यूएन महासभा: जयशंकर की कनाडा, मेक्सिको और वेनेजुएला के विदेश मंत्रियों से मुलाकात, ऊर्जा और एआई पर हुई चर्चा

संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र के दौरान भारत की कूटनीतिक गतिविधियां तेज रहीं। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने शनिवार को अलग-अलग बैठकों में कनाडा, मेक्सिको और वेनेजुएला के विदेश मंत्रियों से मुलाकात की। इन बैठकों में द्विपक्षीय संबंधों, आपसी सहयोग और मौजूदा क्षेत्रीय मुद्दों पर बातचीत हुई। जयशंकर ने इन मुलाकातों की जानकारी साझा करते हुए बताया कि अलग-अलग देशों के साथ भारत के संबंधों को आगे बढ़ाने पर चर्चा हुई।

कनाडा के साथ रिश्तों को लेकर क्या हुई बात?

जयशंकर ने कनाडा की विदेश मंत्री अनीता आनंद के साथ बैठक की। उन्होंने इस मुलाकात को उपयोगी बताया। जयशंकर ने कहा कि दोनों देश अपने संबंधों को नई ऊंचाई पर ले जाने की तैयारी कर रहे हैं। बैठक में दोनों देशों के बीच संबंधों को आगे बढ़ाने से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई। यह मुलाकात ऐसे समय हुई जब भारत और कनाडा के संबंधों को आगे बढ़ाने की दिशा में दोनों पक्षों की बातचीत महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

मेक्सिको के विदेश मंत्री से जयशंकर ने क्या चर्चा की?

जयशंकर ने मेक्सिको के विदेश मंत्री रॉबर्टो वेलास्को अल्वारेज के साथ भी बैठक की। दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय संबंधों से जुड़े मुद्दों पर बातचीत की। जयशंकर ने इस बैठक की जानकारी भी साझा की। भारत और मेक्सिको के बीच कई क्षेत्रों में सहयोग रहा है और संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान हुई यह बैठक दोनों देशों के बीच संपर्क को आगे बढ़ाने का अवसर बनी। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में बैठक में उठाए गए प्रत्येक मुद्दे का अलग-अलग विवरण नहीं दिया गया है।

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वेनेजुएला के साथ ऊर्जा सहयोग क्यों अहम रहा?

जयशंकर ने संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में वेनेजुएला के विदेश मंत्री फेलिक्स प्लासेंसिया गोंजालेज से मुलाकात की। उन्होंने बैठक को अच्छा बताया। जयशंकर के अनुसार, भारत और वेनेजुएला के बीच ऊर्जा संबंधों में तेजी आ रही है। दोनों देशों के बीच सहयोग के दूसरे क्षेत्रों पर भी चर्चा हुई। इसके अलावा मौजूदा क्षेत्रीय मुद्दे भी बातचीत का हिस्सा रहे। ऊर्जा क्षेत्र भारत और वेनेजुएला के संबंधों का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, इसलिए इस बैठक में इस मुद्दे पर विशेष ध्यान रहा।

एआई को लेकर भारत ने क्या रुख रखा?

  • इन द्विपक्षीय बैठकों से पहले जयशंकर ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी एआई को लेकर भारत की सोच भी रखी। उन्होंने कहा कि हर देश को अपने राष्ट्रीय लक्ष्यों और प्राथमिकताओं के अनुसार अपना एआई तंत्र तैयार करने का अधिकार है। इसके लिए देश अपने मॉडल विकसित कर सकते हैं और उनके इस्तेमाल की रणनीति तय कर सकते हैं। भारत एआई को ग्लोबल साउथ के साथ अपनी साझेदारी के एजेंडे का महत्वपूर्ण हिस्सा मानता है।
  • जयशंकर ने एआई को मानव सशक्तीकरण, आर्थिक समृद्धि और बड़े पैमाने पर लोगों की समस्याओं के समाधान में बदलाव लाने वाली तकनीक बताया। उन्होंने तकनीक को ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचाने और अलग-अलग संस्कृतियों को समझने की जरूरत पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि भारत ने फरवरी में एआई इंपैक्ट समिट की मेजबानी की थी, जिसमें इस क्षेत्र के विशेषज्ञ और प्रमुख लोग शामिल हुए थे।
  • कुल मिलाकर, संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान जयशंकर की इन बैठकों में भारत के अलग-अलग साझेदार देशों के साथ संबंधों को आगे बढ़ाने पर जोर दिखाई दिया। कनाडा के साथ संबंधों को नई ऊंचाई देने, मेक्सिको के साथ द्विपक्षीय संपर्क बढ़ाने और वेनेजुएला के साथ ऊर्जा सहयोग को गति देने पर चर्चा हुई। इसके साथ ही एआई को लेकर भारत ने अपनी प्राथमिकताओं को भी वैश्विक मंच पर सामने रखा।
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