अयोध्या विकास क्षेत्र के नंदिनी निकेतन में आठ दिवसीय राष्ट्रीय राष्ट्रकथा का भव्य शुभारंभ वैदिक मंत्रोच्चार और संतों के सान्निध्य में हुआ। यह आयोजन कैसरगंज के पूर्व सांसद एवं पूर्व कुश्ती संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह के जन्म दिवस के अवसर पर एक जनवरी से 8 जनवरी तक आयोजित किया गया है।उद्घाटन अवसर पर जगद्गुरु रामानंदाचार्य दिनेशाचार्य महाराज ने कहा, राष्ट्र और राम एक-दूसरे के पूरक हैं। जैसे अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण हुआ, वैसे ही आने वाले समय में मथुरा में श्रीकृष्ण मंदिर बनेगा।
कार्यक्रम की शुरुआत श्रीआनंदम धाम पीठाधीश्वर सद्गुरु रितेश्वर जी महाराज ने अयोध्या से पधारे साधु-संतों के साथ व्यासपीठ की पूजा-अर्चना कर की। इस अवसर पर स्कूली बच्चों ने पुष्पवर्षा कर सद्गुरु रितेश्वर जी महाराज का स्वागत किया। पहले दिन लगभग दस हजार से अधिक बच्चों एवं श्रद्धालुओं ने कथा का श्रवण किया।उद्घाटन समारोह में श्रीराम बल्लभ कुंज के महंत राजकुमार दास भी उपस्थित रहे। उन्होंने कहा कि युवाओं में सकारात्मक बदलाव दिखाई दे रहा है। पहले जहां युवा पर्यटन स्थलों की ओर अधिक आकर्षित होते थे, अब वे धार्मिक स्थलों जैसे काशी, वृंदावन, महाकाल और श्रीधाम अयोध्या की ओर बढ़ रहे हैं। उन्होंने इसे सनातन मूल्यों की ओर लौटने वाला नया परिवर्तन बताया।महंत राजकुमार दास ने यह भी कहा कि राष्ट्रकथा और रामकथा से जीवन को दिशा मिलती है, और युवाओं में सनातन परंपरा के प्रति बढ़ती आस्था समाज के लिए शुभ संकेत है। उन्होंने मथुरा में श्रीकृष्ण मंदिर निर्माण की संभावनाओं का भी उल्लेख किया।
जगद्गुरु रामानंदाचार्य दिनेशाचार्य महाराज ने कहा कि यदि राष्ट्र को सशक्त और मर्यादित बनाना है तो भगवान श्रीराम के आदर्शों को जीवन में उतारना होगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अयोध्या से ही राष्ट्र की परिकल्पना जुड़ी है और राष्ट्रकथा व रामकथा का संयुक्त आयोजन इसी भावना को सुदृढ़ करता है। भारत को सांस्कृतिक रूप से हिंदू राष्ट्र बताते हुए उन्होंने कहा कि समय के साथ इसकी औपचारिक घोषणा भी संभव है।आयोजन में बड़ी संख्या में संत-महात्मा, श्रद्धालु, बच्चे और स्थानीय लोग उपस्थित रहे। आयोजकों के अनुसार, आठ दिनों तक चलने वाली इस कथा में प्रतिदिन राष्ट्र, संस्कृति और सनातन मूल्यों से जुड़े प्रवचन और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।







