मेला प्रशासन ने अविमुक्तेश्वरानंद को जारी किया नोटिस, कहा- साक्ष्य दें कि आप शंकराचार्य हैं

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प्रयागराज मेला प्राधिकरण ने शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को नोटिस जारी किया है। 24 घंटे में जवाब मांगा है कि साबित करें की आप ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य हैं। उधर, शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि वह भी मेला प्रशासन को नोटिस जारी करेंगे। कहा कि सुप्रीम कोर्ट के रोक के बाद बी आपने अपने नाम के आगे शंकराचार्य लगाया है, जो कि गलत है। मौनी अमावस्या पर स्नान को लेकर मेला प्रशासन और शंकराचार्य में काफी विवाद हो गया था। इसके बाद अविमुक्तेश्वरानंद को बिना स्नान किए ही शिविर में लौटा दिया गया था। आरोप है कि पुलिस ने शंकराचार्य के शिष्यों को मारा पीटा और उनका बाल पकड़कर घसीटा। सोमवार को मीडिया के सामने शंकराचार्य ने अपने उन शिष्यों को पेश किया जिनके साथ पुलिस ने ज्यादती की है।

 

शिविर के बाहर नोटिस चस्पा

सोमवार देर रात मेला प्राधिकरण ने शंकराचार्य को नोटिस भेजकर जवाब मांगा है। इससे पहले शंकराचार्य ने सोमवार दोपहर प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा- प्रशासन के माफी न मांगने तक हम अपने आश्रम में प्रवेश नहीं करेंगे। फुटपाथ पर ही रहेंगे। क्योंकि, शंकराचार्य जब भी इतिहास में स्नान करने गए हैं, पालकी में ही गए हैं। मैं प्रण लेता हूं कि हर मेले के लिए प्रयागराज आऊंगा, लेकिन कभी भी शिविर में नहीं, फुटपाथ पर रहूंगा।

इसके बाद माघ मेला प्रशासन ने स्वामीअविमुक्तेश्वरानंद को नोटिस जारी किया है। नोटिस में सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला देते हुए कहा गया है कि किसी भी धर्माचार्य का ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य के रूप में पट्टाभिषेक नहीं हुआ है। इसके बावजूद शिविर के बोर्ड पर खुद को शंकराचार्य प्रदर्शित करना इस आदेश की अवहेलना है। प्रशासन ने 24 घंटे के भीतर जवाब देने का निर्देश दिया है। देर रात नोटिस लेकर पहुंचे कानूनगो को समर्थकों ने यह कहते हुए लौटा दिया कि सुबह आइए। अभी कोई पदाधिकारी नहीं है जो नोटिस रिसीव कर सके। इसके बाद नोटिस को शिविर के बाहर चस्पा किया गया है। 

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सीएम के आदेश पर अभद्रता का आरोप

शंकराचार्य ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के ईशारे पर उनके साथ अभद्रता की गई और उन्हें संगम स्नान करने से रोका गया। उनकी हत्या का प्रयास किया गया। अगर वह रथ से उतर जाते तो उनकी हत्या हो जाती। सादे कपड़ों में पहुंचे पुलिस के जवानों ने उनका अपहरण करने का प्रयास किया। पांच घंटे तक उनको अज्ञात स्थान पर रखा गया और शाम को उनको शिविर के सामने पहुंचा दिया गया।

हालांकि मेला प्रशासन ने शंकराचार्य के आरोपों का खंडन किया। कहा कि वह शंकराचार्य नहीं नहीं, इसलिए उनको शंकराचार्य का प्रोटोकाल नहीं दिया गया। अब मेला प्रशासन ने नोटिस जारी करके अविमुक्तेश्वरानंद से उनके शंकराचार्य होने का प्रमाण मांग लिया है। इसके लिए 24 घंटे का समय दिया है। इसका उत्तर देने के लिए अविमुक्तेश्वरानंद ने दोपहर तीन बजे प्रेसवार्ता बुलाई है। अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि वह भी मेला प्रशासन को नोटिस जारी करेंगे।

तीसरे दिन भी जारी रहा शंकराचार्य का धरना

शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का धरना तीसरे दिन भी जारी है। माघ मेले में त्रिवेणी मार्ग पर वह अपने शिविर के सामने फुटपाथ पर बैठे हुए हैं। यहां पर बड़ी संख्या में साधु संतों के साथ ही विभिन्न राजनीतिक दलों के लोग उनके समर्थन में पहुंच रहे हैं। शंकराचार्य मेला प्रशासन से माफी मांगने पर अड़े हैं। कहा कि वह तब तक शिविर में प्रवेश नहीं करेंगे जब तक कि ससम्मान उनको संगम में स्नान करा कर शिविर में प्रवेश नहीं कराया जाता। यह भी कहा कि वह अगले साल भी मेले में आएंगे और इसी तरह फुटपाथ पर बैठेंगे और शिविर में प्रवेश नहीं करेंगे।

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