राममंदिर चढ़ावा चोरी: आरोपियों ने भक्तों के पैसों से उड़ाई मौज, गर्लफ्रेंड को भेजे लाखों आईफोन किया गिफ्ट

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राममंदिर चढ़ावा चोरी के करोड़ों रुपये पार कर आरोपियों ने खूब मौज की। अविनाश शुक्ला ने खुद तो मकान बनवाने के साथ गाड़ी खरीदी ही अपनी गर्लफ्रेंड को भी दो लाख रुपये ट्रांसफर किए। यही नहीं आईफोन भी गिफ्ट किया। ये सब उसने किया जिसकी सैलरी महज 15 हजार महीना था। इसका खुलासा पुलिस की तफ्तीश में हुआ है। आरोपियों ने रकम कहां कहां छिपाई और कहां खपाई, इसका पूरा ब्योरा पुलिस जुटा रही है।

सूत्रों के मुताबिक पुलिस ने सभी आरोपियों के बैंक खातों का विवरण निकलवाया है। यही नहीं उनके परिवारीजनों के खातों की भी डिटली खंगाली गई है। जिसमें अनियमितताएं मिली हैं। जिससे ये साबित होता है कि हेरफेर कर गबन की राशि को इधर से उधर किया गया। इसमें अविनाश का खता शामिल है। जिससे पता चला कि दो लाख रुपये उसने एक खाते में भेजे हैं। वह खाता उसकी महिला मित्र का निकला। उसके बयान लेकर पुलिस साक्ष्यों को जुटा रही है। इसी तरह से अन्य आरोपियों ने इस रकम से तमाम चीजें खरीदीं और लोगों को पेमेंट किए। अचानक इतना रकम कहां से आया, इसका कोई जवाब आरोपियों के पास नहीं है, इसकी वजह यही है कि रकम चढ़ावा चोरी की है।
बैंक की लापरवाही, रकम कहां जमा होगी, ये भी तय नहीं
चोरी के पीछे बड़ी लापरवाही बैंक की भी रही। ये बात पहले ही सामने आ चुकी है। अब पता चला है कि जिस एसबीआई की बैंक की अयोध्या धाम शाखा में जब चढ़ावे की रकम जमा की जाती तो कई बार ऐसा हुआ कि वह रकम रखने की जगह ही नहीं थी। तब आनन-फानन में बैंक अधिकारी रकम को अन्य शाखाओं में भेजते थे। इतनी बड़ी रकम को लेकर इस तरह की लापरवाही भी बरती जाती थी।
क्या किसी नेता से भी है कनेक्शन…
चोरी के मामले में एक चर्चा ये भी कि कुछ आरोपी राजनीतिक दलों के बड़े नेताओं से भी जुड़े थे। इन स्थानीय नेताओं से टिन्नू व एक दो अन्य की लगातार बातचीत होती रहती थी। इनमें से एक ने नेता तक चोरी की सूचना पहुंचाई, जिससे बड़ा बवाल हो। लेकिन, उसको ये पता नहीं था कि वह खुद फंस जाएगा। हालांकि ये सिर्फ चर्चा है किसी भी तरह से इसकी पुष्टि नहीं है।

टिन्नू ही नहीं, अनुकल्प भी था चंपत राय का भरोसेमंद

 राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में आरोपी रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू ही नहीं, अनुकल्प मिश्रा भी ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय का करीबी था। सोशल मीडिया से सामने आए दस्तावेज और तस्वीरें बताती हैं कि वह उनके भरोसेमंद लोगों में से एक था। इसी वजह से विभिन्न अवसरों पर उसे महत्वपूर्ण दायित्व सौंपे जाते थे।

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राम मंदिर में चढ़ावा चोरी का मामला छह जून को सार्वजनिक हुआ था। इसमें चंपत राय के करीबी रहे टिन्नू यादव की भूमिका सर्वाधिक बताई जा रही थी लेकिन चोरी के मामले में अब जांच एजेंसियां अनुकल्प मिश्रा को भी मास्टरमाइंड मान रही हैं। अनुकल्प भी चंपत राय के काफी नजदीक और भरोसेमंद लोगों में से एक बन गया था। इसी के सोशल मीडिया पर पड़ी तस्वीरें और कुछ कागजात इसकी गवाही देते हैं।

इसके अनुसार श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के वर्ष प्रतिपदा समारोह में उसे व्यवस्था कार्यकर्ता के रूप में प्रवेश पत्र मिला था। वहीं, दीपावली का भी एक प्रवेश पत्र सामने आया है, जो 31 अक्तूबर, 2024 तक वैध था। इससे ट्रस्ट के आयोजनों में उसकी सक्रिय भूमिका और जिम्मेदारी का अंदाजा लगाया जा सकता है। इतना ही नहीं, अनुकल्प के आवास पर आयोजित कथा में भी चंपत राय की मौजूदगी रही।

कार्यक्रम के मंच पर अनुकल्प ने कई भाजपा नेताओं और जनप्रतिनिधियों के साथ तस्वीरें खिंचवाई थीं। राम मंदिर में आयोजित कार्यक्रमों में भी उसकी इन्हीं लोगों के साथ कई तस्वीरें दिखी हैं। सोशल मीडिया पर वायरल ये तस्वीरें उसकी नजदीकियों को लेकर चर्चाओं को और हवा दे रही हैं। उधर, सोशल मीडिया पर उपलब्ध तस्वीरों में अनुकल्प जिला पंचायत अध्यक्ष प्रतिनिधि रोहित सिंह, महापौर महंत गिरीश पति त्रिपाठी, विधायक चंद्रभानु पासवान, जिलाध्यक्ष भाजपा राधेश्याम त्यागी, भाजपा नेता खुन्नू पांडेय आदि के साथ दिखाई दे रहा है।

इनमें सबसे ज्यादा तस्वीरें भाजपा नेता रोहित सिंह के साथ की हैं। हालांकि, अधिकारियों के अनुसार किसी सार्वजनिक कार्यक्रम में किसी भी प्रतिष्ठित व्यक्ति के साथ तस्वीर होना आम है। इसे किसी की किसी प्रकार की संलिप्तता का प्रमाण नहीं माना जा सकता।

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गिरफ्तारी के बाद खंगाले जा रहे पुराने रिश्ते
चढ़ावा चोरी मामले में गिरफ्तारी के बाद अनुकल्प से जुड़े पुराने फोटो, पोस्ट और सार्वजनिक कार्यक्रमों की तस्वीरों को पहले सामान्य राजनीतिक और सामाजिक सक्रियता का हिस्सा माना जाता था। अब वही जांच और सार्वजनिक चर्चा का विषय बन गई हैं। हालांकि, जांच एजेंसियां केवल उपलब्ध साक्ष्यों और तथ्यों के आधार पर ही मामले की जांच आगे बढ़ा रही है। आरोपी के पुराने रिश्ते भी खंगाले जा रहे हैं।


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