PM बोले- नारी अपमान नहीं भूलती, विपक्ष को सजा मिलेगी, खरगे ने संबोधन को तथ्यों से परे बताया

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पीएम के संबोधन पर कपिल सिब्बल का सवाल

प्रधानमंत्री मोदी के राष्ट्र संबोधन को लेकर राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल ने सवाल उठाए हैं। सिब्बल ने कहा कि उन्हें यह समझ नहीं आया कि पीएम प्रधानमंत्री के रूप में बोल रहे थे या संसद में भाजपा के नेता के तौर पर। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय ध्वज के सामने खड़े होकर चुनाव के दौरान इस तरह का भाषण देना भारतीय राजनीति का नया निम्न स्तर है। सिब्बल ने यह भी आरोप लगाया कि इस मामले में चुनाव आयोग या अन्य संस्थाएं कोई कार्रवाई नहीं करेंगी।

 

 

कांग्रेस अध्यक्ष खरगे बोले- पीएम मोदी का बयान तथ्यों से परे

नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के राष्ट्र संबोधन को लेकर कांग्रेस ने तीखा हमला बोला है। खरगे ने कहा पीएम का संबोधन तथ्यों से परे है। साथ ही ये आरोप लगाया कि पीएम ने सरकारी मंच का इस्तेमाल राजनीतिक भाषण के लिए किया और विपक्ष पर बेबुनियाद आरोप लगाए। कांग्रेस ने कहा कि प्रधानमंत्री ने अपने भाषण में महिलाओं के मुद्दों से ज्यादा पार्टी राजनीति पर ध्यान दिया। पार्टी का दावा है कि महिला आरक्षण पर कांग्रेस का रुख हमेशा स्पष्ट रहा है और उसने 2010 में राज्यसभा में बिल पास कराया था तथा 2023 के कानून का भी समर्थन किया। कांग्रेस ने मांग की कि मौजूदा 543 लोकसभा सीटों में ही 33 प्रतिशत महिला आरक्षण तुरंत लागू किया जाए। साथ ही परिसीमन और महिला आरक्षण को अलग रखने की बात कही। पार्टी ने सरकार पर महिलाओं के मुद्दों पर विफल रहने और देश को गुमराह करने का आरोप भी लगाया।

 देश की 100 फीसदी नारी शक्ति का आशीर्वाद हमारे पास है- पीएम मोदी

पीएम मोदी ने आगे कहा कुछ लोग इस विधेयक के गिरने को सरकार की नाकामी बता रहे हैं। लेकिन यह उसका मुद्दा नहीं है। मैंने संसद में कहा था कि यह विधेयक पारित हो जाने दीजिए, मैं विज्ञापन छपवाकर विपक्ष को इसका क्रेडिट दे दूंगा। लेकिन दकियानूसी विचार वाले अपनी बातों और विरोध पर अड़े रहे।

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आज आप सब दुखी हैं। मैं भी आपके इस दुख में दुखी हूं। आज भले ही बिल पास कराने के लिए जरूरी 66 प्रतिशत वोट हमें नहीं मिला है। लेकिन मैं जानता हूं कि देश की 100 फीसदी नारी शक्ति का आशीर्वाद हमारे पास है। मैं विश्वास दिलाता हूं कि हम महिला आरक्षण के रास्ते में आने वाले हर रुकावट को खत्म कर के रहेंगे। हमारा हौसला भी बुलंद है। हमारी हिम्मत भी अटूट है और हमारा इरादा भी अडिग है। महिला आरक्षण का विरोध करने वाली पार्टियां, ये देश की नारी शक्ति को संसद और विधानसभा में उनकी भागीदारी बढ़ाने से रोक नहीं पाएंगी। सिर्फ वक्त का इंतजार है। भाजपा, एनडीए का संकल्प अक्षुण है। कल हमारे पास संख्याबल नहीं था, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि हम हार गए। हमारा आत्मबल अजेय है। हमारा प्रयास रुकेगा नहीं, हमारा प्रयास थमेगा नहीं। हमारे पास आगे अभी और मौके आएंगे। हमें आधी आबादी के लिए इस संकल्प को पूरा करना ही है।

कांग्रेस ने पाकिस्तान के साथ पानी विवाद को लटकाया- पीएम मोदी

आजादी के दौर में कई और देश हमारे साथ आजाद हुए थे, वे देश हमसे आगे निकल गए। कांग्रेस ने देश के सीमा विवादों को लटकाया। पाकिस्तान के साथ पानी विवाद को लटकाया। सैनिकों के लिए वन रैंक वन पेंशन को रोके रखा। ओबीसी के आरक्षण को लटाकाया। कांग्रेस के हर छल, प्रपंच का खामियाजा देश की पीढ़ियों ने भुगता है। आज देश के सामने जितनी भी बड़ी चुनौतियां हैं, वह कांग्रेस के इसी रवैये से उपजी हैं। यह लड़ाई सिर्फ एक कानून की नहीं है। यह लड़ाई कांग्रेस की उसी एंटी रिफॉर्म विचार से है। मुझे कोई संदेह नहीं है कि देश की माताएं-बहनें कांग्रेस की इस मानसिकता का जवाब देकर रहेंगी।

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कांग्रेस देश से घुसपैठियों को भगाने का विरोध करती है- पीएम मोदी

कांग्रेस वन नेशन, वन इलेक्शन का विरोध करती है, कांग्रेस देश से घुसपैठियों को भगाने का विरोध करती है, कांग्रेस मतदाता सूची के शुद्धिकरण (एसआईआर) का विरोध करती है। कांग्रेस ने सीएए कानून तक का विरोध किया और देश में झूठी बातें फैलाकर बवंडर खड़ा कर दिया। कांग्रेस का एक ही पैटर्न रहा है- कोई भी रिफॉर्म आए, झूठ बोलो और भ्रम फैलाओ। कांग्रेस ने यही नेगेटिव रास्ता चुना है। जो भी कार्य देश के लिए जरूरी फैसला होता है, कांग्रेस उसे कारपेट के नीचे डाल देती है। कांग्रेस के इस रवैये की वजह से भारत विकास की उस ऊंचाई तक नहीं पहुंच पाया, जिसका भारत हकदार है

रिफॉर्म का नाम सुनते ही कांग्रेस विरोध की तख्ती लेकर दौड़ पड़ती है- पीएम मोदी

कांग्रेस ने एक बार फिर महिला शक्ति विधेयक का विरोध कर के एक बात सिद्ध कर दी है। यह एंटी-रिफॉर्म पार्टी है। जो भी निर्णय देश के लिए जरूरी हैं और जो निर्णय देश ले रहा है, कांग्रेस उसका विरोध करती है, उसे खारिज कर देती है या खलल डालती है। यही कांग्रेस का इतिहास है और यही कांग्रेस की नेगेटिव राजनीति है। यह वही कांग्रेस है जिसने जनधन, मोबाइल और स्त्री शक्ति का विरोध किया। कांग्रेस ने डिजिटल पेमेंट्स का विरोध किया, जीएसटी का विरोध किया, ईडब्ल्यूएस आरक्षण का विरोध किया। अनुच्छेद 370 हटाने का विरोध किया। जिस समान नागरिक संहिता को हमारे कोर्ट जरूरी बताते हैं कांग्रेस उसका भी विरोध करती है। रिफॉर्म का नाम सुनते ही कांग्रेस विरोध की तख्ती लेकर दौड़ पड़ती है।

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विपक्ष हमेशा से कुतर्क गढ़ता आया है- पीएम मोदी

कांग्रेस, सपा, डीएमके और टीएमसी हर बार वही बहाने, वही कुतर्क गढ़ते आए हैं। कोई न कोई तकनीकी पेच फंसाकर ये महिलाओं के अधिकारों पर डाका डालते रहे हैं। देश राजनीति का यह भद्दा पैटर्न बराबर समझ चुका है। और इसके पीछे की वजह भी जान चुका है। नारी शक्ति वंदन विधेयक के विरोध की एक बड़ी वजह है इन परिवारवादी पार्टियों का डर। इन्हें डर है है कि अगर महिलाएं सशक्त हो गईं तो इनका नेतृत्व खतरे में पड़ जाएगा। यह कभी नहीं चाहेंगे कि इनके परिवार के बाहर की महिलाएं आगे बढ़ें।

विपक्ष ने महिलाओं के पक्ष में खड़े होने का अवसर खो दिया- पीएम मोदी

मुझे व्यक्तिगत तौर पर आशा थी कि कांग्रेस अपनी दशकों पुरानी गलती सुधारेगी। कांग्रेस अपने पापों का प्रायश्चित करेगी। लेकिन कांग्रेस ने इतिहास रचने का, महिलाओं के पक्ष में खड़े होने का अवसर खो दिया। कांग्रेस खुद देश के अधिकांश विषयों में अपना वजूद खो चुकी है। कांग्रेस परजीवी की तरह क्षेत्रीय दलों की पीठ पर सवार होकर खुद को जिंदा रखे हुए है। लेकिन कांग्रेस यह भी नहीं चाहती कि क्षेत्रीय दलों की ताकत बढ़े। इसलिए कांग्रेस ने इस संशोधन का विरोध करवाकर अनेक क्षेत्रीय दलों के भविष्य को अंधकार में धकेलने का षड़ंयत्र किया है।


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