जरूर करें सावन में गुजरात के इन शिव मंदिरों के दर्शन, मिलेगा असीम पुण्य

 

भगवान शिव का प्रिय महीना सावन मास आ गया है। इस वर्ष सावन माह 11 जुलाई से शुरू हो रहा है। इसका समापन रक्षाबंधन पर होता है। सावन का महीना भगवान शिव की आराधना के लिए विशेष रूप से पवित्र माना जाता है। यह वही समय होता है जब शिव भक्त भोलेनाथ को प्रसन्न करने के लिए व्रत, रुद्राभिषेक और मंदिरों के दर्शन करते हैं। भारत के हर कोने में शिव मंदिर मौजूद हैं, लेकिन गुजरात में कुछ शिव मंदिर ऐसे भी हैं जो अपनी धार्मिक, ऐतिहासिक और वास्तुकला की दृष्टि से बेहद खास हैं। गुजरात में रहने वाले या जो भी सावन माह में गुजरात जा रहे हैं, वह इन प्राचीन और प्रसिद्ध शिव मंदिरों के दर्शन के लिए जा सकते हैं। अगर आप सावन में गुजरात की यात्रा की योजना बना रहे हैं, तो इन प्रसिद्ध शिव मंदिरों में दर्शन करना ना भूलें।

 

सोमनाथ ज्योतिर्लिंग मंदिर

गुजरात के वेरावल के प्रभास पाटन में भगवान शिव का प्राचीनतम मंदिर है। गुजरात का सोमनाथ मंदिर शिव जी के 12 ज्योतिर्लिंगों में से पहला ज्योतिर्लिंग है। मान्यता है कि इस मंदिर का निर्माण चंद्रदेव सोमराज ने किया था। इसका उल्लेख ऋग्वेद में मिलता है। समुद्र किनारे स्थित यह मंदिर अलौकिक शांति और शक्ति का प्रतीक है। सावन में यहां हजारों भक्त रुद्राभिषेक करने आते हैं।

 

नीलकंठधाम, पोईचा

गुजरात में ही नीलकंठ धाम मंदिर नर्मदा नदी के तट पर पोइचा गांव में स्थित है। यह मंदिर भरूच से लगभग 80 किमी और वडोदरा से 60 किमी दूर है। मंदिर आधुनिक निर्माण से सुसज्जित है। यहां भगवान शिव का विशाल स्वरूप और आकर्षक लाइट शो भी दर्शनीय है। परिवार सहित दर्शन के लिए यह आदर्श स्थल हैं।

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नागेश्वर ज्योतिर्लिंग, द्वारका

गुजरात के सौराष्ट्र तट पर द्वारका शहर और बेट द्वारका द्वीप के बीच के मार्ग पर शिव जी का महत्वपूर्ण मंदिर है, जिसका नाम नागेश्वर ज्योतिर्लिंग है। द्वारका से 17 किमी दूर स्थित यह ज्योतिर्लिंग भगवान शिव के नीलकंठ रूप को समर्पित है। सावन के हर सोमवार को यहां विशेष रुद्राभिषेक किया जाता है।

 

स्तंभेश्वर महादेव मंदिर

गुजरात के ही प्राचीन सोमनाथ मंदिर से लगभग 15 किमी दूर एक अनोखा शिव मंदिर है जो कि दिन में दो बार आंखों के सामने से ओझल हो जाता है। मान्यता है कि समुद्र के पास स्थित स्तंभेश्वर महादेव मंदिर का जलाभिषेक खुद से होता है।

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