नैनीताल/ रामनगर : सरकारी अस्पताल के चिकित्सकों की लापरवाही से गर्भवती महिला व गर्भ में पल रहे दो मासूमों की हुई दर्दनाक मौत।

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अल्मोड़ा जनपद के सल्ट क्षेत्र के ग्राम देवायल निवासी लक्ष्मण सिंह कि 24 वर्षीय पत्नी मंजू देवी जोकि गर्भवती थी इस महिला की चिकित्सकों की लापरवाही के कारण दर्दनाक मौत हो गई तो वही मृतक महिला के गर्भ में पल रहे तू मासूम बच्चों की भी मौत हो गई। मामले में क्षेत्र के पूर्व ग्राम प्रधान गोपाल सिंह आरोप लगाते हुए बताया कि महिला को उपचार के लिए परिजन पहले गांव के ही प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में ले गए थे जहां चिकित्सकों ने पहले तो आने में ही समय लगा दिया और जब चिकित्सक पहुंचे तो उन्होंने महिला को उपचार के लिए हायर सेंटर रेफर कर दिया उनका आरोप है कि प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में उन्हें एंबुलेंस भी उपलब्ध नहीं कराई गई जिसके बाद परिजन इस महिला को उपचार के लिए रामनगर के स्वर्गीय राम दत्त जोशी राजकीय संयुक्त चिकित्सालय लाए पूर्व प्रधान का आरोप है कि रामनगर में भी चिकित्सक करीब 20 मिनट बाद अस्पताल पहुंचे जहां उन्होंने महिला को देखते हुए तुरंत उसे हायर सेंटर रेफर कर दिया लेकिन यहां भी महिला को एंबुलेंस उपलब्ध नहीं हो पाई जिसके बाद परिजन महिला को उपचार के लिए हल्द्वानी ले जा रहे थे लेकिन इसी बीच महिला ने बैल पड़ाव के समीप दम तोड़ दिया पूर्व प्रधान का आरोप है कि परिजन महिला को वापस रामनगर के सरकारी अस्पताल लाए जहां चिकित्सकों ने महिला को मृत घोषित कर दिया उसके बाद परिजनों ने महिला के लगी यूरिन की नली को निकालने की बात कही तो चिकित्सकों ने महिला की नली नहीं निकाली पूर्व प्रधान ने चिकित्सकों पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कहा कि चिकित्सकों की लापरवाही के कारण महिला व उसके गर्भ में पल रहे दो मासूम बच्चों की मौत हुई है उन्होंने इस मामले में मुख्यमंत्री व अन्य अधिकारियों को शिकायती पत्र भेजकर आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
वही राज्य आंदोलनकारी व उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी के केंद्रीय उपाध्यक्ष प्रभात ध्यानी ने भी इस मामले में रामनगर सही चिकित्सालय के सीएमएस मणि भूषण पंच को एक ज्ञापन सौंपा और तुरंत कार्रवाई करने को कहा वही दूसरी ओर जिलाधिकारी को शिकायती पत्र भेजकर कार्रवाई करने की मांग की है।

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वही इस मामले में चिकित्सालय के सीएमएस डॉक्टर मणि भूषण पंत ने बताया कि मामला उनके संज्ञान में आया है और वह इसकी जांच कर रहे हैं। वही आपको बता दें कि रामनगर के सरकारी अस्पताल मैं मरीजों को बेहतर सुविधाएं देने के लिए सरकार ने इस अस्पताल को पीपीपी मोड पर दिया था लेकिन पीपीपी मोड पर जाने के बाद भी आज भी मरीजों को उपचार नहीं मिल पा रहा है प्रदेश सरकार भले ही प्रदेश में स्वास्थ्य सुविधाएं बेहतर करने के दावे कर रही हो लेकिन धरातल पर देखें तो सरकारी अस्पतालों में हो रही लापरवाही के आंकड़े सरकार के दावों की पोल खोल रहे हैं।


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