हल्द्वानी नगर निगम निराश्रित पशुओं की सुध लेना ही भूल गया है। पशुओं को भूख और बीमारी से मरने के लिए रोडो पर छोड़ दिया है। सड़कों पर घूमते – घूमते
मवेशी आने जाने वाले लोगों की जान के लिए भी खतरा बन रहे हैं। सनातन धर्म में गाय को माता का दर्जा दिया गया है। इसके अलावा नंदी का भी पूजन होता है। हल्द्वानी की लगभग सभी सड़कों पर इन बेजुबान हजारों गाय और नंदी बेसहारा भटक रहे हैं, वो किसी को नजर नहीं आती हैं। भूख से तड़पते पशु कहीं कूड़े के ढेर में खाना ढूंढते हैं तो कहीं वाहनों की चपेट में आने से जख्मी होकर दम तोड़ रहे हैं। गौ माता के नाम पर राजनीति करने वाले भी खामोश हैं। हल्द्वानी व उसके आसपास के क्षेत्रों में वैसे तो कई गोशालाएं हैं। गाय के पूजन के साथ आश्रमों में दिनचर्या शुरू होती है। लेकिन आश्रम से बाहर सड़कों पर घूमने वाली गायें किसी को नजर नहीं आती हैं।
श्राद्ध पक्ष में पितरों के पूजन के साथ गाय के ग्रास दिया जाता है। रोड और शहर की सड़कों से लेकर हर गली मोहल्ले में गाय और नंदी नजर आते हैं। कूड़ाघर और डंपिंग जोन के आसपास इनका झुंड रहता है। अधिकतर जगहों पर गाय और नंदी जख्मी दिखाई देते हैं।
नगर निगम को निराश्रित पशुओं की सुध नहीं ना इनके पास निराश्रित मवेशियों को पकड़ने के संसाधन भी नहीं, बल्कि पकड़े जाने के बाद उनको खिलाने के लिए चारे की व्यवस्था तक नहीं है।
अब देखना यह है कि इन बेजुबानो की आखिर कब कौन शुद्ध लेगा।








