अयोध्या राममंदिर-: प्राण प्रतिष्ठा वर्षगांठ पर अयोध्या में उत्सवी माहौल, रामलला के दर्शन को उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़

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योध्या स्थित भव्य राम मंदिर में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा की वर्षगांठ पर अयोध्या में उत्सवी माहौल रहा। अंग्रेजी तिथि के अनुसार रामलला की प्राण प्रतिष्ठा 22 जनवरी 2024 को हुई थी। इस तिथि पर बृहस्पतिवार को राम मंदिर में दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी तो मठ-मंदिरों में अनुष्ठान भी हुए। रामलला के दरबार में दिन भर श्रद्धालुओं की भीड़ दर्शन पूजन के लिए जुटी रही।

सुबह 7 बजे जैसे ही मंदिर खुला दर्शनार्थियों का जयघोष गूंजने लगा। यह सिलसिला मंदिर बंद होने यानी रात नौ बजे तक जारी रहा। इस दौरान श्री राम रक्षा स्तोत्र का पाठ भी जारी रहा। बृहस्पतिवार को विभिन्न राज्यों से श्रद्धालु अयोध्या पहुंचे थे।

 

धनुष भी श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को समर्पित

हालांकि श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट प्राण प्रतिष्ठा की वर्षगांठ प्रतिष्ठा द्वादशी के रूप में पहले ही मना चुका है, लेकिन प्राण प्रतिष्ठा की अंग्रेजी तिथि पर भी श्रद्धालु रामलला के दर्शन को पहुंचे। प्रतिष्ठा की वर्षगांठ के दिन ही 286 किलो वजनी पंचधातु से निर्मित धनुष भी श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को समर्पित किया गया।

अब वैभवशाली नगरी बनी अयोध्या

दिल्ली से आए श्रद्धालु नरेश शर्मा बोले कि 22 जनवरी की तिथि कैसे भूली जा सकती है। ट्रस्ट ने पहले ही प्रतिष्ठा का उत्सव मना लिया है, उस समय हम अयोध्या नहीं आ पाए थे इसलिए अब अयोध्या आए हैं। रामलला की प्राण प्रतिष्ठा में भी आए थे, यह बीते पलों को जीने जैसा अहसास है।

राजस्थान से आए श्रद्धालुओं के दल ने भी रामलला के दरबार में हाजिरी लगाई। कोटा के सुनील कुमावत व जयपुर के घनश्याम ने कहा कि प्राण प्रतिष्ठा के बाद पहली बार आए हैं। इससे पहले 2022 में आए थे, पिछले तीन वर्षों में अयोध्या वैभवशाली नगरी के रूप में तब्दील हो चुकी है।

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श्री राम रक्षा स्तोत्र के साथ गूंजी सुंदरकांड की चौपाईयां

प्रभु श्रीरामलला के पाटोत्सव महोत्सव के अवसर पर श्रद्धा और भक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिला। मणिराम दास की छावनी में हुए आयोजन में श्रद्धालुओं ने सामूहिक रूप से श्री राम रक्षा स्तोत्र का पाठ किया, वहीं सुंदरकांड पाठ की चौपाइयों ने पूरे परिसर को राममय कर दिया।

इस अवसर पर श्रीराम रक्षा यंत्र का पूजन भी किया गया। कार्यक्रम के संयोजक श्री रामलला अयोध्याजी सेवा समिति के अध्यक्ष राजानंद शास्त्री ने बताया कि अनुष्ठान का शुभारंभ महंत कमलनयन दास ने किया। 21 वैदिक आचार्यों ने पाठ में हिस्सा लिया।


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