नेपाल में बुधवार को आई प्रलयंकारी भोटे कोशी बाढ़ ने पूरे देश में भारी तबाही मचाई है, जिसमें अब तक मरने वालों का आंकड़ा बढ़कर 475 हो चुका है। इस प्राकृतिक आपदा के बाद राहत और बचाव कार्य युद्ध स्तर पर जारी हैं, लेकिन इसी बीच तिब्बत सीमा पर दोबारा डैम फटने और पड़ोसी देश चीन में आए भूकंप ने नेपाल की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। उफनती नदियों और लगातार भूस्खलन के बीच लापता लोगों को सुरक्षित निकालने के लिए नेपाल पुलिस और सेना की टीमें अपनी जान जोखिम में डालकर काम कर रही हैं।
रसुवा हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट की सुरंग में किस तरह चल रहा है सेना का रेस्क्यू?
नेपाल के रसुवा जिले में आई इस बाढ़ के कारण एक बड़ी जलविद्युत परियोजना की सुरंग में कई श्रमिक फंस गए हैं। नेपाली सेना ने शुक्रवार सुबह से ही इन फंसे हुए लोगों को निकालने के लिए एक बेहद जटिल बचाव अभियान शुरू किया है। इस खतरनाक काम के लिए सेना की एक विशेष टीम को तकनीकी उपकरणों और विशिष्ट प्रशिक्षण के साथ सुरंग में उतारा गया है। बेहद कठिन रास्तों और खतरनाक परिस्थितियों के बावजूद, सेना की टीम ने अब तक दो श्रमिकों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया है। सुरंग के भीतर अभी और कितने लोग फंसे हैं, इसका पता लगाने के लिए खोजी अभियान लगातार जारी है।
चीन के भूकंप और तिब्बती डैम के फटने से खतरा कितना बढ़ गया है?
नेपाल में जारी राहत कार्यों के बीच शुक्रवार को चीन के सिचुआन प्रांत के लोंगचांग शहर में 5.1 तीव्रता का भूकंप आया। इस भूकंप के तुरंत बाद नेपाल के त्रिशूली और भोटे कोशी नदी तंत्र में पानी का स्तर तेजी से बढ़ने लगा है। नेपाल पुलिस को सूचना मिली है कि तिब्बत की तरफ बना एक जल बांध (वाटर डैम) दोबारा टूट गया है, जिससे भारी मात्रा में मलबे और पत्थरों के साथ पानी का तेज बहाव नीचे की ओर आ रहा है। नेपाल पुलिस के अधिकारी पी. चौधरी ने बताया कि इस नए खतरे के कारण सड़क निर्माण और राहत कार्य में लगे सभी वाहनों और बचाव दलों को तुरंत सुरक्षित स्थानों पर वापस बुला लिया गया है।
भारतीय नागरिकों की सुरक्षा और सरकारी स्तर पर क्या कदम उठाए गए हैं?
इस भीषण आपदा के बीच भारत सरकार और नेपाल प्रशासन मिलकर राहत कार्यों में जुटे हैं। तमिलनाडु के 21 तीर्थयात्रियों को बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों से सुरक्षित बचाकर काठमांडू पहुंचा दिया गया है। नेपाल में भारतीय राजदूत नवीन श्रीवास्तव ने खुद इन नागरिकों से मुलाकात कर उनका हालचाल जाना और उन्हें जल्द से जल्द भारत भेजने की व्यवस्था की है। दूसरी तरफ, नेपाल के प्रधानमंत्री बलेंद्र शाह ने सिंह दरबार में कैबिनेट की एक आपातकालीन बैठक बुलाई है। इस बैठक में रसुवा और अन्य बाढ़ प्रभावित इलाकों में राहत कार्यों की समीक्षा करने के साथ-साथ पुनर्निर्माण और आपदा प्रबंधन की नई रणनीतियों पर महत्वपूर्ण चर्चा की जा रही है।





