पाकिस्तान पानी के लिए तरसा- भारत के सामने गिड़गिड़ाया, 4 बार पत्र लिखकर की सिंधु जल संधि बहाल करने की अपील

 

पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत की ओर की गई कार्रवाई से पाकिस्तान के पसीने छूट गए हैं। भारत के सिंधु जल संधि को स्थगित करने से पाकिस्तान बूंद-बूंद पानी के लिए तरस रहा है। ऑपरेशन सिंदूर के जवाब में भारत के खिलाफ हमले की कोशिश कर रहा पाकिस्तान अब पूरी तरह से घुटनों पर आ गया है। इसलिए वह लगातार भारत के सामने गिड़गिड़ाकर सिंधु जल संधि को बहाल करने की अपील कर रहा है। बताया जा रहा है कि पाकिस्तान करीब चार बार भारत को पत्र लिखकर सिंधु जल संधि दोबारा शुरू करने की गुहार लगा चुका है।

मीडिया रिपोर्ट्स में कहा गया है कि पाकिस्तान के जल संसाधन सचिव सैयद अली मुर्तजा ने भारत के जल शक्ति मंत्रालय को कुल चार पत्र भेजे हैं, जिसमें संधि को निलंबित करने के फैसले की समीक्षा करने का आग्रह किया गया है। बताया जा रहा है कि तीन पत्र ऑपरेशन सिंदूर के बाद लिखे गए थे। पाकिस्तान एक ओर संधि को बहाल करने की मांग कर रहा है तो दूसरी ओर कह रहा है कि जल संधि का निलंबन समझौते का उल्लंघन है। हालांकि भारत की ओर से पत्रों को लेकर प्रतिक्रिया नहीं आई है।

 

 

पहलगाम में आतंकी हमले के बाद भारत ने स्थगित किया था सिंधु जल समझौता
पहलगाम में 22 अप्रैल 2025 को हुए आतंकी हमले के बाद भारत सरकार ने 23 अप्रैल को सिंधु जल समझौते (1960) को तत्काल प्रभाव से स्थगित करने की घोषणा की। यह कदम पाकिस्तान द्वारा सीमा पार आतंकवाद को समर्थन देने के जवाब में उठाया गया था। दोनों देशों के बीच चार युद्धों और दशकों से जारी सीमा पार आतंकवाद के बावजूद इस संधि को बरकरार रखा गया था। सिंधु नदी के जल पर पाकिस्तान की 70 फीसदी कृषि निर्भर करती है। कई शहरों के लिए पेयजल की आपूर्ति भी इस नदी से की जाती है।

संघर्ष विराम के बाद भी समझौते पर स्थगन जारी
भारत-पाकिस्तान के बीच चार दिन तक चले संघर्ष के बाद बीती 10 मई को इस पर विराम लग गया था। पाकिस्तान की ओर से घुटने टेके जाने के बाद भारत ने 10 तारीख को शाम पांच बजे से संघर्ष विराम का एलान किया। तब विदेश मंत्रालय ने बताया था कि संघर्ष विराम के लिए भारत अपनी शर्तों पर तैयार हुआ है। संघर्ष विराम के बीच सिंधु जल संधि का निलंबन जारी रहेगा।

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सिंधु जल समझौता
सिंधु जल समझौता, 1960 में भारत और पाकिस्तान के बीच हस्ताक्षरित एक जल-बंटवारा समझौता है। इसमें विश्व बैंक ने मध्यस्थता की थी। इस समझौते का उद्देश्य सिंधु नदी और उसकी सहायक नदियों के पानी के उपयोग को लेकर दोनों देशों के बीच विवादों को रोकना था। इस संधि के तहत, हिमालय के सिंधु नदी बेसिन की छह नदियों को दो भागों में बांटा गया है। पूर्वी नदियों ब्यास, रावी और सतलुज का पानी भारत को मिलता है जबकि पश्चिमी नदियों सिंधु, झेलम और चिनाब का कंट्रोल पाकिस्तान के पास आया। समझौते के तहत भारत को लगभग 30 प्रतिशत और पाकिस्तान को 70 प्रतिशन पानी का हक मिला। इस समझौते में स्पष्ट तौर पर लिखा गया है कि झेलम, चिनाब और सिंधु नदियों का पानी भारत को पाकिस्तान में जाने देना होगा।

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