प्रधानमंत्री मोदी ने आज एक बड़ा रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया है। मोदी अब देश में लगातार शासन करने वाले सबसे लंबी अवधि के चुने हुए प्रधानमंत्री बन गए हैं। 10 जून को लगातार सत्ता में रहते हुए उन्हें 4399 दिन हो चुके हैं और इस तरह उन्होंने भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू का चुनाव जीतने के बाद लगातार 4398 दिन तक पीएम रहने का रिकॉर्ड तोड़ दिया है।
भारत की आजादी के बाद पंडित नेहरू के कार्यकाल में देशभर में कांग्रेस ने किस तरह पूरे देश पर शासन किया, यह बात सर्वविदित है। हालांकि, नरेंद्र मोदी के 2014 में चुनाव जीतने और इसके बाद भाजपा के पूरे देश में एक के बाद एक राज्यों तक बढ़ने का सिलसिला अपने आप में दिलचस्प है। आइये जानते हैं कि बीते 12 वर्षों में भाजपा ने कैसे देशभर में कदम बढ़ाए हैं? 2014 के लोकसभा चुनाव से लेकर अब तक भारत में भाजपा कहां तक फैली है? जानते हैं…
जब मोदी सत्ता में आए तब सात राज्यों में थीं भाजपा सरकारें
नरेंद्र मोदी ने मई 2014 में भारत के प्रधानमंत्री पद की जिम्मेदारी संभाली थी। उनके सत्ता में आने के समय देश के सात राज्यों में भाजपा और उसके सहयोगी दल सरकार चला रहे थे। इनमें पांच राज्यों में भाजपा के मुख्यमंत्री थे, जबकि आंध्र प्रदेश और पंजाब में उसकी सहयोगी पार्टी सत्ता में थी। इन दो राज्यों में देश की छह फीसदी से ज्यादा आबादी रहती है। बाकी पांच राज्यों छत्तीसगढ़, गोवा, गुजरात, मध्य प्रदेश और राजस्थान में भाजपा के मुख्यमंत्री थे। इन राज्यों में देश की 19 फीसदी से ज्यादा आबादी रहती है।
यानी, जब नरेंद्र मोदी देश की सत्ता में आए उस वक्त करीब 26 फीसदी आबादी पर भाजपा और उसकी सहयोगी सरकारें चल रही थीं। उस वक्त देश के 14 राज्यों में कांग्रेस और उसके सहयोगी पार्टियों की सरकार थी। कांग्रेस शासित इन राज्यों में देश की 37 फीसदी से ज्यादा आबादी रहती है। इन राज्यों में महाराष्ट्र, कर्नाटक जैसे बड़े राज्य शामिल थे।
2018 में पीक पर पहुंची भाजपा
2014 में सात राज्यों में भाजपा और उसके सहयोगियों की सरकार थी। चार साल बाद मार्च 2018 में 21 राज्यों में भाजपा और उसके सहयोगियों की सरकार थी। इन राज्यों में देश की करीब 71 फीसदी आबादी रहती है। ये वो दौर था, जब भाजपा शासन आबादी के लिहाज से पीक पर था। वहीं, चार राज्यों में कांग्रेस की सरकार थी। इन राज्यों की सात फीसदी आबादी रहती है।
2025-26 में क्या रही स्थिति
1. दिल्ली चुनाव के नतीजों के बाद
बिहार चुनाव से पहले दिल्ली में विधानसभा चुनाव हुए। फरवरी 2025 में हुए इस चुनाव के बाद 27 साल बाद भाजपा ने दिल्ली में वापसी की। देश की आबादी का लगभग 1.3 फीसदी हिस्सा यहां रहता है। 2011 की जनगणना के मुताबिक, दिल्ली की आबादी 1.68 करोड़ थी। देश के 0.02 फीसदी भू-भाग वाले केंद्र शासित प्रदेश में फरवरी 2025 तक आम आदमी पार्टी की सरकार शासन कर रही थी।








