सुप्रीमकोर्ट ने मंगलवार को केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों को लेकर एक बड़ा फैसला सुनाया। सुप्रीम कोर्ट कहा कि केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (सीएपीएफ) के कर्मियों, जिनमें सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) के सदस्य भी शामिल हैं, की सेवा समाप्ति से जुड़े मामलों की सुनवाई दिल्ली हाईकोर्ट कर सकता है, भले ही मामले से जुड़ा कारण राष्ट्रीय राजधानी के बाहर उत्पन्न हुआ हो।
न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता और न्यायमूर्ति सतीश चंद्र शर्मा की पीठ ने यह आदेश एक बीएसएफ कांस्टेबल की याचिका को फिर से बहाल करते हुए दिया। कांस्टेबल ने बिना किसी पेंशन लाभ के सेवा से बर्खास्त किए जाने को चुनौती दी थी। कांस्टेबल को इस आधार पर सेवा से बर्खास्त किया गया था कि उसने पहली शादी के रहते और पहली पत्नी की अनुमति के बिना दूसरी शादी की थी।
2022 में बर्खास्त कर दिया गया था बीएसएफ कर्मी
बीएसएफ कर्मी को पश्चिम बंगाल के मालदा जिले के नारायणपुर में, जहां उसकी तैनाती थी, कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था। कांस्टेबल निर्धारित अवधि के भीतर जवाब दाखिल नहीं कर सका। इसके बाद 2022 में कमांडेंट ने उसे बिना किसी पेंशन लाभ के सेवा से बर्खास्त कर दिया। बर्खास्तगी के आदेश से असंतुष्ट कांस्टेबल ने सेवा में बहाली की मांग करते हुए वैधानिक याचिका दायर की, जिसे खारिज कर दिया गया।







