मैनाठेर बवाल के दोषियों को आजीवन कारावास की सजा के पीछे मजबूत चार्जशीट, दमदार पैरवी और गवाही अहम रही। इस केस में तीन सौ तारीखें पड़ीं। 22 गवाह अदालत में पेश किए गए। इन गवाहों से घटना का एक-एक सच बाहर निकलकर आया। 26 दस्तावेजों और 18 वस्तु साक्ष्य की बदौलत अदालत ने 47 पेज के फैसले में दोषियों के लिए उम्र कैद की सजा लिख दी।
छह जुलाई 2011 को मैनाठेर के डींगरपुर में तत्कालीन डीआईजी अशोक कुमार सिंह समेत अन्य पुलिस कर्मियों पर हमले के मामले में एक अक्तूबर 2011 को पुलिस की ओर से चार्जशीट दाखिल की गई थी। जिसकी सुनवाई एडीजे- दो कृष्ण कुमार सिंह की अदालत में चली।
अभियोजन की ओर से इस मामले में तत्कालीन डीआईजी एवं वर्तमान में एडीजी अशोक कुमार सिंह, तत्कालीन डीएम एवं वर्तमान में जल निगम के प्रबंध निदेशक राजशेखर, केस के वादी रवि कुमार, एफआईआर लेखक सुशील कुमार, पुलिस कर्मी सुरेंद्र कुमार चौधरी, सूरजभान, डॉ. प्रीतम बाला, एसआई राधेश्याम, विवेचक राजेश चौधरी, एसआई अरुण कुमार, पेट्रोल पंप सेल्समैन, डॉ. वीलाल, एसओ मुकेश कुमार, एसएचओ राजीव कुमार, एसएसआई जसवीर सिंह, सिपाही सुनील कुमार, कांस्टेबल सुनील कुमार सिंह प्रताप, चंद्रपाल सिंह, डीआईजी का इलाज करने वाले डॉ. अंकुर गोयल, कौशलेंद्र, चालक सुरेश कुमार प्लाटून कमांडर राजेश सिंह के बयान दर्ज कराए गए।
इसके अलावा इससे संबंधित दस्तावेज साक्ष्य के तौर पर तहरीर, एफआईआर, जीडी, सीटी, डोरी, कॉलर समेत अन्य बरामद सामान की फर्द, मिट्टी व खून लगी वर्दी की फर्द, डीआईजी की मेडिकल रिपोर्ट और उनके बयान की कॉपी, घटनास्थल का नक्शा, आरोप पत्र, संतराम की मेडिकल रिपोर्ट, एक्सरे रिपोर्ट, चालक सुरेश कुमार द्वारा डीएम को भेजे गए पत्र की कॉपी समेत 26 दस्तावेज साक्ष्य कोर्ट में पेश किए गए।
एडीजे-दो कोर्ट की ओर से ज्यादा सुरक्षा व्यवस्था की गई थी। अधिवक्ता अपने अपने क्लाइंट लेकर एडीजे दो की कोर्ट की ओर चले तो पुलिस कर्मियों ने उन्हें रोक लिया। इस पर कुछ अधिवक्ताओं ने विरोध भी किया। जानकारी मिलने पर बार अध्यक्ष आनंद मोहन गुप्ता और अन्य पदाधिकारी पहुंच गए। उन्होंने एसपी सिटी कुमार रणविजय सिंह ने बात की। इसके बाद तय हुआ कि किसी भी अधिवक्ता को नहीं रोका जाएगा लेकिन एक बजे तक कोई भी फरियादी एडीजे-दो की कोर्ट की ओर नहीं जाने दिया जाएगा।






