अयोध्या की पंचकोसी और 14 कोसी परिक्रमा शुरू,जयकारों से गूंज रही रामनगरी, जानें परिक्रमा का धार्मिक महत्व

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अयोध्या की पंचकोसी और 14 कोसी परिक्रमा शुरू,जयकारों से गूंज रही रामनगरी, जानें परिक्रमा का धार्मिक महत्व

धर्मनगरी अयोध्या में आज से परिक्रमा शुरू हो गई है। परिक्रमा मार्ग पर एक पग चलने भर से पूर्व जन्म के तमाम पाप धुल जाते हैं। इसे वांछित संख्या के मुताबिक पूरा करने पर लोगों की मनौतियां भी पूरी होती हैं। मान्यता है कि अयोध्या की परिक्रमा देने के बाद कार्तिक मास में कार्तिक स्नान का विशेष महत्व है।
हिंदू धर्म के प्रमुख तीर्थ स्थलों में से एक अयोध्या की प्रसिद्ध
अयोध्या आज से शुरू हो रही 14 कोसी परिक्रमा, 20 लाख श्रद्धालु करेंगे परिक्रमा , शुभ मुहूर्त रात्रि 2.09 बजे शुरू होगी परिक्रमा , 21 नवंबर रात्रि 11.38 तक चलेगी परिक्रमा , देश के विभिन्न राज्यों से श्रद्धालु पहुंच रहे अयोध्या , 42 किलोमीटर आस्था के पग पर पैदल नंगे पांव होती है परिक्रमा ,
पिछले साल करीब 15 लाख श्रद्धालु परिक्रमा करने पहुंचे थे। ऐसे में अनुमान जताया जा रहा है कि इस बार भी 15 लाख से ज्यादा श्रद्धालु पहुंचेंगे।एटीएस की निगरानी में होगी परिक्रमा , जिला प्रशासन ने सुरक्षा के किए कड़े इंतजाम।
अयोध्या के प्रतिष्ठित महंत राजकुमार दास ने बताया कि मान्यता है कि परिक्रमा मार्ग पर एक पग चलने भर से पूर्व जन्म के तमाम पाप धुल जाते हैं। इसे वांछित संख्या के मुताबिक पूरा करने पर लोगों की मनौतियां भी पूरी होती हैं। राजकुमार दास ने बताया कि अयोध्या की परिक्रमा का महात्म और भी ज्यादा है। क्योंकि यहां की परिक्रमा का मतलब अयोध्या के पांच हजार से अधिक मंदिरों में विराजमान ठाकुरजी व ऋषियों-मुनियों के स्थलों की परिक्रमा एक ही बार में पूरी कर लेना है। अक्षय नवमी पर किया गया पुण्य अक्षय हो जाता है।
अयोध्या में लगती है 84, 14 और ये 5 कोस की परिक्रमा
अयोध्या में पूरे वर्ष कोई ना कोई धार्मिक आयोजन होता रहता है लेकिन कार्तिक मास में होने वाली परिक्रमा का विशेष महत्व है। यहां 84, 14 और 5 कोस की भी परिक्रमा लगती है। 5 कोस की परिक्रमा अयोध्या क्षेत्र में लगती है, 14 कोस की परिक्रमा अयोध्या शहर में लगती है और 84 कोस की परिक्रमा पूरे अवध क्षेत्र की लगती है। मान्यता है कि अयोध्या की परिक्रमा देने के बाद कार्तिक मास में कार्तिक स्नान का विशेष महत्व है। वहीं जो 14 कोस की परिक्रमा नहीं लगा पाते, वे देवोत्थान एकादशी के दिन पंचकोशी की परिक्रमा करते हैं
परिक्रमा से शरीर की होती है शुद्धि
मान्यता है कि परिक्रमा की परंपरा आज से नहीं बल्कि सदियों से चल रही है। जिस तरह मथुरा, वृंदावन और ब्रज कोस की परिक्रमा लगती है, उसी तरह अयोध्या धर्म नगरी की परिक्रमा लगती है। ऐसा करने से पंचतत्वों से निर्मित इस शरीर की शुद्धि होती है। अयोध्या की परिक्रमा करने से ना सिर्फ इस जन्म के बल्कि सभी जन्मों के पाप नष्ट हो जाते हैं और मोक्ष की प्राप्ति होती है। परिक्रमा देने के बाद सरयू नदी में स्नान किया जाता है और श्रीराम के जयघोष के साथ परिक्रमा पूरी होती है। वैज्ञानिकों के अनुसार, देशभर के सभी तीर्थों पर एक विशेष ऊर्जा महसूस होती है और यह ऊर्जा मंत्रों और पूजा-पाठ और धार्मिक कार्यों से निर्मित होती है। जब यह ऊर्जा शरीर में प्रवेश करती है, तब मन में शांति आती है और आत्मबल मजबूत होता है।परिक्रमा मार्ग में जगह-जगह सरकारी चिकित्सा सेवाओं के अलावा समाजसेवी संस्थाओं के कैंप लगे हैं। डीएम नितीश कुमार बताया कि सुरक्षा व श्रद्धालुओं की सुविधाओं की व्यवस्था की गई है।

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