दरार: उद्धव खेमे में बगावत के बीच दिल्ली में संसदीय दल की बैठक, सभी सांसदों की एकजुटता पर संशय

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पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के खेमे में बगावत के बीच दिल्ली में शिवसेना यूबीटी के संसदीय दल की बैठक बुलाई गई है। उद्धव ठाकरे के साथ मौजूद सांसदों की संख्या और एकजुटता पर संशय बरकरार है। रिपोर्ट्स के मुताबिक दिल्ली की बैठक में केवल तीन सांसद ही पहुंचे हैं।

 

महाराष्ट्र के  पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के खेमे में बगावत के बीच दिल्ली में शिवसेना यूबीटी के संसदीय दल की बैठक बुलाई गई है। उद्धव ठाकरे के साथ मौजूद सांसदों की संख्या और एकजुटता पर संशय बरकरार है। रिपोर्ट्स के मुताबिक दिल्ली की बैठक में केवल तीन सांसद ही पहुंचे हैं। छह सांसदों के पाला बदलने की खबर है। आज की बैठक में अनिल देसाई, अरविंद सावंत और संजय राउत पहुंचे हैं। दोनों पक्षों की तरफ से बयानबाजी का सिलसिला भी लगातार जारी है।

 

 

उद्धव को असली झटका जून 2022 में कैसे?

शिवसेना के स्थापना काल के बाद पार्टी में पहली बार 1991 में छगन भुजबल ने 17 विधायकों के साथ पार्टी छोड़ी थी। भुजबल ने बालासाहेब ठाकरे की कार्यशैली और पार्टी में अपनी उपेक्षा का आरोप लगाते हुए बगावत की थी। तब भुजबल ने कांग्रेस का दामन थामा था जो शिवसेना के इतिहास का पहला बड़ा राजनीतिक विद्रोह था। लेकिन, 2003 में उद्धव ठाकरे के शिवसेना के कार्यकारी अध्यक्ष बनने के बाद पार्टी चार बार टूटी। 2005 में पूर्व मुख्यमंत्री नारायण राणे ने उद्धव को पार्टी का उत्तराधिकारी बनाने का विरोध किया और पार्टी छोड़कर कांग्रेस में शामिल हो गए थे।

दूसरा विद्रोह 2006 में हुआ था जब चचेरे भाई राज ठाकरे ने अलग होकर महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) की स्थापना की थी। असली झटका जून 2022 में लगा, जब एकनाथ शिंदे ने 40 विधायकों के साथ बगावत की थी। इस विद्रोह से उद्धव का सीएम पद, पार्टी का नाम और चुनाव निशान भी छिन गया। इस टूट के बाद ही उद्धव की शिवसेना (यूबीटी) लोकसभा चुनाव में 9 और विधानसभा चुनाव में 20 सीटों तक ही सिमट कर रह गई।

बीएमसी में भी टूटा वर्चस्व
बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) पर 30 साल का वर्चस्व भी इस साल जनवरी में हुए चुनाव में टूट गया। अभी एकनाथ शिंदे की बगावत के 4 साल भी पूरे नहीं हुए कि शिवसेना (यूबीटी) के 9 में से 6 सांसद उद्धव से अलग होग नया गुट बना लिया है।

बाल ठाकरे के समय एक बार, उद्धव के कार्यकाल में चार बार टूट चुकी शिवसेना

महाराष्ट्र की राजनीति में खुद को बाघ के रूप में पेश करने वाली शिवसेना में टूट का इतिहास बनता जा रहा है। 1966 में शिवसेना के संस्थापक प्रमुख बालासाहेब ठाकरे ने संगठन को मजबूत जनाधार दिया, लेकिन पार्टी में कई बार बड़े विभाजन भी हुए। बाल ठाकरे के समय में जहां शिवसेना में एक बड़ी टूट दर्ज हुई, वहीं उद्धव के नेतृत्व में पार्टी को कई बड़े झटके झेलने पड़े। ताजा मामला शिवसेना (यूबीटी) के 6 सांसदों का विद्रोह है जिससे ठाकरे ब्रांड की साख को एक बार फिर बट्टा लगा हैं।


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