आप छोड़ने पर हरभजन का बड़ा खुलासा:- बोले- मेरी बात नहीं सुनी गई..

पूर्व क्रिकेटर और भाजपा नेता हरभजन सिंह ने आम आदमी पार्टी छोड़कर भाजपा में जाने की वजह पर खुलकर बात की है। उन्होंने कहा कि ‘आप’ में उनके सुझावों को गंभीरता से नहीं सुना गया और जिस उद्देश्य से वह पार्टी में शामिल हुए थे, वह पूरा नहीं हो रहा था। पंजाब में बढ़ती नशे की समस्या पर भी उन्होंने चिंता जताई और इसे युवाओं के लिए गंभीर चुनौती बताया।

क्या AAP में अपनी बात नहीं रख पाए हरभजन सिंह?

समाचार एजेंसी पीटीआई के एक पॉडकास्ट इंटरव्यू में हरभजन सिंह ने बताया कि जब पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने उन्हें ‘आप’ में शामिल होने के लिए कहा था, तब उनका उद्देश्य राज्यसभा के जरिए खेलों से जुड़े मुद्दों को उठाना था। उन्होंने उस समय स्पष्ट किया था कि वह राजनीति पर बात करने के बजाय खेलों के क्षेत्र में काम करना चाहते हैं।

हरभजन के मुताबिक, उन्होंने पार्टी के सामने कई सुझाव रखे, लेकिन उन्हें सुना नहीं गया। उनका कहना है कि उनके विचार सिर्फ विचार बनकर रह गए और जिस काम के लिए उन्होंने पार्टी ज्वाइन की थी, वह आगे नहीं बढ़ सका।

क्या इसी वजह से हरभजन ने AAP छोड़कर BJP का दामन थामा?

हरभजन सिंह ने कहा कि अगर उनके सुझाए कामों की दिशा में छोटा-सा कदम भी उठाया जाता, तो शायद वह पार्टी नहीं छोड़ते। लेकिन जब उनकी बातों पर कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली और उनके पार्टी में शामिल होने का मूल उद्देश्य पूरा नहीं हुआ, तो उन्होंने पार्टी छोड़ने का फैसला किया। हरभजन को 2022 में ‘आप’ ने राज्यसभा भेजा था। इसके बाद इसी साल अप्रैल में उन्होंने छह अन्य नेताओं के साथ भाजपा का दामन थाम लिया।

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क्या AAP के ‘गद्दार’ कहने पर हरभजन ने दिया जवाब?

आम आदमी पार्टी की ओर से पार्टी छोड़ने वाले सांसदों पर तीखी प्रतिक्रिया दी गई थी और उन्हें विश्वासघात का आरोप झेलना पड़ा। हरभजन के जालंधर स्थित घर के बाहर भी विरोध प्रदर्शन हुआ और उनका पुतला जलाया गया। इस पर हरभजन ने कहा कि उन्हें नहीं पता कि प्रदर्शनकारी कौन थे, लेकिन वह किसी का नाम नहीं लेना चाहते। उन्होंने सवाल किया कि आखिर उन्होंने किसके साथ विश्वासघात किया है। हरभजन ने कहा कि सिर्फ किसी को ‘गद्दार’ कह देने से वह गद्दार नहीं बन जाता। उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें किसी के दिए हुए लेबल की परवाह नहीं है।

 

 

क्या पंजाब की नशे की समस्या पर भी बोले हरभजन?

हरभजन सिंह ने पंजाब में नशे की समस्या को लेकर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि नशा केवल पंजाब ही नहीं, बल्कि जहां भी पहुंचता है, वहां के युवाओं को प्रभावित करता है। उन्होंने खेलों का उदाहरण देते हुए कहा कि एक समय पंजाब खेलों में आगे था। जालंधर के संसरपुर गांव का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि वहां से हॉकी टीम में कई खिलाड़ी आते थे। हरभजन के अनुसार, नशे की आसानी से उपलब्धता और घरों तक उसकी पहुंच ने युवाओं को नुकसान पहुंचाया है।

क्या सीमा से लगे राज्य होने के कारण पंजाब की चुनौती और गंभीर है?

हरभजन ने कहा कि पंजाब के सीमा से लगे राज्य होने के कारण यह जानना जरूरी है कि नशा राज्य में कैसे पहुंच रहा है। उन्होंने कहा कि अगर नशा राज्य में आ रहा है तो उसे रोकने के लिए कदम उठाए जाने चाहिए। उन्होंने नशे के खिलाफ सख्त कानूनों की जरूरत पर भी जोर दिया और कहा कि इसका असर पंजाब के युवाओं और परिवारों तक पहुंच रहा है।

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