अयोध्या- इतिहास से वर्तमान तक-: बुकलेट में मिलेगी अब राम मंदिर की पूरी कहानी

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श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की ओर से श्रद्धालुओं और देश-विदेश से आने वाले आगंतुकों के लिए एक विशेष बुकलेट तैयार कराई जा रही है। इस पुस्तक में राम मंदिर निर्माण की संपूर्ण यात्रा को विस्तार से प्रस्तुत किया जाएगा। बुकलेट में इतिहास से वर्तमान तक मंदिर की परिकल्पना से लेकर निर्माण पूर्ण होने तक की हर महत्वपूर्ण जानकारी क्रमबद्ध रूप में संकलित की गई है। राम मंदिर ट्रस्ट जल्द ही बुकलेट का विमोचन कराने की तैयारी कर रहा है।

 

अयोध्या का इतिहास जस का तस, पहले व अब …शीर्षक से श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र एक बुकलेट तैयार करा रहा है। बुकलेट में राम मंदिर के पौराणिक व मध्यकालीन इतिहास से लेकर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की ओर से कराए जा रहे मंदिर निर्माण की पूरी जानकारी साझा की जा रही है। इस बुकलेट में पूरी अयोध्या के प्राचीन भूगोल का भी जिक्र किया गया है। किस तरह अयोध्या सांझी संस्कृति की गवाह कही जाती है, इसका भी उल्लेख किया गया है। अयोध्या के प्राचीन मंदिरों की भी जानकारी इसमें संग्रहीत की जा रही है। 1528 से शुरू हुई मंदिर की लड़ाई के बारे में भी बताया गया है।

इसमें मंदिर निर्माण यात्रा के विभिन्न आयामों को तथ्यों और संदर्भों सहित संकलित किया गया है, जिससे यह प्रकाशन केवल सूचना-पुस्तिका ही नहीं, बल्कि एक ऐतिहासिक दस्तावेज का रूप ले सके। मंदिर निर्माण में कितने पत्थर लगे हैं, इसकी भी जानकारी मिलेगी। राम मंदिर में अकेले करीब चार लाख घनफुट पत्थरों का इस्तेमाल किया गया है। बताया जा रहा है कि यह बुकलेट श्रद्धालुओं के लिए मार्ग दर्शिका का कार्य करेगी। इसमें मंदिर की वास्तुकला, निर्माण में प्रयुक्त पत्थरों और तकनीक, परिसर की विशेषताओं का भी उल्लेख होगा।

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जिनका योगदान उनको भी सम्मान
बुकलेट में मंदिर निर्माण से जुड़े प्रत्येक चरण शिलान्यास, आधार संरचना, पत्थरों की नक्काशी, वास्तु योजना और तकनीकी विशेषताओं का विस्तृत विवरण रहेगा। साथ ही जिन संतों, अभियंताओं, शिल्पकारों, दानदाताओं और कार्यकर्ताओं ने इस महाअभियान में योगदान दिया, उनकी भूमिका का भी उल्लेख किया जाएगा, ताकि आने वाली पीढ़ियां इस ऐतिहासिक प्रयास को समझ सकें। यह बुकलेट न केवल श्रद्धालुओं के लिए उपयोगी सिद्ध होगी, बल्कि राम मंदिर निर्माण की गाथा को संरक्षित रखने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।


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