महिला आरक्षण कानून- महिला आरक्षण कानून जल्द लागू करने की अपील, PM बोले- 2029 चुनाव से पहले हो क्रियान्वयन

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प्रधानमंत्री मोदी ने महिला आरक्षण कानून को लेकर बड़ा बयान देते हुए कहा है कि अब इसे सच्ची भावना के साथ लागू करने का समय आ गया है। उन्होंने लोकसभा और राज्यसभा के फ्लोर लीडर्स को पत्र लिखकर सभी दलों से एकजुट होकर इस ऐतिहासिक संशोधन को पारित करने की अपील की है। प्रधानमंत्री ने अपने पत्र में कहा कि व्यापक विचार-विमर्श के बाद यह निष्कर्ष निकला है कि देश में अब महिला आरक्षण कानून को प्रभावी रूप से लागू करने का समय आ गया है।

महिलाओं की भागीदारी पर जोर
प्रधानमंत्री ने कहा कि कोई भी समाज तभी आगे बढ़ सकता है जब महिलाओं को आगे बढ़ने, निर्णय लेने और नेतृत्व करने के अवसर मिलें। उन्होंने इसे विकसित भारत के लक्ष्य से भी जोड़ा। पीएम मोदी ने स्पष्ट किया कि भारत के 2029 लोकसभा और विधानसभा चुनावों में महिला आरक्षण को लागू करना बेहद जरूरी है। इससे राजनीति में महिलाओं की भागीदारी और मजबूत होगी। पीएम मोदी ने सभी राजनीतिक दलों से अपील की कि वे मिलकर संविधान संशोधन विधेयक को पारित करें, ताकि महिला आरक्षण कानून को वास्तविक रूप से लागू किया जा सके।

 

संसद का विशेष सत्र
सरकार ने 16 से 18 अप्रैल तक संसद का तीन दिवसीय विशेष सत्र बुलाया है, जिसमें महिला आरक्षण कानून में आवश्यक संशोधनों पर चर्चा और निर्णय की संभावना है। वर्तमान प्रावधानों के तहत लोकसभा और विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लागू होने से लोकसभा सीटों की संख्या 816 तक पहुंच सकती है, जिनमें से 273 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी।

हालांकि, महिलाओं का कोटा 2027 की जनगणना के आधार पर परिसीमन अभ्यास पूरा होने के बाद ही प्रभावी हो पाता। इसका मतलब था कि यदि वर्तमान कानून जैसा है वैसा ही रहता, तो आरक्षण 2034 से पहले लागू नहीं हो पाता। 2029 के लोकसभा चुनावों से इसे लागू करने के लिए, ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ में बदलाव की आवश्यकता थी; इसलिए, सरकार कानून में संशोधन पारित करने के लिए एक विशेष सत्र आयोजित कर रही है।

विशेष संसद सत्र से पहले भाजपा ने जारी किया तीन लाइन का व्हिप
भारतीय जनता पार्टी ने 16-18 अप्रैल, 2026 के लिए लोकसभा और राज्यसभा दोनों में अपने सभी सांसदों को एक जरूरी तीन-लाइन व्हिप जारी किया है। निर्देश में सभी केंद्रीय मंत्रियों और सांसदों को इस दौरान सदन में मौजूद रहने का आदेश दिया गया है, जिसमें कोई छुट्टी की अनुमति नहीं है। सदस्यों को निर्देश दिया गया है कि वे बताई गई तारीखों के दौरान सख्ती से पालन करें और बिना किसी रुकावट के उपस्थित रहें।

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