सर्वेक्षण में चौंकाने वाली जानकारी- सर्वे में हुआ चौंकाने वाला खुलासा, 12–13 साल में ही नशे की चपेट में आने लगते हैं बच्चे, जानें…

भारत के दस बड़े शहरों में लगभग 5,900 स्कूली छात्रों पर किए गए एक सर्वेक्षण ने चिंताजनक नतीजा निकला।अध्ययन में पाया गया कि बच्चे औसतन 12.9 वर्ष की आयु (11–14 वर्ष की सीमा) में ही नशीले पदार्थों के संपर्क में आ जाते हैं। यह शोध एम्स (AIIMS) के वैज्ञानिकों और अन्य विशेषज्ञों की टीम ने मिलकर किया है और इसे नेशनल मेडिकल जर्नल ऑफ इंडिया में प्रकाशित किया गया है। परिणाम बताते हैं कि माध्यमिक शिक्षा तक पहुंचने से पहले ही बड़ी संख्या में बच्चे नशे जैसी गंभीर समस्या की तरफ खिंचते जा रहे हैं।

इन शहरों में हुआ सर्वे

यह सर्वे दिल्ली, बेंगलुरु, हैदराबाद, पुणे, मुंबई, जयपुर, लखनऊ समेत कई शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों के सरकारी, निजी और ग्रामीण स्कूलों में कराया गया। अध्ययन 8वीं, 9वीं, 11वीं और 12वीं कक्षा के छात्रों पर आधारित था, जिसमें उनके व्यवहार, पारिवारिक वातावरण और नशे से संबंधित आदतों को समझने का प्रयास किया गया।

 

छात्रों से तंबाकू, शराब, भांग, नशीली गोलियां और अन्य पदार्थों के सेवन की आवृत्ति, पहली बार सेवन की उम्र और इसके पीछे की परिस्थितियों पर प्रश्न पूछे गए।15 प्रतिशत छात्रों ने स्वीकार किया कि उन्होंने जीवन में कम से कम एक बार किसी नशीले पदार्थ का सेवन किया है।वहीं, 10 प्रतिशत छात्रों ने बताया कि उन्होंने पिछले एक साल में नशे का उपयोग किया।

विशेषज्ञों की चेतावनी

रिपोर्ट बताती है कि भारतीय किशोरों में नशा शुरू करने की उम्र वैश्विक औसत से भी कम है। इससे विशेषज्ञों ने चिंता जताई है। शोधकर्ताओं का मानना है कि 12 वर्ष और उससे कम आयु में ही नशा-निवारण और जागरूकता कार्यक्रम शुरू किए जाने चाहिए, क्योंकि बच्चों के व्यवहार और सोच पर इसका सबसे अधिक प्रभाव इसी उम्र में पड़ता है। अध्ययन में 25% छात्रों ने बताया कि उनके घरों में कलह, तनाव या अस्थिर माहौल रहता है। ऐसे परिवेश में रहने वाले बच्चों में नशे की ओर झुकाव अधिक पाया गया।

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अध्ययनकर्ताओं के अनुसार, पारिवारिक तनाव, माता-पिता के बीच विवाद और सुरक्षित वातावरण की कमी बच्चों को गलत साथ, गलत गतिविधियों और नशीले पदार्थों की ओर धकेल सकती है। विशेषज्ञों ने यह भी चेतावनी दी है कि अगर इस आयु समूह में रोकथाम के उपाय मजबूत नहीं किए गए, तो भविष्य में किशोर नशा-लत के मामलों में बड़ी वृद्धि देखी जा सकती है।

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