शहर से सटे हनुमानगंज स्थित पेट्रोल पंप के पास संचालित एक निजी अस्पताल में बृहस्पतिवार को ऑपरेशन के दौरान प्रसूता की मौत हो गई। 50 हजार रुपये के लिए नवजात को भी डाॅक्टर ने परिजनों को नहीं सौंपा।
परिजनों ने अस्पताल पर जमकर हंगामा किया। आक्रोशित परिजनों ने अस्पताल के गेट पर ईंटें फेंकीं। सूचना के बाद मौके पर पहुंची पुलिस ने कड़ी मशक्कत के बाद परिजनों को समझाकर बुझाकर शांत किया।
इस बाबत थाना प्रभारी रत्नेश दुबे ने कहा कि परिजनों की तहरीर पर डाॅक्टर एचएन सिंह पर प्राथमिकी दर्ज कर जांच की जा रही है। हालांकि डाॅक्टर के अनुसार नवजात को इलाज की जरूरत है, इसलिए चिकित्सक ने भर्ती किया हुआ है। परिजनों ने अस्पताल को सील करने व चिकित्सक पर मुकदमा दर्ज कर गिरफ्तार करने का आरोप लगाया, इसको लेकर तीन घंटे तक गहमा गहमी बनी रही। हालांकि शाम को स्वास्थ्य विभाग की टीम ने अस्पताल को सील कर दिया।
निजी अस्पताल में लापरवाही से इलाज के कारण मरीजों की मौत का मामला रुकने का नहीं ले रहा है। पिछले एक महीने में छह महिलाओं व नवजात की मौत हो चुकी है।
सुखपुरा थाना के सुल्तानपुर निवासी दिनबंधु राजभर की पत्नी कुसुम राजभर (22) को प्रसव पीड़ा होने पर परिजनों ने गांव की आशा बहू शकुंतला को जानकारी दी। उसने कुसुम को हनुमानगंज स्थित एक नर्सिंग होम में भर्ती कराया। कुसुम के पिता टुनटुन राजभर ने आरोप लगाया कि बेटी को रात नौ बजे ऑपरेशन से बच्चा हुआ, लेकिन उसे होश नहीं आया। रात में चिकित्सक ने बेटी की हालत गंभीर बता कर एंबुलेंस से वाराणसी रेफर कर दिया। लेकिन बेटी की ऑपरेशन के दौरान ही मौत हो गई थी।
वाराणसी के एक निजी अस्पताल में ले कर गए वहां चिकित्सक ने जांच के उपरांत बताया कि उसकी मौत हो चुकी है। उधर हनुमानगंज अस्पताल के चिकित्सक ने बेटी की नवजात बच्ची को अपने पास रख लिया, इलाज के 50 हजार रुपये भुगतान के बाद ही बच्ची को सौंपने की बात कह रहे।
मौत की खबर पर कुसुम के मायका व ससुराल वाले अस्पताल पहुंच गए। परिजनों ने अस्पताल पर हंगामा किया। बलिया-सुखपुरा मार्ग को जाम करने का भी प्रयास किया। सूचना मिलने पर सुखपुरा के थाना प्रभारी रत्नेश दुबे और पुलिस कर्मी मौके पर पहंुच गए।







