आपदा: वैज्ञानिकों का बड़ा खुलासा- ‘सच में बादल फटते तो बड़ी होती तबाही, तेज बारिश के कारण हुई बर्बादी’

Spread the love

 

 

राज्य में धराली, थराली समेत कई जगहों पर भीषण प्राकृतिक आपदा आई। इन आपदाओं के पीछे लोगों ने बादल फटना कहा है। पर वैज्ञानिक राज्य में बादल फटने की घटना नहीं मान रहे हैं। प्रदेश में तेज बरसात के साथ ही सामान्य से अधिक बारिश के चलते तबाही मची।

मौसम विज्ञान विभाग के वैज्ञानिक रोहित थपलियाल कहते हैं कि अधिक बारिश और नुकसान के चलते उसे बादल फटना मान लिया जाता है। एक घंटे में 100 एमएम बरसात होती है, तो उसे बादल फटना माना जाता है। इस सीजन में ऐसी कोई भी घटना रिकार्ड नहीं हुई है। एक घंटे में एक एमएम से बीस एमएम तक तीव्र बरसात, 20 से 50 एमएम अति तीव्र और 50 से 100 एमएम तक अत्यंत तीव्र बारिश का दौर माना जाता है। इसमें तीव्र और अति तीव्र बरसात का अनुपात अधिक होती है। इसके अलावा अत्यंत तीव्र बारिश 01 घंटे में 100 एमएम बारिश होना माना जाता है बादल फटना भी रिपोर्ट हुई है।

अटरिया विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ माधवन नायर राजीवन के अनुसार भी बादल फटने की घटना रिपोर्ट नहीं हुई है, उनके अनुसार इसके लिए तय मानक है। इसके आधार पर ही बादल फटना माना जा सकता है। इसके लिए साक्ष्य होना चाहिए, जो नहीं है। अगर पहाड़ों में एक दिन में पांच एमएम भी बरसात होती है, तो भी वह बहुत नुकसान कर सकती है। पहाड़ों पर ढलान होती है, उसके साथ पानी, पत्थर, मलबा आता है, इससे बाढ़ का स्तर ऊंचा हो जाता है। ऐसे में राज्य में जब तेज बारिश से इतना नुकसान हुआ है, ऐसे में बादल फटने की घटना होती तो नुकसान और बड़ा हो सकता था। अब तक सरकारी विभागों ने मानसून में आई आपदा से 5700 करोड़ से अधिक के नुकसान का आकलन किया है।
85 लोगों की हो चुकी मौत 
प्रदेश में एक अप्रैल से नौ सितंबर तक प्राकृतिक आपदा में 85 लोगों की मौत हो चुकी है। इसके अलावा 94 लोग लापता हैं। 3726 मकानों को आंशिक 195  को गंभीर नुकसान पहुंचा। आपदा की चपेट में आने में 274 मकान पूरी तरह ध्वस्त हो गए।

और पढ़े  उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग- आयोग ने घोषित की तिथि, पेपर लीक से रद्द हुई स्नातक स्तरीय परीक्षा अब 17 मई को होगी

22% अधिक हुई है बारिश
राज्य में सामान्य से अधिक बारिश हुई है। एक जून से नौ सितंबर तक 1299.3 एमएम बरसात हुई, जबकि सामान्य बारिश 1060.7 एमएम है। 22 प्रतिशत सामान्य से अधिक बारिश हुई है। अगर केवल एक सितंबर से नौ सितंबर तक की बात करें तो भी मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार सामान्य से 67 प्रतिशत अधिक बारिश हो चुकी है। ज्ञात हो कि हिमाचल, पश्चिम उत्तर प्रदेश, पंजाब, जम्मू कश्मीर व लद्दाख, हरियाणा चंडीगढ़ दिल्ली से अधिक बारिश उत्तराखंड में होती है।

बारिश के पैटर्न में भी बदलाव
उच्च हिमालीय क्षेत्रों में बारिश के पैटर्न में बदलाव को देखने को मिला है। उत्तरकाशी जिले के गंगोत्री और डोकरानी में वाडिया संस्थान अध्ययन कर रहा है। यहां पर उपकरण लगे हुए हैं। वाडिया संस्थान के निदेशक विनीत गहलोत कहते हैं कि हर्षिल में जिस दिन आपदा आयी थी, उस दिन वहां पर कुल 20 एमएम बरसात हुई जबकि डोकरानी ग्लेशियर है, वहां पर लगे उपकरणों में पांच गुना बारिश रिपोर्ट हुई।


Spread the love
  • Related Posts

    चमोली- आंचल के सिर सजा फेमिना मिस इंडिया उत्तराखंड 2026 का ताज

    Spread the love

    Spread the loveचमोली जिले के किरुली गांव निवासी आंचल फरस्वाण फेमिना मिस इंडिया उत्तराखंड चुनी गई हैं। वह मुंबई में होने वाले फेमिना मिस इंडिया में उत्तराखंड का प्रतिनिधित्व करेंगी।…


    Spread the love

    देहरादून: 10 साल की बच्ची के यौन उत्पीड़न में 65 साल का आटा चक्की संचालक गिरफ्तार, मां ने की थी शिकायत

    Spread the love

    Spread the love     सहसपुर कोतवाली क्षेत्र में 65 वर्षीय आटा चक्की (घराट) संचालक को 10 वर्ष की बच्ची से यौन उत्पीड़न के मामले में गिरफ्तार किया गया है। शिकायत के…


    Spread the love