अयोध्या: महाराज जी के सानिध्य में हो रही है कथा

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श्री महंत डॉ. स्वामी भरत दास, कथा स्थल – उदासीन संगत ऋषि आश्रम, अयोध्या

 श्री गुरुपर्व महोत्सव के पावन अवसर पर उदासीन संगत ऋषि आश्रम में संगीतमय श्रीमद्भागवत कथा का भव्य आयोजन हो रहा है। कथा व्यास पूज्य स्वामी शिवचंद्रदास जी महाराज ने अपने अमृतमय वचनों से भक्तजनों को श्रीमद्भागवत महापुराण का दिव्य रसपान कराया।
स्वामी शिवचंद्रदास जी ने कहा कि “भागवत केवल एक ग्रंथ नहीं, बल्कि स्वयं भगवान का साक्षात स्वरूप है।” उन्होंने बताया कि वेदव्यास जी ने जिन शब्दों में इसका विग्रह रचा, वह अनंत भक्ति की अनुभूति कराता है। उनके अनुसार श्रीमद्भागवत के प्रत्येक अक्षर में दिव्य ज्योति समाहित है।
कथा के दौरान आचार्य जी ने जीवन मूल्यों और पारिवारिक संस्कृति पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि आजकल लोग ‘गुड मॉर्निंग’ से दिन की शुरुआत करते हैं, किंतु हमारे शास्त्र कहते हैं कि दिन का आरंभ माता-पिता एवं बड़ों के आशीर्वाद से होना चाहिए।
स्वामी जी ने भगवान श्रीकृष्ण के स्वरूप, स्वभाव और कार्य परिचय के माध्यम से धर्म के महत्व को सरलता से समझाया। उन्होंने विश्व हिंदू परिषद के यशस्वी नेता स्व. अशोक सिंघल जी के योगदान को भी श्रद्धापूर्वक स्मरण करते हुए कहा कि राम मंदिर निर्माण में उनका कार्य सदैव अनुकरणीय रहेगा।
स्वामी जी ने स्पष्ट किया कि धर्ममार्ग पर चलने वाले को कठिनाइयाँ अवश्य मिलती हैं, लेकिन वह कभी पराजित नहीं होता।
कार्यक्रम के समापन पर परमाध्यक्ष श्री महंत स्वामी भरत दास जी महाराज ने श्रद्धालुओं को आशीर्वचन प्रदान किए।


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