हिमाचल:- लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह बोले- शासक बनने का प्रयास न करे अफसरशाही, सुरक्षा की जरूरत नहीं

 

 

लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह की अफसरों को लेकर की गई टिप्पणी पर सियासी घमासान थमने का नाम नहीं ले रहा है। आईएएस और आईपीएस एसोसिएशन की ओर से दिए गए बयान के बाद विक्रमादित्य सिंह ने कहा कि अफसरशाही शासक बनने का प्रयास न करे। अगर ऐसा होता है, तो वह जनता के हित में सवाल उठाने में पीछे नहीं हटेंगे। हिमाचल के लोग इतने कमजोर नहीं कि उन्हें सिक्योरिटी की आवश्यकता होगी। मुझे सिक्योरिटी की जरूरत नहीं है। मैं बिना पुलिस की सुरक्षा के रह सकता हूं। जो विड्राॅ करना चाहता है, वह कर सकता है।

 

मेरे साथ प्रदेश की जनता का समर्थन है, यही मेरी सबसे बड़ी सिक्योरिटी है। मेरी जवाबदेही हिमाचल की जनता के प्रति है। मेरे पास पहले भी कोई आईपीएस अधिकारी नहीं थे। मंत्री ने अनिरुद्ध सिंह के अधिकारियों को लेकर दिए गए बयान और उससे जुड़े विवाद पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि मैं उम्र में छोटा हूं, इसलिए किसी को लेकर विवाद नहीं करना चाहता। उन्होंने साफ किया कि वह टकराव की राजनीति में विश्वास नहीं रखते, लेकिन प्रदेश की जनता के हितों से किसी भी कीमत पर समझौता नहीं करेंगे।

आईएएस और आईपीएस अधिकारियों का मान-सम्मान है। सर्विस को सबसे ऊपर रखना है। उसके ऊपर कोई चीज नहीं है। अगर कमियां दिख रही हैं तो उनकी बात करना हमारी जिम्मेवारी है। उन्होंने कहा कि सभी मेरे से उम्र और तुजुर्बे में बड़े हैं। मैं सबसे अच्छे गुण सीखना चाहता हूं। मुझे जो संस्कार मिले है, उनके साथ समझौता नहीं करूंगा। मुख्यमंत्री अगर पूछेंगे तो मैं उनके सामने भी बात रखूंगा। हिमाचल के हितों को लेकर अगर कहीं समझौता हो रहा होगा तो मैं आवाज उठाऊंगा। मैं अपनी बातों पर अडिग हूं।

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जनता की आवाज उठाना उनका दायित्व और नैतिक जिम्मेदारी
सभी का सम्मान करते हैं। संविधान के तहत हर संस्था और पद की अपनी-अपनी जिम्मेदारी तय है। जनप्रतिनिधियों का मूल उद्देश्य केवल जनता की सेवा होना चाहिए। उनकी पहली प्राथमिकता ‘सर्विस ऑफ द पीपल’ है। अगर कहीं कोई कमी दिखती है या जनता के हित प्रभावित होते हैं, तो उसे उठाना उनका दायित्व और नैतिक जिम्मेदारी है।

नैतिक मूल्यों और संस्कारों से कभी समझौता नहीं
सरकार के भीतर मंत्रियों के बीच सोशल मीडिया पर समर्थन और विरोध को लेकर चल रही चर्चाओं पर विक्रमादित्य ने कहा कि सार्वजनिक जीवन में मतभेद स्वाभाविक हैं। लेकिन वह अपने सिद्धांतों, नैतिक मूल्यों और संस्कारों से कभी समझौता नहीं करेंगे। यह भी स्पष्ट किया कि वह जहां भी होंगे, चाहे शिमला में हों या दिल्ली में, हिमाचल प्रदेश के लोगों के मुद्दे उठाते रहेंगे। प्रदेश के 75 लाख लोगों के प्रति जवाबदेही है।

नीरज भारती ने विक्रमादित्य सिंह के समर्थन में डाली पोस्ट
वहीं कृषि मंत्री चंद्र कुमार के पुत्र पूर्व मुख्य संसदीय सचिव नीरज भारती ने भी विक्रमादित्य सिंह के बयान के समर्थन में पोस्ट की है। उन्होंने लिखा, ‘बाहरी प्रदेश के कई आईएएस और आईपीएस अधिकारी ऐसे हैं, हिमाचल प्रदेश में जो मंत्रियों और विधायकों के फोन तक नहीं उठाते, फोन की स्क्रीन देख कर नाम पढ़कर फोन उल्टा रख देते हैं।’ इससे पहले बुधवार को एक और पोस्ट में नीरज भारती ने लिखा था, ‘सभी तो नहीं लेकिन 60-70 प्रतिशत बाहर के अधिकारी ऐसे हैं जिन्हें हिमाचल प्रदेश या हिमाचलियों के हितों से कोई सरोकार नहीं है, कांग्रेसियों को याद होगा जब विपक्ष में थे तो एक उच्च आईपीएस अधिकारी पर पुलिस भर्ती घोटाले का आरोप लगाया था, जब कभी भी कांग्रेस या कांग्रेस के फ्रंटल संगठन विधानसभा घेराव करते थे तो वही उच्च आईपीएस अधिकारी लाठीचार्ज भी करवाता था कांग्रेसियों पर, लेकिन कांग्रेस की सरकार बनने के बाद मजे से पूरा समय काट कर ठाठ से रिटायर हो कर गया….. पता नहीं सरकार बनने के बाद उस अधिकारी के खिलाफ किया गया कांग्रेसियों का विरोध प्रदर्शन कहां गया।’

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विक्रमादित्य सिंह का बयान गैर जरूरी और नुकसानदेह : धर्माणी
प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्रियों के बीच जुबानी जंग अब खुलकर सामने आने लगी है। अब तकनीकी शिक्षा मंत्री राजेश धर्माणी ने मंत्री विक्रमादित्य सिंह को नसीहत देते हुए उनके बयान को गैर-जरूरी और नुकसानदेह बताया है। धर्माणी ने कहा कि लोकतंत्र के चार स्तंभों में कार्यपालिका का विशेष महत्व है। ऑल इंडिया सर्विसेज के तहत अधिकारियों की नियुक्ति भारत सरकार करती है और प्रदेश के विकास में इन अधिकारियों की अहम भूमिका होती है। अगर विक्रमादित्य सिंह को किसी अधिकारी से कोई समस्या थी, तो उन्हें इसे मीडिया में उछालने के बजाय कैबिनेट की बैठक में रखना चाहिए था या मुख्यमंत्री से सीधे संवाद करना चाहिए था। सार्वजनिक मंच पर ऐसे बयान देने से देशभर में गलत संदेश जा रहा है।

धर्माणी ने चिंता जताते हुए कहा कि हिमाचल के भी कई प्रतिभाशाली अधिकारी दूसरे राज्यों में सेवाएं दे रहे हैं। यदि हिमाचल में बाहरी राज्यों के अधिकारियों पर सवाल खड़े किए जाएंगे, तो अन्य राज्यों में तैनात हिमाचल के अधिकारियों को भी बेवजह परेशानी और असहज स्थिति का सामना करना पड़ सकता है। उन्होंने याद दिलाया कि हिमाचल कई विकास कार्यों के लिए अन्य राज्यों पर भी निर्भर रहता है, ऐसे में इस तरह की बयानबाजी आपसी संबंधों को प्रभावित कर सकती है।

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