भारत-कनाडा के बीच ऐतिहासिक आर्थिक समझौता, यूरेनियम और परमाणु सहयोग पर क्या खास? जानिए…

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वैश्विक स्तर पर चल रही उथल-पुथल और पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच, भारत ने कूटनीतिक और आर्थिक मोर्चे पर एक बड़ा कदम उठाया है। एक ओर जहां भू-राजनीतिक संकट ने बाजारों को झकझोर कर रख दिया है, वहीं भारत और कनाडा के बीच ऊर्जा, व्यापार और रणनीतिक खनिजों को लेकर ऐतिहासिक समझौते हुए हैं। इन समझौतों के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पश्चिम एशिया के हालात पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए देशवासियों को सुरक्षा का पूरा भरोसा दिलाया है। भारत और कनाडा ने यूरेनियम पर एक ऐतिहासिक समझौते पर भी हस्ताक्षर किए हैं।

 

पश्चिम एशिया संकट पर पीएम का कड़ा संदेश
कनाडाई प्रधानमंत्री कार्नी के साथ द्विपक्षीय वार्ता के बाद, पीएम मोदी ने साफ किया कि मानवता की भलाई भारत और कनाडा का साझा दृष्टिकोण है। वैश्विक अस्थिरता का जिक्र करते हुए पीएम ने कहा कि भारत विश्व में शांति और स्थिरता चाहता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि पश्चिम एशिया की वर्तमान स्थिति भारत के लिए गहरी चिंता का विषय है और देश बातचीत के जरिए सभी मुद्दों के समाधान का पक्षधर है। युद्ध के बढ़ते जोखिम के बीच प्रधानमंत्री ने स्पष्ट आश्वासन दिया कि सरकार अपने नागरिकों की सुरक्षा के लिए हर जरूरी कदम उठाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

भारत-कनाडा के बीच ऐतिहासिक आर्थिक और ऊर्जा समझौते
भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के बीच अपनी अर्थव्यवस्था की रक्षा करने के लिए भारत ने कनाडा के साथ अपनी रणनीतिक भागीदारी को मजबूत किया है। दोनों देशों के बीच हुए प्रमुख समझौते इस प्रकार हैं:

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    • यूरेनियम और परमाणु सहयोग: कनाडाई पीएम कार्नी के साथ वार्ता के बाद पीएम मोदी ने बताया कि भारत और कनाडा ने यूरेनियम पर एक ऐतिहासिक समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। इसके अलावा, नागरिक परमाणु सहयोग को आगे बढ़ाते हुए दोनों देश छोटे मॉड्यूलर रिएक्टरों पर एक साथ मिलकर काम करेंगे।
  • क्रिटिकल मिनरल्स: भविष्य की तकनीकी और औद्योगिक आपूर्ति शृंखला को सुरक्षित करने के लिए, भारत और कनाडा ने महत्वपूर्ण खनिज क्षेत्र  में सहयोग के लिए एक अहम समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं।

नवीकरणीय ऊर्जा: स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाते हुए, दोनों देशों ने नवीकरणीय ऊर्जा के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए एक समझौता ज्ञापन पर मुहर लगाई है।
व्यापक आर्थिक व्यापार समझौता :व्यापारिक संबंधों को नई ऊंचाई देने के लिए भारत और कनाडा ने ‘व्यापक आर्थिक भागीदारी समझौते’ के लिए ‘टर्म्स ऑफ रेफरेंस’  दस्तावेज को अंतिम रूप दे दिया है। पीएम मोदी के अनुसार, दोनों देशों ने इस व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते को जल्द ही अंतिम रूप देने का फैसला किया है।

कनाडा के साथ समझौतों का कैसे मिलेगा फायदा?
कनाडा के साथ हुए ये समझौते भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए गेम-चेंजर साबित हो सकते हैं। यूरेनियम और नवीकरणीय ऊर्जा पर हुए समझौतों से भारत के पावर और एनर्जी सेक्टर को भारी बूस्ट मिलेगा, जिससे ऊर्जा के क्षेत्र में देश की आत्मनिर्भरता बढ़ेगी। वहीं, क्रिटिकल मिनरल्स समझौता भारत के उभरते इलेक्ट्रिक वाहन और आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर के लिए कच्चे माल की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करेगा। एक ओर जहां पश्चिम एशिया का संकट वैश्विक आपूर्ति शृंखला और बाजारों में अनिश्चितता पैदा कर रहा है, वहीं दूसरी ओर भारत सरकार कूटनीतिक स्तर पर अपनी अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में जुटी है।

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