हल्द्वानी: खनन वाहनों से पुलिस की हो रही काली कमाई, जवान दे सिस्टम, जनता की जान से हर रोज क्यों हो रहा है खिलवाड़?

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पुलिस के सामने डंपर नियम रौंदते हुए शहर की गलियों में फर्राटा भर रहे हैं। शहर को जाम से निजात दिलाने के लिए कागजों पर योजना बनाने वाले पुलिस महकमे की ओर से इन पर कार्रवाई नहीं होने से शहर के जनप्रतिनिधियों और लोगों में नाराजगी है। उनका कहना है कि पुलिस अपनी आंखों पर गांधारी के सामान पट्टी बांधे हुए हैं और डंपर हर रोज दुशासन की तरह दुस्साहस कर रहे हैं। खनन शुरू हो चुका है और शहर के अंदर डंपरों की संख्या तेजी से बढ़ी है।

ज्यादातर डंपर को गौला बाईपास के जरिये अवाजाही करते हैं। इसके बावजूद तमाम ऐसे डंपर हैं जो शनि बाजार होते हुए शहर में प्रवेश करते हैं। बरेली रोड से टीपीनगर होते हुए यह सीधे देवलचौड़ के रास्ते छड़़ायल और आनंदा एकेडमी होकर पीलीकोठी निकल रहे हैं। छड़़ायल मार्ग पर जहां दो बड़े स्कूल हैं वही आनंदा एकेडमी सहित दो विद्यालय धानमिल रोड पर भी हैं। शहर के सबसे व्यस्ततम अंदरूनी मार्गों में से एक पीलीकोठी रोड पर भी डंपर दिन भर फर्राटा भर रहे हैं। मुख्य चौराहा से पुलिस के सामने से गुजर रहे हैं और जिम्मेदार आंखें फेर ले रहे हैं। लोग सवाल उठा रहे हैं कि नियम टूटते देखने के बावजूद पुलिस क्यों इन पर कार्रवाई नहीं करती।

 

ऐसा नहीं है तो जवाब दे सिस्टम, जनता की जान से हर रोज क्यों हो रहा है खिलवाड़

वार्ड में शहर के कई प्रतिष्ठित स्कूल हैं। तेज गति से दौड़ रहे डंपर चलती फिरती मौत बने हुए हैं। स्कूल खुलने और छुट्टी के समय इन डंपरों के आवागमन पर सख्ती से प्रतिबंध लगना चाहिए। इन मार्गों पर पुलिसकर्मी भी तैनात रहते हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि कार्रवाई क्यों नहीं होती है। कहीं न कहीं इसमें पुलिस की मिली भगत भी हो सकती है। – मुकुल बल्यूटिया, पार्षद वार्ड 48 मल्ली बमौरी

भीड़ वाले क्षेत्रों में डंपरों की स्पीड पर नियंत्रण लगाया जाना आवश्यक है ताकि हादसे में किसी की जान न जाए। इसे लेकर पुलिस को समय समय पर जागरूकता अभियान भी चलाना चाहिए। पुलिस के सामने ही यदि भारी मालवाहक वाहन शहर के अंदर प्रवेश कर रहे हैं तो पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठना लाजमी हो जाता है। इसे मिली भगत भी कहे तो गलत नहीं होगा। मनोज जोशी, पार्षद वार्ड 58 तल्ली हल्द्वानी

डंपरों का संचालन आबादी क्षेत्र की जगह बाईपास मार्गों से किया जाना चाहिए। इन पर सख्ती से रोक लगाने के लिए पुलिस और प्रशासन को लगातार चेकिंग अभियान चलाने की जरूरत है। बेरोकटोक चल रहे डंपरों की वजह से मोहल्ले गलियों की सड़कें भी क्षतिग्रस्त हो रही है। पुलिसकर्मियों के सामने ये वाहन नियम रौंदते हैं लेकिन कर्मचारी कोई कार्रवाई नहीं करते। विश्वंभर कांडपाल, समाज सेवी

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जाम को कम करने के लिए चौड़ीकरण के नाम पर दशकों पुरानी दुकानें तोड़ी गई लेकिन दिन भर दौड़ रहे डंपरों से यातायात बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। इनसे आए दिन हादसे हो रहे हैं। यदि यह भीड़भाड़ वाले इलाके में चल रहे हैं तो इसमें पुलिस की मिलीभगत से इन्कार नहीं किया जा सकता है। कुछ गेट में खनन का कार्य दिन में होता है। ऐसे में वहां डंपर के लिए अलग से रूट निर्धारण किया जाए। ललित जोशी, कांग्रेस नेता

शहर के अंदर भारी मालवाहक रोकने के लिए जल्द ही प्लानिंग की जाएगी। दिन में इनका प्रवेश बैन होगा जबकि रात में यह भारी माल वाहक सामान की अनलोडिंग कर सकते हैं। डॉ. मंजूनाथ टीसी, एसएसपी

सुबह लगा बोर्ड, दिन में नियम टूटा
अमर उजाला के अभियान के बाद देवलचौड़ चौराहे पर पुलिस की ओर से नो एंट्री का बोर्ड लगवाया गया है। इसके तहत इस मार्गी पर सुबह छह से रात नौ बजे तक भारी वाहनों का प्रवेश प्रतिबंधित है लेकिन यह नियम कायदे और तैयारियां पहले ही दिन ध्वस्त हो गए। दोपहर में ही मार्ग से डंपर व अन्य भारी वाहनों का जाना शुरू हो गया। रामपुर रोड और टीपीनगर की ओर से आने वाले डंपर देवलचौड़ चौराहे पर लगे बोर्ड की अनदेखी करते हुए छड़ायल वाले मार्ग पर रफ्तार भरते रहे। यहीं चंद दूरी पर टीपीनगर पुलिस चौकी भी है, चौराहे पर इक्का-दुक्का पुलिसकर्मी भी तैनात रहते हैं लेकिन नो एंट्री में घुस रहे डंपरों पर कोई कार्रवाई करने की जहमत नहीं उठाता।

नैनीताल मार्ग पर सुबह स्कूल समय में दौड़ते हैं वाहन
शीशमहल गेट से खनन का समय सुबह पांच से नौ बजे तक का है। नैनीताल मार्ग पर नो-एंट्री का समय भी सुबह नौ बजे से रात के नौ बजे तक है। ऐसे में आखिरी समय में निकलने वाले डंपर तेज रफ्तार से नो एंट्री जोन पार करने की कोशिश करते हैं। ऐसे में कई बार हादसे की आशंका बन जाती है। राजपुरा गेट से पूरे दिन खनन के वाहन निकलते हैं।

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