करीब 14 महीने का इंतजार। लंबी प्रतीक्षा, आरोपियों के प्रायश्चित, फांसी और उम्रकैद के फैसले ने कई दौर देखे। बृहस्पतिवार को पीड़ित परिवार की लंबे समय से चली आ रही न्याय की प्रतीक्षा पूरी हो गई। फैसला सुनते ही पिता ने कहा… सच में कानून का राज है। बेटे की आत्मा को अब जाकर शांति मिलेगी। परिवार के सभी सदस्यों की आंखें नम हो गईं।
फैसला सुनते ही दिवंगत रामगोपाल की मां मुन्नी देवी खुद पर काबू नहीं रख सकीं। उन्होंने कांपती आवाज में कहा… भगवान का लाख लाख शुक्र है। मेरे बेटे को आज न्याय मिल गया। यह कहते-कहते उनकी आंखों से आंसू टपक पड़े। न्याय की आस आज पूरी हुई।
भगवान के घर देर है, अंधेर नहीं
भाई हरमिलन मिश्रा भी फैसले के बाद भावुक हुए
इलाके में बढ़ाई गई सुरक्षा, पुलिस ने रातभर की गश्त
फैसला सिर आंखों पर, पति को मिला न्याय
फैसले पर अभियोजन व बचाव पक्ष अभियोजन
रामगोपाल मिश्रा के जघन्य हत्याकांड में बृहस्पतिवार को कोर्ट का फैसला सराहनीय है। कोर्ट ने पीड़ित पक्ष के दर्द को सुनकर अपना फैसला सुनाते हुए न्याय दिलाया है। ऐसे अपराधियों को इस तरह की घटना घटित करने पर कड़ी कार्रवाई का भी संदेश दिया है। यह फैसला नजीर बनेगा।
बचाव
आत्मरक्षा के मामले की घटना को हत्या में दर्शाया गया। इंसाफ नहीं हुआ है। ऐसे मामलों की हाईकोर्ट मॉनिटरिंग करता है। हमें पूरी उम्मीद है कि हाईकोर्ट सभी सजा पाए लोगों के साथ न्याय करेगा।
बेहोश हुई बहन परिजन भी रोए
बहराइच के सिविल कोर्ट में बृहस्पतिवार देर शाम रामगोपाल हत्याकांड में फैसला सुनाए जाने के बाद अदालत परिसर में एक तरफ उदासी थी, तो दूसरी तरफ उल्लास। पीड़ित पक्ष ने न्याय मिलने पर संतोष जताया। इस बीच दोषी पक्ष में मातम जैसा माहौल रहा। अदालत ने जैसे ही मोहम्मद सरफराज उर्फ रिंकू को फांसी की सजा सुनाई, वैसे ही परिसर में मौजूद उसकी बहन बेहोश होकर जमीन पर गिर पड़ी। आसपास मौजूद लोगों ने उसे होश में लाने की कोशिश की। यह देख सरफराज के दूसरे भाई, बहन और पिता फफक पड़े।
कोर्ट के बाहर पीड़ित परिवार ने फैसले पर संतोष जताया, वहीं दोषी पक्ष में गहरी उदासी छाई रही। अदालत से सजा सुनाए जाने के बाद सभी दोषियों को पीछे के दरवाजे से पुलिस वैन की ओर भेजा गया। इस दौरान माहौल बेहद गमगीन रहा।
रामगोपाल हत्याकांड में सरफराज को फांसी की सजा, नौ को उम्रकैद
बहराइच के चर्चित रामगोपाल हत्याकांड में बृहस्पतिवार को प्रथम अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने मोहम्मद सरफराज को फांसी की सजा सुनाई। मामले में दोषी अब्दुल हमीद, मोहम्मद फहीम, सैफ अली, मोहम्मद तालिब, जावेद खान, मोहम्मद जीशान, शोएब खान, ननकऊ व मारूफ को आजीवन कठोर कारावास से दंडित किया। सभी दोषियों पर अलग-अलग अर्थदंड भी लगाया गया है। फैसले के दौरान कचहरी परिसर का बाहरी इलाका पुलिस छावनी में तब्दील रहा।
महसी तहसील क्षेत्र के महराजगंज में 13 अक्तूबर 2024 को दुर्गा प्रतिमा विसर्जन के दौरान विवाद शुरू हुआ। इस दौरान रेहुआ मंसूर गांव निवासी रामगोपाल मिश्रा की जघन्य हत्या कर दी गई। घटना के बाद पूरे जिले में तनाव बढ़ा। महसी क्षेत्र में दंगा शुरू हो गया। हालात नियंत्रित करने के लिए कर्फ्यू लगाना पड़ा। दंगाइयों को देखते ही गोली मारने के आदेश हुए। इंटरनेट सेवा भी बाधित करनी पड़ी।
करीब एक सप्ताह तक हालात खराब रहे। मामले में हरदी एसओ सुरेश कुमार वर्मा व महसी चौकी इंचार्ज शिव कुमार सरोज को निलंबित किया गया था। रामगोपाल के परिजनों की तहरीर पर हरदी पुलिस ने 13 अक्तूबर को ही फहीम, सरफराज उर्फ रिंकू, मोहम्मद तालिब उर्फ सबलू, सैफ अली, जावेद खान, मोहम्मद जीशान उर्फ राजा, शोएब खान, ननकऊ, खुर्शीद, शकील अहमद उर्फ बबलू, मोहम्मद अफजल उर्फ कल्लू को नामजद किया।
पिता के सामने बेटे को सजा, डबडबाई आंखें
हत्या, आगजनी और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के मुख्य आरोपी अब्दुल हमीद के तीन बेटे सरफराज, मोहम्मद फहीम, मोहम्मद तालिब वारदात में शामिल पाए गए। न्यायालय ने बृहस्पतिवार को जब सरफराज को फांसी की सजा सुनाई, उस समय अब्दुल हमीद और उसके दोनों बेटे फहीम व तालिब पास ही खड़े थे। सजा सुनते ही तीनों की आंखें भर आईं।







