देहरादून- एबीवीपी के अधिवेशन का समापन-: गोरखपुर के श्रीकृष्ण को मिला यशवंतराव केलकर युवा पुरस्कार, CM ने किया सम्मानित

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देवभूमि उत्तराखंड में पहली बार आयोजित हुए अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के 71वें राष्ट्रीय अधिवेशन का रविवार को समापन हो गया। तीन दिवसीय अधिवेशन के आखिरी दिन स्माइल रोटी बैंक फाउंडेशन के संस्थापक गोरखपुर निवासी श्रीकृष्ण पांडेय आजाद को प्रो. यशवंतराव केलकर युवा पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

परेड ग्राउंड में बसाए गए भगवान बिरसा मुंडा नगर से आयोजित समारोह में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मुख्य अतिथि के तौर पर शिरकत की। अधिवेशन में एबीवीपी की संगठनात्मक संरचना के अनुसार देशभर के 46 प्रांतों और मित्र राष्ट्र नेपाल से पंद्रह सौ से अधिक प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा, श्रीकृष्ण पांडेय आजाद का जीवन कार्य समाज के प्रति समर्पण, संवेदनशीलता और कर्तव्य का एक उज्ज्वल उदाहरण है।

 

राज्य स्थापना के 25 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर उत्तराखंड की धरती पर एबीवीपी का राष्ट्रीय अधिवेशन आयोजित होना हम सभी उत्तराखंडवासियों के लिए अत्यंत गर्व का विषय है। युवा यहां शिक्षा ग्रहण करते हुए, परिषद के कार्यकर्ता के रूप में देश की सेवा के संकल्प के साथ कार्य कर रहे हैं, यह उनके चरित्र, अनुशासन और राष्ट्रभावना का प्रतीक है। समाज, विद्यार्थियों और राष्ट्र के लिए जो काम संगठन कर रहा है, वह पूरे युवा समाज के लिए प्रेरणादायी है। कहा, यह राष्ट्रीय अधिवेशन एक सामान्य आयोजन नहीं है, यह राष्ट्र निर्माण का एक पवित्र यज्ञ है।

समाज के लिए आजाद ने किए उत्कृष्ट कार्य
श्रीकृष्ण पांडेय आजाद ने गोरखपुर व आसपास के क्षेत्रों में दो हजार से अधिक निराश्रित मनोरोगियों की सेवा करते हुए उन्हें चिकित्सा, दवा और पुनर्वास सहायता प्रदान की है। उन्होंने जेल में बंदियों के पुनर्वास, बाल भिक्षावृत्ति उन्मूलन, नशामुक्ति, स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण जैसे क्षेत्रों में भी उल्लेखनीय कार्य किया है। इसके अलावा दो पुनर्वास केंद्रों के संचालन के माध्यम से समाजसेवा में उल्लेखनीय योगदान दिया है। 

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युवाओं के कार्यों को उजागर करना है पुरस्कार का उद्देश्य
प्रो. यशवंतराव केलकर युवा पुरस्कार का उद्देश्य युवाओं की ओर से किए जा रहे सामाजिक उद्यमों के कार्य को उजागर करना, उन्हें प्रोत्साहित करना, सामाजिक उद्यमशीलता के प्रति युवाओं में कृतज्ञता भाव विकसित करना और युवा भारतीयों को सेवा कार्य के लिए प्रेरित करना है। यह पुरस्कार वर्ष 1991 से प्राध्यापक यशवंतराव केलकर की स्मृति में दिया जा रहा है, जिन्हें परिषद के शिल्पकार के रूप में जाना जाता है।

संकट के समय संगठन के कार्यकर्ता रहते हैं आगे
सीएम धामी ने कहा, देश में जब भी कोई संकट आया आपातकाल में लोकतंत्र पर हमला, शिक्षा सुधार के संघर्ष, सीमाओं पर संकट, छात्र आंदोलनों की व्यवस्थाएं, हर जगह परिषद के कार्यकर्ता अग्रिम पंक्ति में खड़े रहे। हजारों कार्यकर्ताओं ने लोकतंत्र की रक्षा के लिए यातनाएं सहीं, पर लोकतांत्रिक ज्योति बुझने नहीं दी। आज वहां भारत माता की जय के नारे जिस शक्ति और उत्साह से गूंजते हैं, वह परिषद की दशकों की सतत तपस्या का परिणाम है। कहा, भारत की सबसे बड़ी ताकत उसकी युवा शक्ति यदि सही दिशा में प्रयुक्त हो जाए, तो भारत न केवल आर्थिक महाशक्ति बनेगा, बल्कि फिर से विश्वगुरु के रूप में प्रतिष्ठित होगा। मुझे विश्वास है कि इस अधिवेशन से निकली ऊर्जा, विचार और संकल्प राष्ट्र निर्माण में नए अध्याय रचेंगे।

देश भर के युवाओं में जोश भर गए पांडेय
श्रीकृष्ण पांडेय आजाद अपने अनोखे अंदाज में देश भर के युवाओं में राष्ट्र प्रथम के लिए जोश भर गए। उन्होंने कहा, संगठन की ओर से पुरस्कार के रूप में दी गई एक लाख रुपये की निधि भारतीय मनोरोगियों की सेवा के लिए समर्पित करता हूं। कहा, सेवा के मार्ग में बाधाएं तो आती ही हैं, लेकिन उनसे घबराना नहीं चाहिए। भगवान राम के मंदिर के निर्माण में 500 वर्षों का लंबा संघर्ष लगा, लेकिन जब मंदिर बना, तो पूरी दुनिया भारत की ओर देखने लगी। जब हमारे प्रभु हमारे लिए इतने संघर्षों के बाद बाहर आ सकते हैं, तो हम क्यों नहीं, इसलिए सेवा के मार्ग से कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।

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