आस्था, सेवा और रसिक उपासना परंपरा के प्रमुख केंद्र सियाराम किला झुनकी घाट में पूर्वाचार्यों की पुण्यतिथि श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाई गई। किला के द्वितीय आचार्य महंत मिथिला शरण एवं तृतीय आचार्य महंत किशोरी शरण का पुण्य स्मरण विशेष पूजा-अर्चना और धार्मिक अनुष्ठानों के बीच संपन्न हुआ।
यह एक अद्भुत संयोग रहा कि गुरु और शिष्य, दोनों ही आचार्यों का साकेतवास वैशाख कृष्ण अष्टमी की तिथि पर हुआ था। महंत मिथिला शरण का देहावसान 36 वर्ष पूर्व और महंत किशोरी शरण का 27 वर्ष पूर्व इसी पावन तिथि को हुआ था। इस आध्यात्मिक तादात्म्य को स्मरण करते हुए श्रद्धालुओं ने भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। वर्तमान महंत करुणा निधान शरण के संयोजन में सरयू तट स्थित मंदिर परिसर में सुबह से ही विशेष पूजन, अभिषेक और भजन-कीर्तन का आयोजन हुआ। पूरा परिसर आध्यात्मिक वातावरण से सराबोर रहा, जहां संत-महात्माओं और श्रद्धालुओं की बड़ी संख्या ने उपस्थित होकर आचार्यों के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त की। पुण्य स्मरण कार्यक्रम में निर्वाणी अनी के महंत मुरलीदास, हनुमानगढ़ी के सरपंच महंत रामकुमार दास, महंत गौरी शंकर दास, पुजारी हेमंत दास, महामंडलेश्वर गिरीश दास , महंत रामलोचनशरण, महंत रामदास त्यागी, महंत राम नरेश शरण सहित हजारों की संख्या में संत-धर्माचार्य मौजूद रहे।






