सतीश शाह- अभिनेता सतीश शाह का किडनी फेलियर से निधन, क्यों बढ़ती जा रही है ये जानलेवा बीमारी

 

जाने भी दो यारों’, ‘मैं हूं ना’ जैसी फिल्मों और ‘साराभाई वर्सेस साराभाई’ जैसे टीवी शो में अपने किरदारों के लिए मशहूर दिग्गज अभिनेता सतीश शाह का शनिवार (25 अक्तूबर) को  निधन हो गया। वह 74 वर्ष के थे। रिपोर्ट के अनुसार, सतीश शाह किडनी संबंधी समस्याओं से जूझ रहे थे।

फिल्म निर्माता अशोक पंडित ने अपने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में बताया कि हमारे प्रिय मित्र और एक बेहतरीन अभिनेता, सतीश शाह का कुछ घंटे पहले किडनी फेल होने के कारण निधन हो गया। हाल ही में अभिनेता का किडनी ट्रांसप्लांट हुआ था।

 

मेडिकल रिपोर्ट्स के मुताबिक भारत में किडनी रोगियों की संख्या लगातार बढ़ रही है। एक अनुमान के मुताबिक देश की 10% से ज्यादा आबादी क्रोनिक किडनी डिजीज (सीकेडी) से पीड़ित है। अनियंत्रित डायबिटीज और उच्च रक्तचाप को इस बढ़ती दर के लिए प्रमुख रूप से जिम्मेदार माना जाता रहा है।

आइए जानते हैं कि किडनी की समस्या क्यों इतनी तेजी से बढ़ती जा रही है और इससे बचाव के लिए क्या उपाय किए जा सकते हैं?

 

किडनी की बीमारियों का खतरा

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, हमारी खराब जीवनशैली के कारण किडनी की सेहत पर गंभीर रूप से असर देखा जा रहा है। किडनी खून को फिल्टर करके शरीर से विषैले तत्व, अतिरिक्त सोडियम और पानी को बाहर निकालती हैं। लेकिन जब यही किडनी धीरे-धीरे अपनी क्षमता खोने लगती है और समय रहते इसपर ध्यान न दिया जाए तो इससे किडनी फेलियर का खतरा हो सकता है।

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अनियमित दिनचर्या, असंतुलित खानपान, दवाओं का गलत इस्तेमाल और ब्लड प्रेशर-डायबिटीज जैसी बीमारियों ने इसके खतरे को और भी बढ़ा दिया है।

कई बार लोग किडनी की बीमारी के शुरुआती लक्षणों जैसे पैरों में सूजन, थकान, बार-बार पेशाब आने या भूख कम लगने को अनदेखा कर देते हैं। हालांकि ये संकेत धीरे-धीरे गंभीर समस्याओं यहां तक कि किडनी फेलियर का खतरा बढ़ाने वाले हो सकते हैं।

 

ब्लड प्रेशर का लगातार बढ़ा रहना नुकसानदायक

लगातार हाई ब्लड प्रेशर किडनी फेलियर की सबसे बड़ी वजहों में से एक है। जब ब्लड प्रेशर ज्यादा रहता है, तो किडनी की छोटी-छोटी रक्त नलिकाओं पर दबाव बढ़ जाता है। इससे ये नलिकाएं धीरे-धीरे कमजोर और क्षतिग्रस्त होने लगती हैं। ब्लड प्रेशर लगातार बढ़े रहने से किडनी का फिल्टर सिस्टम प्रभावित हो जाता है।

डॉक्टर्स बताते हैं कि भारत में करीब 35% किडनी फेलियर के केस हाई ब्लड प्रेशर से जुड़े होते हैं। इससे बचाव के लिए ब्लड प्रेशर को कंट्रोल रखना जरूरी है।

 

डायबिटीज के कारण भी होता है जोखिम

ब्लड प्रेशर की ही तरह से अक्सर शुगर लेवल हाई रहने के कारण भी किडनी रोग या फेलियर का जोखिम हो सकता है। लगभग 40% डायबिटीज मरीजों को आगे चलकर किसी न किसी स्तर की किडनी की समस्या होती है।

खून में शुगर का स्तर लगातार बढ़ा रहना, किडनी को धीरे-धीरे नुकसान पहुंचाने लगता है। ज्यादा ग्लूकोज के कारण किडनी के नेफ्रॉन्स पर दबाव पड़ता है, जिससे वे कमजोर होकर सही तरह से फिल्टर नहीं कर पाते। लंबे समय तक ऐसा रहने से डायबिटिक नेफ्रोपैथी नामक बीमारी होती है, जो किडनी फेलियर में बदल सकती है।

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किडनी को क्षति पहुंचाने वाली इन स्थितियों को भी जानिए

  • दर्द या बुखार में बार-बार पेनकिलर या एंटीबायोटिक्स लेते रहते हैं तो भी सावधान हो जाइए। इन दवाओं के अधिक इस्तेमाल के कारण भी किडनी से संबंधित गंभीर बीमारी होने का खतरा हो सकता है।
  • एक अध्ययन के अनुसार, 10 में से 2 किडनी फेलियर केस में दवाइयों का अधिक इस्तेमाल एक कारण हो सकता है।
  • अगर पेशाब में बार-बार जलन, दर्द या संक्रमण होता है तो ये संक्रमण किडनी तक पहुंच सकता है। कुछ स्थितियों में इससे भी किडनी फेलियर का खतरा रहता है।
  • ज्यादा नमक, तला-भुना, प्रोसेस्ड फूड और कम पानी पीना भी किडनी पर बोझ डालता है। ये आदतें ब्लड प्रेशर और शुगर दोनों को बढ़ाती हैं, जिससे किडनी फेलियर का खतरा बढ़ जाता है। इसके अलावा, नींद की कमी, धूम्रपान और शराब भी किडनी की कार्यक्षमता को घटाते हैं।

नोट- यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।

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