PM मोदी: आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का 75वां जन्मदिन, जनसेवक, प्रधान सेवक से कामदार तक…हर शब्द से हुए जनता के करीब

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने राजनीतिक जीवन के शुरुआती समय से ही सेवा भाव को सबसे ऊपर रखा। गुजरात के मुख्यमंत्री रहते जनता को यह याद दिलाना नहीं भूलते कि वह जनसेवक हैं। उनकी कोई व्यक्तिगत महत्वाकांक्षा नहीं है, बल्कि सत्ता तो उनके लिए सेवा का अवसर है। देश के प्रधानमंत्री का पद संभाला तो खुद को प्रधान सेवक कहना पसंद किया।

नामदार बनाम कामदार की सियासत ने उन्हें आम नागरिकों के बीच ऐसे प्रधानमंत्री के तौर पर स्थापित कर दिया, जो सिर्फ सियासी वादे नहीं बल्कि उन पर अमल भी करते हैं। पीएम मोदी ऐसे नेता बन चुके हैं, जिनकी एक आवाज पर गरीब, किसान, युवा और महिलाएं सब एकजुट हो जाते हैं। उनके भाषणों ने आम लोगों में राष्ट्र गौरव और संस्कृति के सम्मान की अलख जगाई।

आखिर, उनके शब्दों में इतनी ताकत कहां से आई? इसका सीधा-सा जवाब है, इनका सरल और सहज होना जो न सिर्फ आम लोगों को आसानी से समझ आते हैं बल्कि उनके मानस में अटल छाप भी छोड़ देते हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन के मौके पर उनके ऐसे ही कुछ बयान-वक्तव्य, जो जनता से उनकी करीबी बढ़ाते रहे हैं।

सामाजिक एकजुटता की प्रेरणा

 

  • …गरीब कल्याण मेला ने सेवा की स्पर्धा का वातावरण बना दिया है। (राधनपुर, 2010),
  • स्वच्छ भारत अभियान सरकार का कार्यक्रम नहीं है, यह जन आंदोलन है। (लाल किला, 2014)
  • एक ही मंत्र-वोकल फॉर लोकल, एक ही रास्ता-आत्मनिर्भर भारत, एक ही लक्ष्य-विकसित भारत। (मन की बात, अगस्त, 2025)

मानवता और सेवा

    • यह तीन हजार दिन तक सेवा करने का अवसर नरेंद्र मोदी के कारण नहीं। यह जनता-जनार्दन के आशीर्वाद के कारण है। (गरीब कल्याण मेला, जामनगर 2010)
  • मैं प्रधानमंत्री नहीं प्रधान सेवक हूं। (लाल किला. 2024)
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शिक्षा सर्वोपरि

  • गरीबी के सामने लड़ने का उत्तम हथियार शिक्षा है। (जामनगर, 2010)
  •  आज का विद्यार्थी ही 2047 के भारत का निर्माता है। (एनईपी का शुभारंभ, 2020)

कर्म पर भरोसा

  • जो काम नहीं कर सकता, उसके बारे में बोलता नहीं हूं, और जिसके बारे में बोलता हूं तो वो काम पूरा किए बिना रुकता नहीं हूं। (वलसाड, 2010)
  •  हमारे हर वचन को हमने कर्म से सिद्ध करने का प्रयास किया है। (संसद, 2025)

महिला केंद्रित विकास

  • महिलाओं को स्थानीय स्वराज में 50% आरक्षण…पुरुषों जितना ही अधिकार महिलाओं को भी। (वडोदरा, 2010)
  •  नारी शक्ति हमारे हर प्रयास की अग्रदूत है। (संसद, 2023)

तकनीक व नवाचार को बढ़ावा

  • आईटी +आईटी=आईटी यानी इंडियन टैलेंट + इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी : इंडिया टुमारो (2010)
  •  आज का भारत एआई, क्वांटम और स्पेस टेक्नोलॉजी में विश्व का नेतृत्व करेगा। (इंडिया एआई मिशन, 2024)

लोकतंत्र और राष्ट्रवाद

  • भारत में लोकतंत्र एक प्रणाली नहीं, यह जीवनशैली है। (संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद, 2014)
  • सुरक्षा और संकल्प…मैं आतंकवाद के विरुद्ध अपनी लड़ाई छोड़ने वाला नहीं हूं। (राजकोट, 2010)
  • घर में घुसकर मारेंगे मारेंगे। (बालाकोट हमले के समय, 2019)
  • ऑपरेशन सिंदूर ने आतंक के खिलाफ लड़ाई में नई लकीर खींच दी है। हम आतंक की सरपरस्त सरकार और आतंक के आकाओं को अलग-अलग नहीं देखेंगे। पानी और खून भी एक साथ नहीं बह सकता। (मई 2025)

संस्कृति पर भरोसा

  • राधाकृष्णन जी ने भारत की संस्कृति के सार को समझकर आधुनिक स्वरूप में विश्व के समक्ष रखा। (गांधीनगर, 2010)
  • भारत की संस्कृति में वसुधैव कुटुम्बकम् का मंत्र है-यही हमारी जी-20 की आत्मा है। (जी-20 शिखर सम्मेलन, 2023)
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विकास की गरिमा
..मेरा मानना है विकास ईंट-गारे की इमारत नहीं है…इसका मतलब है सामान्य लोगों के जीवन की गुणवत्ता में सुधार। (2010)
सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास-यही हमारे विकास का सूत्र है। (संसद, 2019)


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