राज्य में जबरन धर्मांतरण रोकने के लिए सरकार ने उत्तराखंड धर्म स्वतंत्रता कानून को और कठोर कर दिया है। इसमें जुर्माना राशि बढ़ाने के साथ ही सजा की अवधि आजीवन कारावास तक कर दी है। इसके अलावा सेना से सेवा मुक्त होने वाले अग्निवीरों को समूह ग की सीधी भर्ती में वर्दी पदों पर 10 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण देने का निर्णय लिया गया है। 2026 तक सेना से लौटकर आने वाले 850 अग्निवीरों को आरक्षण से नौकरी मिलेगी।
बुधवार को सचिवालय में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट में 26 प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। कैबिनेट ने जबरन धर्म परिवर्तन रोकने के लिए उत्तराखंड धर्म स्वतंत्रता संशोधन विधेयक को मंजूरी दे दी। इस विधेयक को आगामी मानसून सत्र में पेश किया जाएगा। अधिनियम में संशोधन कर सजा व जुर्माने का सख्त प्रावधान किया है। जबरन धर्मांतरण करने पर सजा की अवधि को 14 साल से आजीवन कारावास तक कर दिया गया है। जुर्माना राशि भी 50 हजार से बढ़ा कर 10 लाख कर दी गई। इसके साथ धर्म परिवर्तन की गतिविधियों से अर्जित की गई संपत्ति कुर्क की जाएगी। डिजिटल माध्यम से धर्म परिवर्तन का प्रलोभन देने व छद्म भेष में धर्मांतरण को कानून के दायरे में लाया गया है। धर्म परिवर्तन की गतिविधियों के लिए विदेशी संस्थानों से फंड प्राप्त करने पर 10 लाख तक जुर्माना करने का प्रावधान किया गया है।








