वाल्मीकि निगम विवाद: मंत्री बी नागेंद्र ने दिया इस्तीफा, बोले- पार्टी को शर्मिंदगी से बचाने के लिए हट रहा हूं

कर्नाटक के मंत्री बी नागेंद्र ने महार्षि वाल्मीकि अनुसूचित जनजाति विकास निगम में कथित वित्तीय अनियमितताओं के मामले में मंत्रिमंडल से इस्तीफे का एलान कर दिया। उन पर लंबे समय से पद छोड़ने का दबाव था। भाजपा लगातार उनके खिलाफ प्रदर्शन कर रही थी और उन्हें मंत्रिमंडल से हटाने की मांग कर रही थी। नागेंद्र ने कहा कि उन्होंने स्वेच्छा से पद छोड़ने का फैसला किया है, जिससे दल को शर्मिंदगी का सामना न करना पड़े। उन्होंने भाजपा पर भी निशाना साधा और खुद को उसकी ‘मनुवादी राजनीति’ का शिकार बताया।

यह मामला इसलिए अहम है क्योंकि जिस निगम में कथित गड़बड़ी के आरोप लगे हैं, वह अनुसूचित जनजातियों के विकास से जुड़ा है। जांच एजेंसियों के अनुसार, निगम के धन को अलग-अलग खातों में भेजे जाने के आरोपों की जांच हुई है। हालांकि इन आरोपों पर अंतिम फैसला अदालत में होना बाकी है।
नागेंद्र ने क्या-क्या कहा? 
बी नागेंद्र ने कहा कि वह भाजपा की ओर से दी जा रही ‘झूठी धमकियों’ से नहीं डरते और मुख्यमंत्री से मिलने के बाद एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में इस मुद्दे पर बात करेंगे। नागेंद्र ने कहा, ‘मैं भाजपा की झूठी धमकियों से नहीं डरूंगा। मैं प्रेस कॉन्फ्रेंस करूंगा। मैं मुख्यमंत्री से मिलने जा रहा हूं। मेरी वजह से पार्टी को शर्मिंदा नहीं होना चाहिए। मैं मुख्यमंत्री के साथ इस मामले पर विस्तार से चर्चा करूंगा।’
सीएम डीके शिवकुमार ने क्या कहा? 
डीके शिवकुमार ने कहा कि उन्होंने मुझे फ़ोन करके बताया। वह मुझसे मिलने का इंतजार कर रहे हैं। शायद वह कृष्णा ऑफिस में होंगे। उन्होंने फोन पर कहा कि वह घर पर हैं या कृष्णा में कहीं हैं, मैं वहां पहुंचूंगा। आपने ही मुझे अभी बताया कि उन्होंने इसकी घोषणा कर दी है। मुझे भी फोन आया था। मैं उनसे मिलूंगा। उन्होंने फैसला किया है कि वह न सिर्फ मंत्री पद से, बल्कि एमएलए पद से भी इस्तीफा देंगे। इससे उन्हें बहुत दुख पहुंचा है। क्योंकि वह एक बेगुनाह इंसान हैं। मैंने इसकी जांच की है, मैंने सभी रिपोर्ट देखी हैं, मैंने सबसे बात की है। इसलिए उन्हें अपराधी की तरह दिखाना, जिस तरह से भाजपा ने चार बार जीत चुके एक दलित नेता के साथ बर्ताव किया है, इससे न सिर्फ़ उन्हें दुख पहुंचा है, बल्कि पूरे समुदाय और गरीब लोगों को भी दुख पहुंचा है, आज हर कोई दुखी है।

क्या है पूरा मामला? 
महार्षि वाल्मीकि अनुसूचित जनजाति विकास निगम का विवाद मई 2024 में सामने आया था। निगम के लेखा अधिकारी पी. चंद्रशेखरन की मृत्यु के बाद मिले एक नोट में धन के अनधिकृत हस्तांतरण का आरोप लगाया गया था। इसके बाद जांच शुरू हुई। जांच में निगम के बैंक खाते से बड़ी रकम अलग-अलग खातों में भेजे जाने के आरोप सामने आए। उपलब्ध जांच संबंधी जानकारी के अनुसार, करीब 89.63 करोड़ रुपये के कथित अवैध हस्तांतरण की बात कही गई। कुछ रिपोर्टों में कुल कथित धन हेरफेर करीब 187 करोड़ रुपये बताया गया है। ये आरोप जांच एजेंसियों के हैं और इन पर अंतिम न्यायिक फैसला नहीं हुआ है।

पहले भी दे चुके हैं इस्तीफा
जब यह विवाद 2024 में सामने आया था, उस समय बी नागेंद्र जनजातीय कल्याण विभाग संभाल रहे थे। बढ़ते राजनीतिक विवाद के बीच उन्होंने जून 2024 में मंत्री पद छोड़ दिया था। बाद में उन्हें तीन अगस्त 2026 को फिर मंत्रिमंडल में शामिल किया गया। इसके बाद भाजपा ने एक बार फिर उनके खिलाफ मोर्चा खोल दिया और उन्हें हटाने की मांग तेज कर दी।

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विधानसभा से सड़क तक चला विरोध
पिछले दिनों भाजपा ने इस मुद्दे पर कर्नाटक में लगातार प्रदर्शन किए। बेंगलुरु में विधान सौध तक मार्च निकाला गया। भाजपा नेताओं और कार्यकर्ताओं ने नागेंद्र को हटाने की मांग की। विपक्ष के विरोध का असर विधानसभा की कार्यवाही पर भी पड़ा। विधानसभा और विधान परिषद में हंगामा हुआ। 24 अगस्त को विधानसभा का सत्र तय समय से तीन दिन पहले अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया गया।

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