और बढ़ते विवाद के बीच कुछ पदाधिकारी जिम्मेदारी छोड़ सकते हैं। सोशल मीडिया और व्हाट्सएप ग्रुप में भी कई तरह के संदेश प्रसारित होते रहे, लेकिन किसी भी दावे की पुष्टि नहीं हो सकी।

सूत्रों का कहना है कि जांच और विवाद के कारण ट्रस्ट के कामकाज तथा भविष्य की रणनीति को लेकर विचार-विमर्श जरूर हो रहा है, लेकिन फिलहाल इस्तीफे जैसी कोई औपचारिक स्थिति सामने नहीं आई है। सामान्य परिस्थितियों में विहिप और ट्रस्ट की बैठक को लेकर इतनी चर्चा नहीं होती, लेकिन मौजूदा विवाद और एसआईटी जांच के कारण हर गतिविधि को विशेष नजर से देखा जा रहा है। यही कारण है कि बैठक के बाद पदाधिकारियों के भविष्य को लेकर तरह-तरह के कयास लगने लगे। मंदिर निर्माण प्रभारी गोपाल राव ने बताया कि किसी का इस्तीफा नहीं हुआ है, सब भ्रामक बातें हैं।

 

 


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