प्रयागराज में गाड़ी से उतरकर जैसे ही माफिया अतीक अहमद का बेटा अली अपने छोटे भाई अबान के शव की ओर बढ़ा, उसके कदम भारी पड़ रहे थे। कुछ दूर चलने के बाद वह कफन में लिपटे अबान के शव के सामने पहुंचा तो खुद को संभाल नहीं सका। भाई का चेहरा देखते ही अली की आंखों से आंसू छलक पड़े।
दर्द में डूबे अली के मुंह से निकला, ‘अब तू ही घर का सहारा था, हमें छोड़कर क्यों चला गया… हम लोगों ने ऐसा क्या गुनाह किया था, जो पहले अब्बू, भाई और अब तू चला गया।’ अबान का शव देखते ही अली और उमर भावुक हो गए।
दोनों की आंखों से आंसू थे। भाई को अंतिम विदाई देते समय अली और उमर खुद को संभाल नहीं सके। चेहरे पर भाई को खोने का दर्द दिखाई दे रहा था। दोनों कभी शव की ओर देखते तो कभी एक-दूसरे की तरफ देखकर खुद को संभालने की कोशिश करते। अहजम भी इस दौरान दोनों के साथ था।
तीनों में अबान को लेकर बातें होती रहीं। अली और उमर एक- दूसरे को ढाढ़स बंधाते रहे। दोनों ने एक-दूसरे को गले लगाया तो कुछ देर के लिए माहौल और भी गमगीन हो गया। परिवार के लोगों ने तीनों भाइयों को संभालने की कोशिश की।
कोई उन्हें ढाढ़स बंधाता रहा तो कोई जनाजे की तैयारी के लिए आगे बढ़ने के लिए कहता रहा। कुछ देर तक ऐसा लगा मानो परिवार के लोग इस सदमे को स्वीकार ही नहीं कर पा रहे हों। शव के पास मौजूद हर शख्स की आंखें नम थीं। कब्रिस्तान के आसपास 5000 लोगों के एकत्रित होने की बात कही गई है।
अबान की तरफ देखते रहे अली व उमर
उमर के आते ही टूटा कब्रिस्तान का सुरक्षा घेरा
अबान के जनाजे के दौरान उमर की गाड़ी आते ही कब्रिस्तान का सुरक्षा घेरा टूट गया। प्रवेश द्वार पर पुलिस ने बैरिकेडिंग लगा रखी थी लेकिन बैरिकेडिंग हटाकर भीड़ आगे बढ़ने लगी।
देखते ही देखते कई लोग पुलिस और सुरक्षाकर्मियों का घेरा तोड़कर कब्रिस्तान में घुस गए। पुलिसकर्मियों ने भीड़ को रोकने की कोशिश की। लोगों को पीछे हटने के लिए कहा गया लेकिन भीड़ लगातार बढ़ती रही।
अतीक की कब्र के पास सुपुर्द-ए-खाक हुआ अबान, तीनों भाइयों ने दिया कंधा
प्रयागराज में अतीक अहमद के बेटे अबान को शनिवार शाम कसारी-मसारी स्थित कब्रिस्तान में सुपुर्द-ए-खाक किया गया। अबान का जनाजा 6:45 बजे कब्रिस्तान पहुंचा। इसके बाद मस्जिद के पास नमाज अदा की गई। तीनों भाइयों उमर, अली और अहजम ने जनाजे को कंधा दिया।
कसारी-मसारी कब्रिस्तान स्थित मस्जिद के पास प्रिजर्व वैन से नीचे उतरते ही उमर और अली एक-दूसरे से गले मिले। इसके बाद अहजम के साथ नमाज अदा की गई। नमाज के बाद अबान का जनाजा उठाया गया। फिर तीनों भाइयों ने शव को कंधा दिया। भीड़ के कारण पुलिस को घेरा बनाने में काफी मशक्कत करनी पड़ी।
उमर और अली जिस बंदी वाहन में सवार थे, उसके आगे-पीछे पुलिस की करीब 15 गाड़ियां चल रही थीं। सबसे पहले उमर कब्रिस्तान पहुंचा फिर अली। दोनों की सुरक्षा के लिए करीब 50 से अधिक पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई थी। इसके बाद अहजम आया। फिर एंबुलेंस से अबान का शव कब्रिस्तान लाया गया।





