राजस्थान: स्कूल की छत का प्लास्टर गिरा, तीन बच्चे घायल, जर्जर भवन पर लगा ताला

राजस्थान के उदयपुर जिले के भींडर क्षेत्र में मंगलवार को सरकारी स्कूल में बड़ा हादसा हो गया। वाणियातलाई ग्राम पंचायत के राजकीय प्राथमिक विद्यालय नारदा में कक्षा के दौरान छत का प्लास्टर अचानक भरभराकर नीचे गिर गया। हादसे के समय कमरे में करीब 32 बच्चे मौजूद थे। प्लास्टर की चपेट में आने से तीन बच्चे घायल हो गए, जबकि दो बच्चों को मामूली चोटें आईं।

घायल बच्चों में पहली कक्षा की छात्रा कृष्णा कुमारी, कार्तिक और पांचवीं कक्षा के छात्र गणेशलाल शामिल हैं। तीनों के सिर में चोट लगी। हादसे के तुरंत बाद उन्हें भींडर के सरकारी अस्पताल ले जाया गया। उपचार के बाद सभी बच्चों को घर भेज दिया गया।

तेज आवाज के साथ गिरा प्लास्टर, बच्चों में मची अफरा-तफरी

हादसे के समय अलग-अलग कक्षाओं के बच्चे एक ही कमरे में पढ़ाई कर रहे थे। इसी दौरान अचानक तेज आवाज के साथ छत का प्लास्टर नीचे आ गिरा। इससे कमरे में मौजूद बच्चों में अफरा-तफरी मच गई। शिक्षकों और ग्रामीणों ने घायल बच्चों को तत्काल अस्पताल पहुंचाया।

स्कूल के प्रधानाध्यापक लालसिंह शक्तावत ने बताया कि विद्यालय में पहली से पांचवीं तक की कक्षाएं संचालित होती हैं और कुल 37 बच्चे नामांकित हैं। उन्होंने बताया कि स्कूल भवन की जर्जर स्थिति को लेकर शिक्षा विभाग को पहले ही सूचना दी जा चुकी थी।

 

जर्जर भवन पर लगाया ताला, अब दूसरी जगह होंगी कक्षाएं

हादसे के बाद शिक्षा विभाग और स्थानीय प्रशासन के निर्देश पर एहतियात के तौर पर स्कूल भवन को बंद कर दिया गया है। भवन के मुख्य द्वार पर ताला लगा दिया गया है। अब बच्चों की कक्षाएं माताजी के चबूतरे के पास दूसरी जगह संचालित की जाएंगी।
विद्यालय भवन में दो कमरे और एक बरामदा है। ग्रामीणों का कहना है कि भवन लंबे समय से जर्जर हालत में है। इसकी मरम्मत को लेकर कई बार शिकायत की गई, लेकिन समय रहते कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।

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2001 में बना था स्कूल भवन, गुणवत्ता पर उठे सवाल

प्रधानाध्यापक के अनुसार, स्कूल भवन का निर्माण वर्ष 2001 में हुआ था। ग्रामीणों ने भवन की गुणवत्ता पर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि स्कूल के सभी कमरे और बरामदा जर्जर स्थिति में हैं। ग्रामीणों ने प्रशासन से जल्द नया भवन बनाने या बच्चों के लिए स्थायी सुरक्षित व्यवस्था करने की मांग की है।
घटना की सूचना मिलने के बाद मुख्य ब्लॉक शिक्षा अधिकारी (सीबीईओ) भींडर राजेंद्र कुमार चौबीसा भी मौके पर पहुंचे। उन्होंने घटनास्थल का निरीक्षण कर हादसे की जानकारी ली।

हादसे के बाद अभिभावकों और ग्रामीणों में नाराजगी

घटना के बाद बच्चों के अभिभावकों और ग्रामीणों में आक्रोश है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते जर्जर भवन की मरम्मत कराई जाती या बच्चों के लिए वैकल्पिक व्यवस्था की जाती तो हादसे को टाला जा सकता था।
गनीमत रही कि इस दौरान पूरी छत नहीं गिरी। अगर छत का बड़ा हिस्सा नीचे गिरता तो हादसा और गंभीर हो सकता था।

झालावाड़ के दर्दनाक हादसे की आई याद

नारदा के सरकारी स्कूल में हुए हादसे ने पिछले साल झालावाड़ में हुए दर्दनाक हादसे की याद ताजा कर दी। 25 जुलाई 2025 को मनोहरथाना ब्लॉक के पिपलोदी स्थित सरकारी स्कूल में भवन का हिस्सा गिरने से सात बच्चों की मौत हो गई थी, जबकि कई बच्चे घायल हुए थे।

 

उस हादसे के समय बच्चे कक्षा में बैठे थे। छत का हिस्सा गिरने से करीब 35 बच्चे मलबे में दब गए थे। उदयपुर के नारदा स्कूल में हुए हादसे के बाद एक बार फिर जर्जर सरकारी स्कूल भवनों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं।

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