UP- अधिवक्ता का कत्ल: इस विवाद में हुई अधिवक्ता राजीव की हत्या, मिलकर तैयार की स्क्रिप्ट

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यूपी के मिर्जापुर में पूर्व प्रधान व अधिवक्ता राजीव सिंह उर्फ रिंकू की शनिवार को दिनदहाड़े गोली मारकर हत्या करने के दूसरे आरोपी की पहचान लंका पहड़ी निवासी पुलिस बिंद के रूप में हो गई है। उसकी तलाश में पुलिस की पांच टीमें लगी हैं।

एसपी अपर्णा रजत कौशिक का कहना है कि मुख्य आरोपी राजेंद्र सोनकर में प्रधानी के लिए महत्वाकांक्षा थी। इसी को लेकर समय-समय पर वाद-विवाद होता था। राजीव सिंह की प्रधानी विवाद के चलते ही हत्या की गई है। हत्याकांड से जुड़े सभी पहलुओं पर पुलिस जांच कर रही है। 

 

रविवार देर रात सुरक्षा कारणों से ऑनलाइन पेशी के बाद मुख्य आरोपी राजेंद्र सोनकर को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। राजेंद्र सोनकर का मंडलीय अस्पताल की इमरजेंसी में उपचार चल रहा है।

 

सीओ मड़िहान शिखा भारती के साथ शहर कोतवाल दयाशंकर ओझा, जिगना थानाध्यक्ष संजय सिंह, चार दरोगा और 10 सिपाही निगरानी में तैनात हैं। पुलिस ने अधिवक्ता की हत्या के करीब 15 घंटे बाद मुख्य आरोपी राजेंद्र सोनकर को मुठभेड़ में गिरफ्तार कर लिया था। हत्या के बाद से अधिवक्ताओं में बहुत आक्रोश है।
राजेंद्र ने पुलिस को बताया था दूसरे साथी नाम 
अधिवक्ता की हत्या के दौरान राजेंद्र के साथ बाइक पर दूसरा आरोपी लंका पहड़ी निवासी पुलिस बिंद भी था। शनिवार रात जब राजेंद्र पुलिस मुठभेड़ में पकड़ा गया तो पूछताछ के बाद उसने अपने साथी के नाम का खुलासा किया था। पुलिस टीमें अब उसकी तलाश में लगी हैं।

दूसरी महिला के साथ रहता था राजेंद्र, यहीं से रची हत्या की साजिश
राजेंद्र सोनकर विंध्याचल का देवरी गांव छोड़कर शहर में कटरा कोतवाली क्षेत्र के डंगहर मोहल्ले में रहता था। यहां पर उसकी नानी ने राजेंद्र की मां को संपत्ति में हिस्सा दिया था।

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बाकी हिस्से पर कब्जा करने के लिए राजेंद्र ने नानी की हत्या कर दी। कब्जे वाली जमीन को बेचने के प्रयास में था पर पैसा नहीं मिलने पर नहीं बेच पाया था। यहां पर एक हिस्से में राजेंद्र की पत्नी अपने छोटे बेटे राहुल के साथ रहती है। राजेंद्र कभी-कभार यहां आता था।

वह दूसरी महिला के साथ लंका पहड़ी पर रहता था। अधिवक्ता को गोली मारने की घटना में उसका साथी भी लंका पहड़ी का निवासी पुलिस बिंद है। यहीं पर राजेंद्र और पुलिस बिंद की दोस्ती हुई। दोनों ने मिलकर हत्या की साजिश रची।
मुख्य आरोपी भी लड़ चुका है प्रधानी का चुनाव
राजेंद्र सोनकर की अधिवक्ता राजीव सिंह ने काफी मदद की थी। इसके बाद भी हत्या किए जाने के बाद से यही लग रहा है कि प्रधान बनने के महत्वकांक्षा के चलते ही राजीव सिंह की हत्या की। क्योंकि राजीव के रहते राजेंद्र का प्रधान बनना मुश्किल था। राजेंद्र 20 वर्ष पहले चुनाव लड़ा था। तब राम स्नेही दुबे ने उसे हरा दिया।

गांव में राजेंद्र की छवि ठीक नहीं थी, वहीं राजीव की छवि बहुत अच्छी थी। पिछली बार चुनाव लड़ने से मना किए तो गांव वालों ने जबरदस्ती के उनकी पत्नी को चुनाव में उतारा जीत हुई। चर्चा है कि किसी तीसरे ने राजेंद्र को प्रधान बनने की महत्वाकांक्षा को बल देते हुए राजीव को हटाने के लिए चाल तो नहीं चली। राजीव की हत्या भी हो गई और राजेंद्र जेल चला गया।
भाई ने की हत्यारोपी को फांसी की सजा देने की मांग
विंध्याचल थाना क्षेत्र के देवरी गांव में रविवार को दूसरे दिन भी मातम पसरा रहा। पास-पड़ोस सहित कई घरों में चूल्हे नहीं जले। अधिवक्ता राजीव सिंह के बड़े भाई संजीव ने कहा कि हत्यारे को फांसी की सजा होनी चाहिए। उन्होंने आगे बताया कि दो महीने पहले छोटे भाई राजीव से मोबाइल पर बात हुई थी। उन्होंने कहा कि उनका भाई उदार स्वाभाव का था। गांव में हर किसी का सहयोग करता था।
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गरीबों के शादी में सहयोग करने के साथ 25 बार रक्तदान भी किए थे। लोकप्रियता के कारण दो बार प्रधान रहे। बड़े भाई धनंजय सिंह और दूसरे नंबर के भाई संजीव देवरी गांव स्थित घर पर रहे। पिता जटा शंकर सिंह के पास शोक संवेदना व्यक्त करने के लिए गांव और आस-पास के लोग आते रहे।
उच्च स्तरीय जांच और अधिवक्ता सुरक्षा अधिनियम लाने की मांग
ऑल इंडिया रुरल बार एसोसिएशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष ज्ञानप्रकाश शुक्ल व राष्ट्रीय महासचिव अनिल कुमार तिवारी महेश ने रविवार को प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर वरिष्ठ अधिवक्ता राजीव सिंह की गोली मारकर हत्या किए जाने की उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग की।

प्रदेश में अधिवक्ता सुरक्षित नहीं है। आरोपियों पर रासुका लगाने और मृतक के परिजनों को एक करोड़ रुपये मुआवजा देने की मांग की। कहा कि जनवरी से अब तक प्रदेश के कई कोने में अधिवक्ताओं की हत्या के बावजूद सरकार अधिवक्ता सुरक्षा अधिनियम विधेयक पर अमल नहीं कर पा रही है।

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