वन महकमे का फायर सीजन पुरानी व्यवस्था के तहत 15 जून को पूरा हो जाता है पर वनाग्नि के दृष्टिगत 30 जून के बाद हालात को देखते हुए विभाग कोई फैसला लेगा। वन विभाग में 15 फरवरी से 15 जून तक फायर सीजन होता है पर बीते कुछ वर्षों में वनाग्नि की चुनौती बढ़ी है।
इसके बाद सत्र को आगे भी बढ़ाया जाता रहा है। पिछले साल ही वनाग्नि सत्र को 30 जून तक बढ़ाया गया था। इस बार भी यही स्थिति है। इस संबंध में मुख्य वन संरक्षक वनाग्नि नियंत्रण सुशांत पटनायक बताते हैं कि प्रदेश में एक सप्ताह से जंगल की आग की कोई सूचना नहीं है। पर 30 जून के बाद और बारिश की स्थिति को देखकर फायर सीजन समाप्त होने से जुड़ा फैसला लिया जाएगा।
ज्ञात हो कि अब तक प्रदेश में वनाग्नि की 575 घटनाएं हुई हैं। इसमें 482 हेक्टेयर क्षेत्रफल से अधिक में वन संपदा को नुकसान पहुंचा है। प्लांटेशन एरिया भी प्रभावित हुआ है।









