भारत की इस पहल से सालाना 50 हजार महिलाओं की बच सकती है जान, WHO की वैज्ञानिक ने की तारीफ

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दुनियाभर में तेजी से बढ़ती घातक बीमारियों में से एक है। महिलाओं में होने वाले इस कैंसर के कारण हर साल लाखों मौंतें हो जाती हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के आंकड़ों के अनुसार साल 2022 में इस कैंसर के लगभग 6.60 लाख नए मामले सामने आए और 3.50 लाख से अधिक मौतें हुईं। इनमें से ज्यादातर मौतें कम और मध्यम आय वाले देशों में रिपोर्ट की गईं।

 

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, सर्वाइकल कैंसर भारतीय महिलाओं में होने वाला तीसरा सबसे आम कैंसर (18.3% मामले) और मौत का दूसरा सबसे बड़ा कारण है। इसके लगभग सभी मामले हाई-रिस्क एचपीवी संक्रमण की वजह से होते हैं। इस कैंसर को लेकर अच्छी बात ये है कि समय रहते अगर इससे बचाव के लिए टीके लगवा लिए जाएं तो इसे पूरी तरह से रोका जा सकता है।

भारत में सर्वाइकल कैंसर के खतरे को कम करने के लिए हाल ही में सरकार ने 14 साल और उससे अधिक उम्र की लड़कियों के लिए पूरे देश में फ्री एचपीवी वैक्सीनेशन प्रोग्राम शुरू करने की घोषणा की थी। भारत के इस पहल की स्वास्थ्य विशेषज्ञ काफी सराहना कर रहे हैं।

 

डब्ल्यूएचओ की पूर्व चीफ साइंटिस्ट ने की तारीफ

डब्ल्यूएचओ की पूर्व चीफ साइंटिस्ट डॉ. सौम्या स्वामीनाथन ने भारत के एचपीवी वैक्सीनेशन कैंपेन की सराहना करते हुए इसे जरूरी कदम बताया। डॉ. स्वामीनाथन ने कहा, वैक्सीनेशन ड्राइव भविष्य में इस घातक कैंसर के बोझ को कम करने में विशेष भूमिका निभा सकती है।

 

क्या कहती हैं डॉ स्वामीनाथन-

  • सर्वाइकल कैंसर महिलाओं में होने वाले शीर्ष तीन कैंसर में से एक है। भारतीय महिलाओं में हर साल 40-50 हजार मौतें इसी वजह से होती हैं।
  • सर्वाइकल कैंसर को वैक्सीन से रोका जा सकता है। आज किए गए वैक्सीनेशन का असर 15 से 20 साल बाद दिखेगा।
  • भारत का यह बहुत अच्छा कदम है। इसे एक पब्लिक हेल्थ प्रोग्राम के तौर पर शुरू करने से सर्वाइकल कैंसर से मुकाबला आसान हो सकता है।
  •  हम सर्वाइकल कैंसर को खत्म करने के अपने लक्ष्य में दूसरे देशों के साथ जुड़ रहे हैं। यह महिलाओं के हक में एक पहल है।
  • एचपीवी बहुत ही सुरक्षित वैक्सीन है और यह एक बहुत ही सस्ता पब्लिक हेल्थ इंटरवेंशन है। मुझे खुशी है कि भारत सरकार इसे शुरू कर रही है।
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सर्वाइकल कैंसर के खिलाफ भारत की जंग

सर्वाइकल कैंसर के खिलाफ जंग में भारत ने 14 साल और अधिक उम्र की लड़कियों-महिलाओं को फ्री में टीके देने की योजना बनाई है। क्वाड्रीवैलेंट एचपीवी वैक्सीन एचपीवी टाइप 16 और 18 से बचाती है, जो सर्वाइकल कैंसर का कारण बनते हैं। विशेषज्ञों ने कहा कि इस एक वैक्सीन से टाइप 6 और 11 से भी महिलाओं को सुरक्षित किया जा सकता है।

  • गौरतलब है कि तमाम वैज्ञानिक सबूत इस बात की पुष्टि करते हैं कि रिकमेंडेड एज ग्रुप की लड़कियों को दी जाने वाली वैक्सीन उन्हें संक्रमण के खिलाफ मजबूत और टिकाऊ सुरक्षा देती है।
  • नेशनल प्रोग्राम के तहत वैक्सीनेशन वॉलंटरी और फ्री होगा, जिससे सभी सोशियो-इकोनॉमिक ग्रुप्स को बराबर का लाभ मिल सकेगा।

 

एम्स में की गई थी फ्री स्क्रीनिंग

सर्वाइकल कैंसर के खिलाफ जंग में भारत लगातार प्रयासरत है। इससे पहले पूरी जनवरी ऑल इंडिया इंस्टिट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (एम्स) दिल्ली ने फ्री सर्वाइकल कैंसर स्क्रीनिंग सुविधा दी थी। जनवरी को सर्वाइकल कैंसर अवेयरनेस मंथ के रूप में मनाया जाता है, इसके तहत 31 जनवरी तक महिलाओं की फ्री में सर्वाइकल कैंसर की स्क्रीनिंग कराई गई।

किस उम्र तक महिलाएं लगवा सकती हैं टीके?

सर्वाइकल कैंसर से बचाव के लिए सभी महिलाओं को अपने डॉक्टर की सलाह पर टीका जरूर लगवाना चाहिए। विशेषज्ञों का कहना है कि वैक्सीन लगवाने की सबसे सही उम्र 9 से 14 वर्ष के बीच मानी जाती है। इस उम्र में वैक्सीन सबसे ज्यादा प्रभावी होती है। 26 साल तक के उम्र के महिलाएं भी टीके लगवा सकती हैं। हालांकि किसी भी उम्र में टीके लगवाने से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।

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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। 


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