मौसम: दिल्ली-NCR में गुरुवार भी रहेगा कूल-कूल, बादल से बरसेंगी राहत की बौछारें,2 डिग्री गिरा पारा

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पिछले कुछ दिनों से भीषण गर्मी और लू की मार झेल रहे दिल्ली के लोगों को राहत मिली है। बुधवार अल सुबह करीब पांच बजे से झमाझम बारिश शुरू हुई। रात से ही दिल्ली-एनसीआर के कई इलाकों में चल रही तेज ठंडी हवाओं के साथ बारिश ने ने पारे को नीचे गिराना शुरू कर दिया है, जिससे लोगों को झुलसाती गर्मी से काफी हद तक निजात मिली है। ऐसे में सुबह से ही मौसम में बदलाव दिखा, तेज हवा और बादल छाने से मौसम सुहावना हो गया। हल्की बूंदाबांदी से धूल भरी आंधी से मिली लोगों को राहत मिली। लेकिन, 10 बजे के बाद फिर मौसम बदला।

 

गर्मी से मिली राहत
तपती धूप और गर्म हवाओं ने लोगों का जीना दुश्वार कर दिया। इससे लोगों का हाल बेहाल रहा और वह परेशान दिखे। वह घर से बाहर निकलते ही पसीना पोंछते नजर आए। शाम और रात के समय गर्म हवाएं चली। इस दौरान अधिकतम तापमान 37.1 और न्यूनतम तापमान 20.4 डिग्री दर्ज हुआ। दिल्ली में अधिकतम आर्द्रता 88 प्रतिशत और न्यूनतम आर्द्रता 39 प्रतिशत रही। वहीं, 28 से 29 अप्रैल सुबह 08:30 बजे तक सफदरजंग मानक केंद्र में 1.8 एमएम बारिश हुई। इस अवधि में सबसे अधिक बारिश आया नगर में 3.8 एमएम रिकॉर्ड की गई। मंगलवार को भी लोगों को झुलसाने वाली गर्मी से काफी राहत मिली थी। बादल और हल्की बूंदाबांदी के चलते छह दिनों बाद दिल्ली का पारा 40 डिग्री से नीचे रहा था। गर्मी ने दिल्ली में रात के तापमान का नौ साल का रिकॉर्ड तोड़ा है।

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गुरुवार को बारिश के आसार
मौसम विभाग के अनुसार, 30 अप्रैल को आसमान में बादल छाए रहेंगे और हल्की बारिश हो सकती है। इस दौरान तेज हवाएं चलने का भी अनुमान है, जिनकी रफ्तार 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंच सकती है। साथ ही, हवा के झोंके 50 किलोमीटर प्रति घंटा तक जा सकते हैं। साथ ही, 1 और 2 मई को मौसम साफ रहेगा और तापमान बढ़कर 40 डिग्री के आसपास पहुंच सकता है, जिससे गर्मी में इजाफा होगा। मौसम विभाग के अनुसार, 3, 4 और 5 मई को फिर से बादल छाने और हल्की बारिश की संभावना हैं। साथ ही, गरज-चमक और तेज हवाएं भी चल सकती हैं। इसके अलावा, एक नया पश्चिमी विक्षोभ 2 मई से पश्चिमी हिमालयी क्षेत्र को प्रभावित कर सकता है, जो अपना असर मैदानी इलाकों में शाम तक या फिर अगले दिन दिखा सकता है।

 

बारिश ने धोया प्रदूषण, मध्यम श्रेणी में पहुंची हवा
तेज हवाओं के साथ हुई बारिश ने प्रदूषण को धो दिया है। ऐसे में बुधवार को वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 183 दर्ज किया गया। यह हवा की मध्यम श्रेणी है। इसमें मंगलवार की तुलना में 56 सूचकांक की गिरावट दर्ज की गई। दूसरी ओर, एनसीआर में ग्रेटर नोएडा की हवा सबसे अधिक प्रदूषित रही। यहां एक्यूआई 226 दर्ज किया गया, यह हवा की खराब श्रेणी है। वहीं, गाजियाबाद में 199, नोएडा में 192 और गुरुग्राम में 186 एक्यूआई दर्ज किया गया। इसके अलावा, फरीदाबाद की हवा सबसे साफ रही। यहां सूचकांक 157 दर्ज किया गया। यह हवा की मध्यम श्रेणी है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के अनुसार, हवा पूर्व दिशा से 15 किलोमीटर प्रतिघंटे के गति से चली। वहीं, अनुमानित अधिकतम मिश्रण गहराई 4700 मीटर रही। इसके अलावा, वेंटिलेशन इंडेक्स 14000 मीटर प्रति वर्ग सेकंड रहा। दूसरी ओर, शाम चार बजे हवा में पीएम10 की मात्रा 196.8 और पीएम2.5 की मात्रा 62.6 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर दर्ज की गई। ऐसे में सीपीसीबी का पूर्वानुमान है कि शनिवार तक हवा इसी श्रेणी में बरकरार रहेगी। 

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एआई आधारित क्लाइमेट प्लेटफॉर्म का बड़ा अनुमान, भारत में बढ़ेंगे बेहद गर्म दिन
देश में जलवायु परिवर्तन के असर को लेकर एक नए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) आधारित अध्ययन में गंभीर संकेत सामने आए हैं। इस रिपोर्ट के अनुसार आने वाले 20 वर्षों में भारत में हर साल 15 से 40 तक अधिक अत्यधिक गर्म दिन बढ़ सकते हैं। यह जानकारी ऊर्जा, पर्यावरण और जल परिषद (सीईईडब्ल्यू) की तरफ से विकसित नए क्लाइमेट इंटेलिजेंस प्लेटफॉर्म जलवायु लचीलापन विश्लेषण और विजुअलाइजेशन इंटेलिजेंस सिस्टम (क्रेविस) से मिली है, जिसे हाल ही में लॉन्च किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, 1981 से 2010 की जलवायु स्थिति की तुलना में भारत के कई हिस्सों में न सिर्फ गर्म दिन बढ़ेंगे, बल्कि हर साल 20 से 40 अतिरिक्त गर्म रातें भी देखने को मिल सकती हैं।

 

बारिश की घटनाओं में भी लगातार बढ़ोतरी का अनुमान
इसके साथ ही भारी बारिश की घटनाओं में भी लगातार बढ़ोतरी का अनुमान लगाया गया है। अध्ययन में कहा गया है कि महाराष्ट्र, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक और तमिलनाडु जैसे राज्यों में गर्मी और भारी बारिश दोनों में ज्यादा तेजी से बदलाव देखने को मिल सकता है। क्रेविस प्लेटफॉर्म पिछले 40 वर्षों के जलवायु डेटा का विश्लेषण करके भविष्य के अनुमान तैयार करता है। यह सिस्टम 2030 से 2070 तक के मौसम पैटर्न का आकलन कर सकता है और जिलों के स्तर तक जानकारी प्रदान करता है। सीईईडब्ल्यू के सीईओ अरुणाभ घोष ने कहा कि इस प्लेटफॉर्म का उद्देश्य जलवायु डेटा को सिर्फ रिसर्च तक सीमित न रखकर नीति निर्माण और प्रशासनिक फैसलों में उपयोगी बनाना है। घोष के अनुसार, इससे यह जानकारी इस्तेमाल करने लायक, भरोसेमंद और हर रोज की योजना बनाने और प्रतिक्रिया देने वाली प्रणालियों का एक अहम हिस्सा बन जाएगी। चाहे वह भारत के जिलों से लेकर बाजारों तक हो, या फिर अंततः पूरे ‘ग्लोबल साउथ’ (विकासशील देशों) में।

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