नेपाल में बाढ़ से आई तबाही का मंजर विचलित कर रहा है। भारत के लोग बड़ी संख्या में लापता हैं। महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश के लापता लोगों की तलाश जारी है। भारतीय वायुसेना (IAF) का विमान राहत और बचाव कार्य में मदद कर रहा है। बिहार और उत्तर प्रदेश की सीमा नेपाल से लगती है, ऐसे में संवेदनशील इलाकों और नदियों के जलस्तर की लगातार निगरानी हो रही है।
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महाराष्ट्र के 37 तीर्थयात्री काठमांडू के लिए रवाना हुए
कैलाश मानसरोवर यात्रा पूरी करने के बाद तिब्बत में फंसे महाराष्ट्र के 37 तीर्थयात्री, मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के दखल के बाद शुक्रवार सुबह काठमांडू के लिए रवाना हो गए। मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) के अनुसार, ठाणे, पुणे, रायगढ़, अलीबाग और डोंबिवली के तीर्थयात्रियों का यह समूह सुबह करीब 6 बजे न्यालम चेक-पोस्ट के रास्ते तिब्बत के सागा से निकला और सुरक्षित रूप से नेपाल की राजधानी की ओर बढ़ रहा है। बयान में कहा गया है कि काठमांडू से उनकी वापसी की उड़ान 29 अगस्त को दोपहर 2 बजे तय है, इसलिए उनके लिए समय पर राजधानी पहुँचना बहुत जरूरी है।
नेपाली सेना ने झील के टूटने की जानकारी दी
नेपाल पहले से ही बाढ़ की तबाही से जूझ रहा है, और अब चिंताएं बढ़ गई हैं कि नई बाढ़ आ सकती है। खबर है कि शुक्रवार को छोचेन खोला और पुरेपु त्सांगपो नदियों के संगम के पास बनी एक बड़ी झील (बैरियर लेक) टूट गई है। काठमांडू पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, रसुवा के मुख्य जिला अधिकारी नरेंद्र परियार ने बताया कि नेपाली सेना ने उन्हें झील के टूटने की जानकारी दी है। दक्षिण-पश्चिम चीन के सिचुआन प्रांत के लॉन्गचांग शहर में भूकंप के झटकों के बाद, नेपाल पुलिस ने बताया कि त्रिशूली इलाके के लोगों को एक बार फिर सुरक्षित जगहों पर पहुंचाया गया है, क्योंकि ऊपर से पानी के तेज बहाव के कारण नदी का जलस्तर बढ़ने का खतरा पैदा हो गया है।
नेपाल में भारत के पूर्व राजदूत मंजीव सिंह ने क्या कहा?
नेपाल में भारत के पूर्व राजदूत मंजीव सिंह पुरी ने कहा, ‘हमें ऐसी रिपोर्ट मिली हैं जिनसे पता चलता है कि कई भारतीय-अमेरिकी अभी लापता हैं। फिलहाल उनसे कोई संपर्क नहीं हो पा रहा है, इसलिए वे असल में लापता हैं। उम्मीद है कि सभी सुरक्षित होंगे और स्थिति सिर्फ बातचीत में कुछ समय की रुकावट की वजह से है। बचाव और खोज अभियान के अच्छे से चलने की उम्मीद के साथ-साथ, हमें उनके समर्थन में एकजुट होकर खड़ा होना चाहिए।’
‘हम नेपाल के दुख को समझते हैं’
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स्थानीय व्यक्ति ने क्या बताया?
नेपाल का एक स्थानीय व्यक्ति ने कहा, ‘सभी लोग सुरक्षित बाहर निकलने में कामयाब रहे। हम बहुत ज्यादा कीचड़ में फंस गए थे। हमने सब कुछ खो दिया। हमारे घर, दुकानें और सामान। हमें जरा भी अंदाजा नहीं था कि ऐसा कुछ होने वाला है। हम अपने काम में व्यस्त थे। शुरू में, हमने बस लोगों को आते-जाते देखा और सोचा कि यह सामान्य बात है। लेकिन जब हमने त्रिशूली और धोबी धाराओं से पानी को 50 फीट ऊंचा उठते देखा, तो हम भागने लगे। हम फंस गए। कई लोग बह गए। पूरा बाजार इलाका बह गया। त्रिशूली बाजार इलाके में अब एक भी व्यक्ति नहीं बचा है। हम किसी तरह बच निकले।
जेसीबी ड्राइवर ने क्या बताया
नेपाल का एक जेसीबी ड्राइवर ने कहा, ‘हमारे सीनियर अधिकारियों ने हमें निर्देश दिया कि ऊपर की तरफ पानी का स्तर बढ़ रहा है, इसलिए हमें अपने उपकरणों के साथ सुरक्षित जगह पर चले जाना चाहिए और इंतजार करना चाहिए। हमें बताया गया कि अभी काम शुरू न करें बल्कि सिग्नल का इंतजार करें। सभी लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया है।





