उत्तरप्रदेश में नकली दवाओं का संगठित नेटवर्क सक्रिय है, जो एक मंडी से दूसरी मंडी और वहां से छोटे शहरों व मेडिकल स्टोर तक दवाओं की आपूर्ति कर रहा है। राजस्थान, उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश से निकलने वाली नामचीन कंपनियों की नकली दवाएं यूपी के रास्ते नेपाल और बांग्लादेश तक पहुंच रही हैं। इसका खुलासा खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (एफएसडीए) की जांच में हुआ है।
केस-1
आगरा की विभोर मेडिकल एजेंसी से अंशिका फार्मा ने चेमोरॉल फोर्ट (बैच नंबर 2केयू6एल055) खरीदी और कोलकाता के पाल ब्रदर्स को बेची। जांच में स्टॉक रजिस्टर में अंशिका फार्मा का रिकॉर्ड मिला, लेकिन खरीद के बिल फर्जी पाए गए।
केस-2
लखनऊ के आलमबाग में पकड़ी गई दवा नकली निकली। पकड़े गए व्यक्ति ने बताया कि वह इसे वाराणसी के न्यू सर्जिकल से बिना बिल के खरीदकर लाया था। बाद में गिरफ्तार संदीप सिंह ने खुलासा किया कि उसने यह नकली दवा प्रयागराज निवासी संजय सिंह चौहान से खरीदी थी।
क्या कहते हैं कारोबारी
ज्यादा मार्जिन और बिना बिल की दवा खरीदने से बचें। पैकिंग की अच्छी तरह जांच करें। नकली दवाएं मरीजों के साथ-साथ दुकानदारों के लिए भी नुकसानदेह हैं। इससे दीर्घकालीन कारोबार संभव नहीं है। दवा विक्रेताओं को लगातार जागरूक किया जा रहा है। -सुरेश कुमार, अध्यक्ष, दवा व्यापार मंडल
क्या कहते हैं जिम्मेदार
नकली दवाओं का नेटवर्क खत्म करने के लिए लगातार कार्रवाई की जा रही है। आगरा से मिले इनपुट के आधार पर लखनऊ, वाराणसी समेत अन्य जिलों में जांच हुई है। जैसे-जैसे सैंपल रिपोर्ट आ रही हैं, संबंधित बैचों को बाजार से हटवाया जा रहा है। -शशि मोहन गुप्ता, उप आयुक्त, एफएसडीए








